पाकिस्तान (Pakistan) की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस यानी आईएसआई (Inter-Services Intelligence – ISI) के लिए पश्चिमी बॉर्डर पर गतिविधियाँ आसान नहीं रही। ऐसे में अब उसने पूर्वी मोर्चे पर अपनी गतिविधियाँ तेज करने का काम शुरू कर दिया है। ISI लंबे समय से बांग्लादेश में आतंकी गुटों को बढ़ावा देता रहा है और इनका मुख्य मकसद पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों को निशाना बनाना रहा है। अब आईएसआई इन आतंकी गुटों को एकजुट करने का काम कर रहा है, जिससे भारत में बड़े हमले किए जा सके।
किन आतंकी गुटों पर आईएसआई का फोकस?
आईएसआई का बांग्लादेश में तीन आतंकी गुटों पर फोकस है। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB), अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) और नियो-JMB। हालांकि इन तीनों गुटों की अपनी-अपनी ताकत है, लेकिन तीनों में ही बड़े पैमाने पर ऑपरेशन करने, खासकर भारत में हमले करने की क्षमता नहीं है। आईएसआई इन तीनों गुटों को एक साथ करते हुए इनकी ताकत बढ़ाना चाहता है।
तीनों आतंकी गुटों में नहीं है एकता
आईएसआई का मानना है कि बड़े पैमाने पर काम करने के लिए इन तीनों गुटों का एकजुट होना ज़रूरी है। हालांकि तीनों आतंकी गुट एक ही कट्टरपंथी विचारधारा को मानते हैं, जिसका मकसद भारत को नुकसान पहुंचाना है, लेकिन फिर भी उनमें एकता नहीं है। आईएसआई इस कमी को दूर करना चाहता है, जिससे उनकी ऑपरेशनल ताकत बढ़ सके। ये तीनों आतंकी गुट सीधे तौर पर एक-दूसरे से नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे के इलाकों में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने से पीछे नहीं हटते। इन तीनों गुटों में इस वजह से अक्सर मतभेद भी हुए हैं और इन मतभेदों की वजह से इन गुटों को नुकसान पहुंचा और ये अपनी ताकत नहीं बढ़ा पाएं। आईएसआई इन गुटों के बीच मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। अगर एक भी गुट सहमत नहीं होता है, तो इससे ऑपरेशनल क्षमताओं पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा अगर कोई एक गुट भी इस विलय योजना से बाहर रहता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि वो अन्य गुटों के कामकाज में बाधा डालेगा।
आईएसआई चाहता है तीनों गुट जैश और लश्कर जैसे बने
पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने पिछले कई सालों में भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया। आईएसआई चाहता है कि बांग्लादेशी आतंकी गुट जैश और लश्कर जैसे बने। आईएसआई का दोनों गुटों पर अच्छा कंट्रोल रहा है और दोनों ही एक-दूसरे की गतिविधियों में दखल नहीं देते। इस वजह से इनमें कभी मतभेद नहीं हुए।

