अक्टूबर का महीना शुरू हो चुका है लेकिन रेगिस्तान के द्वार बीकानेर में सूरज के तेवर अभी भी तीखे बने हुए हैं। मानसून की विदाई के बाद शहर में शुष्क हवाओं और धूप का असर पूरी तरह कायम है। रविवार को बीकानेर में अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से काफी ऊपर है। वहीं बीती रात का न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बीकानेर और आसपास के संभाग में अगले कुछ दिनों तक आसमान बिल्कुल साफ रहेगा और बादलों का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं है। वर्षा को लेकर फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। स्काईमेट की रिपोर्ट भी यह स्पष्ट करती है कि क्षेत्र में अगले 10 से 15 दिनों तक बारिश की गतिविधियों की कोई संभावना नहीं है। हवाएं हल्की गति से चलेंगी जिससे उमस और तीखी धूप का सामना करना पड़ेगा। चुभने वाली इस गर्मी और चिलचिलाती धूप से अभी तुरंत राहत मिलने के आसार नहीं हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह (करीब 10 से 12 अक्टूबर के बाद) उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के असर या हवाओं के रुख में बदलाव से तापमान में हल्की गिरावट आनी शुरू हो सकती है। दिन का पारा जो अभी 38 से 40 डिग्री के बीच झूल रहा है उसमें धीरे-धीरे 2 से 3 डिग्री की कमी दर्ज की जाएगी जिसके बाद सुबह और शाम के वक्त हल्की गुलाबी ठंडक अहसास कराने लगेगी। तापमान कम न हुआ तो सरसों-चना की बिजाई टालनी होगी अक्टूबर के पहले सप्ताह में 40 डिग्री पारा संभाग के किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच रहा है। अक्टूबर का यह समय रबी फसलों (विशेषकर सरसों और चने) की अगेती बिजाई का मुख्य समय माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खेत में बीज के अंकुरण के लिए मिट्टी का तापमान एक निश्चित दायरे में होना जरूरी है। यदि दिन का तापमान 35 से 40 डिग्री के आसपास बना रहता है तो खेत की नमी तेजी से भाप बनकर उड़ जाती है जिससे मिट्टी की ऊपरी परत सूख जाती है। यदि अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े तक तापमान में तेजी से गिरावट नहीं आई तो किसानों को सरसों और चने की बिजाई में 10 से 15 दिन की देरी करनी पड़ सकती है जिसका सीधा असर फसलों की कुल पैदावार और कटाई के समय पर पड़ेगा। तापमान साथ दे तो सरसों और चना की अगेती बिजाई मध्य अक्टूबर के बाद शुरू हो जाती है।

