महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में संयुक्त विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की गई।
शरद पवार ने ठाकरे बंधुओं का किया समर्थन
NCP (SP) प्रमुख शरद पवार ने ठाकरे बंधुओं के इस प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाई जा रही आपत्तियां केवल मुंबई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पुणे, नागपुर और महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में भी ऐसे सवाल उठ रहे हैं।
पवार ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का समाधान निकालने के लिए सभी संबंधित राजनीतिक दलों को साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोई साझा फैसला होता है, तो वह उसका समर्थन करेंगे।
राज ठाकरे ने SIR रद्द करने की मांग की
प्रदर्शन के दौरान राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता जुड़े और अब SIR के जरिए बड़ी संख्या में नाम हटाए जा रहे हैं।
राज ठाकरे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को दिल्ली जाकर SIR रद्द करने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की भी मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि चुनाव और सरकार चलाने के तरीके को लेकर है। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार बनाने का फैसला जनता और मतदाताओं को करना चाहिए, चुनाव आयोग को नहीं।
राज ठाकरे ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं और पड़े वोटों की संख्या में बढ़ोतरी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दोनों चुनावों के बीच महज कुछ महीनों के अंतर में मतदाताओं की संख्या में इतनी वृद्धि कैसे हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर उठाए सवाल
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए और आयोग के कामकाज में जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं।
उद्धव ने यह भी दावा किया कि देशभर में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी मतदाता सूची को लेकर उठ रहे विवादों का जिक्र किया।
चुनाव आयोग पर आरोपों के बीच बढ़ा विवाद
SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विवाद को उस समय और बल मिला जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के स्तर पर लिए गए फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को संस्थागत असहमति मानने से इनकार किया है। आयोग ने कहा कि इस तरह के सुझाव और आपत्तियां निर्णय लेने की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

