भास्कर न्यूज | कुन्दा कुंदा के अखरा से जगरनाथपुर होते हुए प्रतापपुर जाने वाला बाईपास मार्ग करीब तीन महीने बाद रविवार को दोबारा शुरू हो गया। वन विभाग ने पौधारोपण और वन संरक्षण के उद्देश्य से सड़क पर ट्रेंच (खाई) काट दी थी। इससे इस रास्ते पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया था। दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। सड़क बंद होने के बाद ग्रामीणों ने इसे जल्द बहाल करने की मांग उठाई। समस्या की जानकारी मिलने पर कुंदा पंचायत के मुखिया मनोज कुमार साहु ने अखरा, टिकैतबांध, नावाडीह, टिकुलिया, आसपास के अन्य गांवों के ग्रामीणों के साथ बैठक की। इसके बाद मुखिया और ग्रामीणों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों (पीसीसीएफ, सीसीएफ, डीएफओ, एसीएफ, रेंजर) को आवेदन देकर अपनी समस्या से अवगत कराया। मुखिया के लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार वन विभाग ने ग्रामीणों की मांग मान ली। रविवार को मुखिया, वनकर्मियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में जेसीबी की मदद से सड़क पर खोदे गए ट्रेंच को भरवा दिया गया। इससे मार्ग एक बार फिर आवागमन के योग्य हो गया। इस राहत पर ग्रामीणों ने वन विभाग और मुखिया के प्रति आभार व्यक्त किया। वन विभाग के पौधों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों और मुखिया ने अपने निजी खर्च से सड़क के किनारे ट्रेंच खोदा। सड़क के दोनों ओर बांस की बल्लियों के सहारे कंटीले तार भी लगाए गए। इस कार्य में मुखिया मनोज कुमार साहु ने आर्थिक और शारीरिक रूप से पूरा सहयोग किया। आसपास के गांवों के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया। श्रमदान भी किया। इस तरह कार्य पूरा हुआ। ग्रामीणों का कहना था कि वन है तो कल है। वन है तो जीवन है। सड़क चालू होने से ग्रामीणों में खुशी की लहर है। मार्ग के दोबारा खुलने से जगरनाथपुर, प्रतापपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आने-जाने में अब काफी सुविधा होगी। मुखिया मनोज कुमार साहु ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना उनकी पहली प्राथमिकता है। वन संरक्षण के साथ आम जनता की आवागमन सुविधा भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग के समक्ष यह पक्ष रखा गया था। भास्कर न्यूज | कुन्दा कुंदा के अखरा से जगरनाथपुर होते हुए प्रतापपुर जाने वाला बाईपास मार्ग करीब तीन महीने बाद रविवार को दोबारा शुरू हो गया। वन विभाग ने पौधारोपण और वन संरक्षण के उद्देश्य से सड़क पर ट्रेंच (खाई) काट दी थी। इससे इस रास्ते पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया था। दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। सड़क बंद होने के बाद ग्रामीणों ने इसे जल्द बहाल करने की मांग उठाई। समस्या की जानकारी मिलने पर कुंदा पंचायत के मुखिया मनोज कुमार साहु ने अखरा, टिकैतबांध, नावाडीह, टिकुलिया, आसपास के अन्य गांवों के ग्रामीणों के साथ बैठक की। इसके बाद मुखिया और ग्रामीणों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों (पीसीसीएफ, सीसीएफ, डीएफओ, एसीएफ, रेंजर) को आवेदन देकर अपनी समस्या से अवगत कराया। मुखिया के लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार वन विभाग ने ग्रामीणों की मांग मान ली। रविवार को मुखिया, वनकर्मियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में जेसीबी की मदद से सड़क पर खोदे गए ट्रेंच को भरवा दिया गया। इससे मार्ग एक बार फिर आवागमन के योग्य हो गया। इस राहत पर ग्रामीणों ने वन विभाग और मुखिया के प्रति आभार व्यक्त किया। वन विभाग के पौधों के संरक्षण के लिए ग्रामीणों और मुखिया ने अपने निजी खर्च से सड़क के किनारे ट्रेंच खोदा। सड़क के दोनों ओर बांस की बल्लियों के सहारे कंटीले तार भी लगाए गए। इस कार्य में मुखिया मनोज कुमार साहु ने आर्थिक और शारीरिक रूप से पूरा सहयोग किया। आसपास के गांवों के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया। श्रमदान भी किया। इस तरह कार्य पूरा हुआ। ग्रामीणों का कहना था कि वन है तो कल है। वन है तो जीवन है। सड़क चालू होने से ग्रामीणों में खुशी की लहर है। मार्ग के दोबारा खुलने से जगरनाथपुर, प्रतापपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आने-जाने में अब काफी सुविधा होगी। मुखिया मनोज कुमार साहु ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना उनकी पहली प्राथमिकता है। वन संरक्षण के साथ आम जनता की आवागमन सुविधा भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग के समक्ष यह पक्ष रखा गया था।

