भास्कर न्यूज | सीतामढ़ी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के ए.डी.आर. भवन में मानव तस्करी पर जागरूकता शिविर का उद्घाटन हुआ। नालसा, नई दिल्ली और बालसा, पटना के निर्देश पर कार्यक्रम रखा गया। प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष , जिला विधिक सेवा प्राधिकार और डालसा की सचिव संजना गांधी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। प्रभारी अध्यक्ष ने बताया कि किसी व्यक्ति को बल प्रयोग से, डराकर, धोखा देकर, हिंसा जैसे तरीकों से भर्ती करना, तस्करी करना, बंधक बनाकर रखना मानव तस्करी है। पीड़ित से देह व्यापार, घरेलू काम, गुलामी जैसे काम उसकी इच्छा के खिलाफ कराए जाते हैं। यह आधुनिक अपराध देश के लगभग हर हिस्से में तेजी से फैल रहा है। मानव तस्करी के उद्देश्य जबरदस्ती भीख मंगवाना, घरेलू गुलामी, जबरन शादी कराना, नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की तस्करी कराना बताए गए। शिविर में मानव तस्करी के पीछे कारण भी बताए गए। बेहतर जीवन की चाह, नौकरी पाने की कोशिश, परिवार का भरण-पोषण, गरीबी से बचने की मजबूरी प्रमुख कारण बताए गए। लोक अदालत में होने वाली प्रक्रिया और निष्पादन के तरीकों की जानकारी दी गई। सचिव संजना गांधी ने डालसा की ओर से पीड़िताओं को विधिक सहायता के तहत प्रतिकर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर चर्चा की। लोक अदालत के महत्व और उपयोगिता पर भी जानकारी दी गई। शिविर में बताया गया कि तस्करी के शिकार लोगों में 51 प्रतिशत महिलाएं हैं। 28 प्रतिशत बच्चे हैं। 21 प्रतिशत पुरुष हैं। 43 प्रतिशत पीड़ित अपने ही देश की सीमाओं के भीतर घरेलू स्तर पर मानव तस्करी का शिकार बनते हैं। भारत उन देशों में शामिल है, जहां मानव तस्करी के शिकार लोगों की संख्या सबसे बड़ी है। भास्कर न्यूज | सीतामढ़ी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के ए.डी.आर. भवन में मानव तस्करी पर जागरूकता शिविर का उद्घाटन हुआ। नालसा, नई दिल्ली और बालसा, पटना के निर्देश पर कार्यक्रम रखा गया। प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष , जिला विधिक सेवा प्राधिकार और डालसा की सचिव संजना गांधी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। प्रभारी अध्यक्ष ने बताया कि किसी व्यक्ति को बल प्रयोग से, डराकर, धोखा देकर, हिंसा जैसे तरीकों से भर्ती करना, तस्करी करना, बंधक बनाकर रखना मानव तस्करी है। पीड़ित से देह व्यापार, घरेलू काम, गुलामी जैसे काम उसकी इच्छा के खिलाफ कराए जाते हैं। यह आधुनिक अपराध देश के लगभग हर हिस्से में तेजी से फैल रहा है। मानव तस्करी के उद्देश्य जबरदस्ती भीख मंगवाना, घरेलू गुलामी, जबरन शादी कराना, नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की तस्करी कराना बताए गए। शिविर में मानव तस्करी के पीछे कारण भी बताए गए। बेहतर जीवन की चाह, नौकरी पाने की कोशिश, परिवार का भरण-पोषण, गरीबी से बचने की मजबूरी प्रमुख कारण बताए गए। लोक अदालत में होने वाली प्रक्रिया और निष्पादन के तरीकों की जानकारी दी गई। सचिव संजना गांधी ने डालसा की ओर से पीड़िताओं को विधिक सहायता के तहत प्रतिकर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर चर्चा की। लोक अदालत के महत्व और उपयोगिता पर भी जानकारी दी गई। शिविर में बताया गया कि तस्करी के शिकार लोगों में 51 प्रतिशत महिलाएं हैं। 28 प्रतिशत बच्चे हैं। 21 प्रतिशत पुरुष हैं। 43 प्रतिशत पीड़ित अपने ही देश की सीमाओं के भीतर घरेलू स्तर पर मानव तस्करी का शिकार बनते हैं। भारत उन देशों में शामिल है, जहां मानव तस्करी के शिकार लोगों की संख्या सबसे बड़ी है।

