गुरुवार सुबह बलिया कलेक्ट्रेट में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन डीएम प्रतिनिधि को सौंपा, जिसमें SIR प्रक्रिया तत्काल रद्द करने की मांग की गई। संगठन ने बताया कि निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया से देशभर में मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। इनमें 70-80 फीसदी नाम ‘प्रवासी’ या ‘अनुपस्थित’ होने के आधार पर हटाए गए हैं। इस प्रक्रिया में 5-6 करोड़ नागरिकों को नोटिस भेजकर नागरिकता साबित करने का बोझ उन्हीं पर डाला गया है, जो संवैधानिक न्याय प्रक्रिया के खिलाफ है। इससे देश में डर और अनिश्चितता का माहौल बना है। गरीब, वंचित, प्रवासी श्रमिक, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। दिल्ली के बेला एस्टेट में SIR से पहले 729 मतदाता थे, जो बाद में घटकर सिर्फ एक रह गए। चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने भी इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।

