आज का एक्सप्लेनर:हूतियों से लड़ने सऊदी जा रहीं पाक-तुर्किये की सेनाएं, पाकिस्तान ने पहले इनकार किया, आखिर किस मजबूरी में एक्टिवेट हुआ ‘मक्का पैक्ट’

आज का एक्सप्लेनर:हूतियों से लड़ने सऊदी जा रहीं पाक-तुर्किये की सेनाएं, पाकिस्तान ने पहले इनकार किया, आखिर किस मजबूरी में एक्टिवेट हुआ ‘मक्का पैक्ट’

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने पहली बार ‘मक्का पैक्ट’ एक्टिवेट कर दिया है। 2 महीने पहले हुए करार के तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा। यानी, अब हूतियों से जंग में उलझे सऊदी की मदद के लिए पाक-तुर्किये को सेनाएं भेजनी पड़ेंगी। आखिर मदद मांगने को कैसे मजबूर हुआ सऊदी, क्या वाकई दूसरे देश के लिए लड़ेंगी पाकिस्तान-तुर्किये की सेनाएं और क्या इससे भारत को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: हूतियों ने सऊदी अरब को मदद मांगने पर कैसे मजबूर किया? जवाब: सऊदी अरब के पड़ोस में है यमन। यहां की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती। यमन की मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। सऊदी के जवान सरकार की सेना के साथ मिलकर कई इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। वहीं सरकार के खिलाफ विद्रोह करके यमन के उत्तर-पश्चिम इलाके, राजधानी सना और लाल सागर के तटीय इलाके में हूतियों का कब्जा है। इन्हें ईरान से हथियार और पैसे की मदद मिलती है। 2015 से ही हूतियों और सऊदी समर्थित यमन की सेना में इलाकों पर कब्जे को लेकर छिटपुट संघर्ष चलता रहा। 2022 में संयुक्त राष्ट्र ने सीजफायर करवाया। बीते साल शुरू हुई ईरान-अमेरिका जंग के दौरान ईरान ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी पर भी हमले किए। हूतियों ने भी कई बार सऊदी पर हमला करने की धमकी दी। 5 अगस्त 2026 को हूतियों ने सऊदी समर्थित यमन सेना के कैंपों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए. हूतियों ने आरोप लगाया कि यहां सऊदी गठबंधन सेना जमावड़ा बढ़ा रही थी। इसी के साथ 4 साल पुराना सीजफायर टूट गया… सवाल-2: पाकिस्तान ने पहले टाला, फिर जमीनी सेना भेजने को क्यों तैयार हुआ? जवाब: 10 सितंबर को पाकिस्तान ने कहा, ‘सऊदी पर हूतियों के हमले के खिलाफ मक्का पैक्ट के तहत कोई कार्रवाई करने पर कोई बातचीत नहीं हुई है। जब वक्त आएगा, तब कदम उठाएंगे।’ पाकिस्तान के इस रुख के पीछे 3 वजहें थीं… 1. साझा सैन्य कमांड का कोई ढांचा नहींः तुर्किये के डिप्लोमेट रहे मुस्तफा एनेस एसेन के मुताबिक, ‘मक्का पैक्ट प्रतीकात्मक है, क्योंकि इसका एक जॉइंट सैन्य कमांड स्ट्रक्चर नहीं है। तुर्किये और पाकिस्तान का सीधे टकराव में शामिल होना मुश्किल है। 2. मध्यस्थ की भूमिका को खतराः पाकिस्तान, अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थता की भूमिका में है। उसने ईरान से हूतियों पर लगाम कसने के लिए कहा और सऊदी पर हमलों की निंदा भी की। लेकिन इससे आगे बढ़ने से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका खतरे में पड़ सकती थी। 3. शिया-सुन्नी की लड़ाई में नहीं उलझना चाहताः पाकिस्तान में शियाओं की भी बड़ी आबादी है। 2015 में सऊदी ने हूतियों के खिलाफ जंग में मदद मांगी थी, तब भी पाकिस्तान ने इनकार कर दिया था। तब के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम किसी सांप्रदायिक जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहते, क्योंकि इसकी दरारें पाकिस्तान के अंदर भी नजर आएंगी।’ इधर 10 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से फोन पर हूतियों पर हवाई हमले करने को कहा था। ट्रम्प ने मदद ठुकरा दी। फिर 15 सितंबर को हूतियों और अमेरिका में सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसमें हूतियों ने वादा किया कि वो लाल सागर में अमेरिका और इजराइल के जहाजों पर हमला नहीं करेंगे। इससे सऊदी को अमेरिकी मदद मिलने की उम्मीद और कम हो गई। सऊदी ने दावा किया कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने सऊदी के पवित्र शहर मक्का की तरफ ड्रोन छोड़े। हूतियों के प्रवक्ता याह्या सिरी का कहना था, ‘हमारा निशाना सऊदी के तेल और सैन्य ठिकाने थे, जो कि पवित्र स्थलों से काफी दूर हैं।’ हालांकि ड्रोन को रोकने के दौरान मक्का प्रांत के ताइफ शहर में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। इसके बाद पाकिस्तान का रुख बदलने लगा… सवाल-3: तो क्या वाकई पाक-तुर्किये की सेनाएं हूतियों से लड़ेंगी? जवाब: साझा बयान में कहा गया है, ‘तीनों देश सऊदी में ‘तेजी से’ जॉइंट फोर्सेज और दूसरी ताकत (यानी हथियार, इंटेलिजेंस वगैरह) तैनात करेंगे।’ हालांकि पाकिस्तानी सैनिकों का सऊदी जाना नई बात नहीं है…. वहीं तुर्किये के विदेश मंत्री फिदान ने कहा है कि मक्का पैक्ट, नाटो की तरह काम करेगा, लेकिन मदद का पैमाना आगे की बातचीत से तय होगा। तुर्किये के सामने अपनी सेना भेजने में एक अड़चन ये भी है कि उसके कानून के तहत विदेश में सेना भेजने के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी। 5 अक्टूबर के फैसले में भी कहा गया है कि सऊदी की मदद में सेनाओं की तैनाती तीनों देशों के राष्ट्रीय कानूनों और आपसी सहमति के आधार पर होगी। सवाल-4: पाकिस्तान-भारत जंग छिड़ी, तो क्या तुर्किये-सऊदी भी लड़ने आएंगे? जवाब: सऊदी और तुर्किये भारत को दुश्मन नहीं मानते, इसलिए जंग में उनके हमले की आशंका बेहद कम है। लेकिन 3 बातें गौर करनी चाहिए… पाकिस्तान पैक्ट का फायदा उठाएगा: कार्नेगी इंडिया थिंकटैंक में सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम के फेलो दिनकर पेरी के मुताबिक, ‘यह पैक्ट पश्चिम एशिया के लिए बना है, लेकिन पाकिस्तान इसे भारत के साथ संघर्षों में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा। खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनी हालात के चलते।’ सऊदी भारत पर हमला नहीं करेगा: भारत और सऊदी अरब के अच्छे कूटनीतिक संबंध हैं। सऊदी और भारत में सालाना 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। सऊदी-पाकिस्तान से यह 5 बिलियन डॉलर से भी कम है। इसलिए पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी कहते हैं, ‘अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करे या ऑपरेशन सिंदूर जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो, तो सऊदी पाकिस्तान का रक्षक बनकर नहीं आएगा।’ तुर्किये हथियार सप्लाई जारी रखेगा: रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन्स भेजे थे। पाकिस्तान के समर्थन में स्टेटमेंट जारी किया था। पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया के मुताबिक, ‘इस पैक्ट से भारत-पाकिस्तान की स्थिति नहीं बदलेगी। तुर्किये पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करता रहेगा और सऊदी खुद को पाकिस्तान का समर्थक दिखाने से बचेगा।’ सवाल-5: भारत के पास इस नई चुनौती की क्या काट है? जवाब: भारत की सबसे बड़ी काट उसके खाड़ी देशों से डिप्लोमैटिक और व्यापारिक रिश्ते हैं। खाड़ी देशों में 89 लाख भारतीय रहते हैं। भारत सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। सऊदी अरब अपना करीब 16% तो UAE करीब 11% कच्चा तेल भारत को बेचता है। मई 2026 में ही भारत ने UAE के साथ रक्षा समझौता किया है। यह रिश्ते और मजबूत किए जा सकते हैं… ——– ये एक्सप्लेनर भी पढ़िए… पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। पूरी खबर पढ़िए…

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