मेरठ के नादिर अली और मोहम्मद इस्हाक वक्फ अल-अल-औलाद नंबर 265 की संपत्तियों से जुड़ा विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। इस मामले में पहली बार एक पक्ष फरहत मसूद की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में मुतवल्ली फैज आफताब पर गंभीर आरोप लगाकर उन्हें हटाए जाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की मानें तो वक्फ की करोड़ों की संपत्ति बेचकर मुतवल्ली ने अपनी संपत्ति अलग-अलग शहरों में अर्जित कर ली हैं। याचिका स्वीकार होने के बाद कोर्ट ने इस मामले में दो सुनवाई की हैं। उनका दावा है कि उनके पास मुतवल्ली की मनमानी व गैरवाजिब तरीके से किए गए कृत्यों का लंबा चौड़ा चिट्ठा है। पहले एक नजर पूरे विवाद पर
मेरठ शहर के रहने वाले दो भाईयों नादिर अली शाह और मोहम्मद इस्हाक ने 28 अक्टूबर, 1941 को एक वक्फ अल-अल-औलाद के तहत अपनी संपत्तियों को रजिस्टर्ड किया था। इसके तहत लगभग 30 हजार गज में फैला महल और दिल्ली रोड पर 6 हजार गज में स्थित नादिर अली बिल्डिंग जैसी बड़ी संपत्तियां शामिल थीं। नियम के अनुसार, वक्फ की सभी संपत्ति का स्वामित्व ईश्वर पर होता है। इसका लाभ पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार लेते हैं लेकिन इसे किसी को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। मोहम्मद इस्हाक के वंशज फरहत मसूद व उनके बेटों का आरोप है कि वक्फ के मुतवल्ली फैज आफताब विभागीय मिलीभगत के जरिए इन वक्फ संपत्तियों को बेचकर निजी संपत्ति तैयार कर रहे हैं। मुतवल्ली पर नौचंदी क्षेत्र में स्थित एतिहासिक नादिर अली महल व कुछ अन्य संपत्तियों को कौड़ियों के दाम में बेचने का आरोप है। नियमानुसार पांच वर्ष रहेगा एक मुतवल्ली
याचिकाकर्ता फरहत मसूद पुत्र स्व. मसूद अहमद बताते हैं कि नादिर अली खान और मोहम्मद इस्हाक अपने जीवनकाल में मुतवल्ली रहे। नियमानुसार, दोनों में से किसी एक की मृत्यु हो जाने पर जीवित रहने वाला व्यक्ति उस संपत्ति का मुतवल्ली रहेगा। दोनों की मृत्यु के बाद मुतवल्ली की नियुक्ति दोनों व्यक्तियों की औलाद-ए-जुकूर यानी पुरुष वंशजों में से बारी बारी से पांच पांच वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। यानी एक बार नादिर अली खान के वंश से कोई पांच वर्ष के लिए मुतवल्ली बनेगा तो एक बार मोहम्मद इस्हाक के वंश से। मुतवल्ली फैज आफताब का कार्यकाल पूरा
फरहत मसूद बताते हैं कि 27 नवंबर, 2018 से पांच वर्ष के लिए फैज आफताब को इस वक्फ संपत्ति के लिए मुतवल्ली नियुक्त किया गया था। यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के आदेश पर हुई नियुक्ति 26 नवंबर, 2023 को पूरी हो चुकी है लेकिन फैज आफताब अभी भी खुद को इन संपत्तियों का मुतवल्ली बताते हैं। जबकि वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 63 के तहत उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को नियुक्ति का अधिकार है। नादिर अली के वंशज का कोई दावा नहीं
याचिका में यह भी बताया गया है कि मोहम्मद इस्हाक के वारिस दो पत्नियों के वंश से हैं। पहली पत्नी के वंश से याचिकाकर्ता फरहत मसूद खुद तो दूसरी पत्नी से फैज आफताब हैं। फैज आफताब मुतवल्ली के रूप में अपने पांच वर्ष पूरे कर चुके हैं। नादिर अली के वंशज इस पर कोई दावा नहीं कर रहे। ऐसी स्थिति में इस वक्फ संपत्तियों की देखरेख का दायित्व नियमानुसार मोहम्मद इस्हाक के वंशज फरहत मसूद का बनता है, जिन्हें मुतवल्ली बनाया जाना चाहिए। बोर्ड से भी की गई नई नियुक्ति की मांग
याचिकाकर्ता फरहत मसूद की मानें तो वह इस मामले में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अलावा उत्तर प्रदेश सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को भी 17 जुलाई, 2026 को पत्र भेज चुके हैं। रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए इस पत्र में फैज आफताब को हटाकर वहां नये मुतवल्ली को तैनात किए जाने की मांग की गई है, जिसमें नियमानुसार फरहत मसूद फिट बैठते हैं। रिट में न्यायालय से यह भी आग्रह किया गया है कि जब तक रिट लंबित है, तब तक फैज आफताब को मुतवल्ली के रूप में काम करने की अनुमति ना दी जाए। पैरवी कर रहे फराज का यह है कहना
एडवोकेट फराज फरहत की मानें तो याचिका सीधे सीधे मुतवल्ली को हटाने को लेकर डाली गई है। पूरी प्रक्रिया को न्यायालय के समक्ष लाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मुतवल्ली की मनमानी रुक सके। आरोप है कि मुतवल्ली फैज आफताब ने धोखे से कई संपत्तियों को अपने नाम चढ़वाकर बेच दिया अथवा दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कर दिया है जबकि वक्फ संपत्ति में यह संभव नहीं है। उनके पास सभी आरोपों से जुड़े मजबूत साक्ष्य हैं, जिन्हें उन्होंने इस याचिका में शामिल किया है।

