जोधपुर का जलवा: काजरी के 7 वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत में शामिल

जोधपुर का जलवा: काजरी के 7 वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत में शामिल

जोधपुर. कृषि अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान के लिए केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) जोधपुर के सात वैज्ञानिकों को दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की वर्ष 2026 की सूची में शामिल किया गया है ।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की ओर से जारी सूची में काजरी के वर्तमान निदेशक डॉ. हनुमान सहाय जाट और पूर्व निदेशक डॉ. ओम प्रकाश यादव भी शामिल हैं। दो वैज्ञानिक डॉ. जे.सी. तरफदार और डॉ. दिलीप जैन सेवानिवृत्त है ।

इसके अलावा वर्तमान में कार्यरत डॉ. आनंद कुमार नोरेम, डॉ. दीपेश माचिवाल और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रियब्रंत सांत्रा शामिल है। यह सूची शोधपत्रों के उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखक समायोजित मापदंडों और अन्य वैज्ञानिक संकेतकों के आधार पर तैयार की जाती है। वर्ष 2026 में भारत के 6,953 वैज्ञानिकों ने इस सूची में जगह बनाई है । अमेरिका के 73,638 वैज्ञानिक सूची में शामिल हुए और देशों में वह पहले स्थान पर रहा, जबकि भारत आठवें स्थान पर रहा ।

डॉ आनंद कुमार नोरेम और डॉ दीपेश माचिवाल
डॉ आनंद कुमार नोरेम और डॉ दीपेश माचिवाल

जेएनवीयू के डॉ. सेंगवा के शोध को 8,782 उद्धरण

सूची में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. आर.जे. सेंगवा को लगातार नौवीं बार स्थान मिला है। पॉलिमर और एप्लाइड फिजिक्स के 1,33,253 वैज्ञानिकों में डॉ. सेंगवा ने 200वां स्थान हासिल किया। उनके शोध का प्रमुख क्षेत्र पॉलिमर आधारित सामग्री है, जिसका उपयोग लिथियम-आयन बैटरियों और उन्नत माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है ।

डॉ सेंगवा के 213 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। गूगल स्कॉलर के अनुसार उनके शोधपत्रों को 8,782 उद्धरण मिले हैं और उनका एच-इंडेक्स 55 है। प्रो. सेंगवा के निर्देशन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले दो विद्यार्थी डॉ. शोभना चौधरी और डॉ. प्रियंका धतरवाल भी कुछ वर्षों से टॉप 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में नामित हो रहे है। डॉ. चौधरी सीएसआइआर-एचआरडीसी में वैज्ञानिक-एफ के पद पर कार्यरत है।

स्कोपस के आंकड़ों पर तैयार होती है सूची

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. जॉन पी.ए. इओनिडिस के योगदान से तैयार यह सूची स्कोपस डेटाबेस के वैज्ञानिक उद्धरण आंकड़ों पर आधारित है। वर्ष 2019 से इसके नौ संस्करण जारी हो चुके हैं। इसमें शोधपत्रों की गुणवत्ता और उपयोगिता के साथ उद्धरण, एच-इंडेक्स और सह-लेखन जैसे मानकों को शामिल किया जाता है।

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