मुजफ्फरपुर के SKMCH कैंपस स्थित जीएनएम कॉलेज की सेकंड ईयर की छात्रा सुप्रिया पटेल ने शुक्रवार को नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या की कोशिश की। दवा खाने के बाद उसने व्हाट्सएप पर दो स्टेटस पोस्ट किए। इनमें उसने हॉस्टल की वार्डन किरण पर प्रताड़ित करने और अटेंडेंस नहीं बनाने का आरोप लगाया। एक स्टेटस में उसने लिखा कि अगर उसकी मौत होती है तो इसकी जिम्मेदार वार्डन होंगी। स्टेटस पोस्ट करने के करीब दो घंटे बाद वह हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली। सहपाठी उसे SKMCH लेकर पहुंचे। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आईसीयू में भर्ती कर 15 घंटे से अधिक समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया। शनिवार दोपहर छात्रा को होश आया। मामले में कॉलेज प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की है। वार्डन ने अपना लिखित पक्ष जांच टीम को सौंप दिया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्रा की तबीयत में सुधार है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। वहीं, वार्डन का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। स्टेटस में लिखा- छोटी-छोटी बातों को लेकर परेशान किया जा रहा दवा खाने के बाद पोस्ट किए गए व्हाट्सएप स्टेटस में सुप्रिया ने वार्डन पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाया। उसने लिखा कि वह बहुत कुछ बर्दाश्त कर रही है, लेकिन अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। उसने आरोप लगाया कि उससे जबरन आवेदन लिखवाया गया और उसका दोबारा अटेंडेंस नहीं बनाया जा रहा। दूसरे स्टेटस में छात्रा ने लिखा कि अगर उसकी मृत्यु होती है तो इसके लिए ट्यूटर या प्रिंसिपल नहीं, बल्कि सिर्फ वार्डन जिम्मेदार होंगी। उसने आरोप लगाया कि वार्डन उसे ड्रामा या नाटक करने वाली कहती हैं। छात्रा ने यह भी लिखा कि उसकी रिपोर्ट वार्डन के पास जमा है, इसके बावजूद उसे परेशान किया जा रहा है। उसने जुलाई में भी करीब एक महीने तक परेशान किए जाने का आरोप लगाया। पिता बोले- फोन पर रोते हुए कहा, पापा अब मैं नहीं बचूंगी छात्रा के पिता संजय कुमार ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे सुप्रिया ने उन्हें और अपनी मां को फोन किया था। वह रो रही थी। पिता के अनुसार, बेटी ने कहा कि उसे वार्डन परेशान कर रही हैं और अब वह नहीं बच पाएगी। फोन कटने के कुछ देर बाद सहपाठियों से बेटी की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली। बेटी पिछले करीब छह महीने से तनाव में थी। वार्डन के व्यवहार और अटेंडेंस को लेकर उसने पहले भी परिवार को बताया था। करीब दो महीने पहले वह बेटी की शिकायत पर कॉलेज पहुंचे थे और प्राचार्य से मुलाकात की थी। पिता के अनुसार, उस दौरान भी छात्रा की तबीयत बिगड़ गई थी और वह प्राचार्य के सामने बेहोश हो गई थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए पटना ले जाया गया था। पहले की शिकायत पर कार्रवाई हुई होती तो बेटी को यह कदम नहीं उठाना पड़ता। प्राचार्य बोले- पहले से न्यूरोलॉजिकल इलाज चल रहा था, दवा की पुष्टि जांच के बाद GNM कॉलेज के प्राचार्य राम अवतार शर्मा ने बताया कि छात्रा की स्थिति में सुधार है। उसका पहले से न्यूरोलॉजिकल इलाज चल रहा था। दो-तीन महीने पहले भी मामले को लेकर मौखिक शिकायत मिली थी, जिसका समाधान किया गया था। जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। वार्डन ने अपना लिखित पक्ष जांच टीम को दे दिया है। छात्रा के कमरे से दवा का कोई रैपर नहीं मिला है। इसलिए उसने नींद की दवा खाई या कोई दूसरी, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। कॉलेज प्रशासन अन्य छात्राओं से भी जानकारी ले रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। छात्रा मूल रूप से नालंदा की रहने वाली है। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। पुलिस को दिए जाने वाले आवेदन और कॉलेज की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। मुजफ्फरपुर के SKMCH कैंपस स्थित जीएनएम कॉलेज की सेकंड ईयर की छात्रा सुप्रिया पटेल ने शुक्रवार को नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या की कोशिश की। दवा खाने के बाद उसने व्हाट्सएप पर दो स्टेटस पोस्ट किए। इनमें उसने हॉस्टल की वार्डन किरण पर प्रताड़ित करने और अटेंडेंस नहीं बनाने का आरोप लगाया। एक स्टेटस में उसने लिखा कि अगर उसकी मौत होती है तो इसकी जिम्मेदार वार्डन होंगी। स्टेटस पोस्ट करने के करीब दो घंटे बाद वह हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली। सहपाठी उसे SKMCH लेकर पहुंचे। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आईसीयू में भर्ती कर 15 घंटे से अधिक समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया। शनिवार दोपहर छात्रा को होश आया। मामले में कॉलेज प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की है। वार्डन ने अपना लिखित पक्ष जांच टीम को सौंप दिया है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्रा की तबीयत में सुधार है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। वहीं, वार्डन का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। स्टेटस में लिखा- छोटी-छोटी बातों को लेकर परेशान किया जा रहा दवा खाने के बाद पोस्ट किए गए व्हाट्सएप स्टेटस में सुप्रिया ने वार्डन पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाया। उसने लिखा कि वह बहुत कुछ बर्दाश्त कर रही है, लेकिन अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। उसने आरोप लगाया कि उससे जबरन आवेदन लिखवाया गया और उसका दोबारा अटेंडेंस नहीं बनाया जा रहा। दूसरे स्टेटस में छात्रा ने लिखा कि अगर उसकी मृत्यु होती है तो इसके लिए ट्यूटर या प्रिंसिपल नहीं, बल्कि सिर्फ वार्डन जिम्मेदार होंगी। उसने आरोप लगाया कि वार्डन उसे ड्रामा या नाटक करने वाली कहती हैं। छात्रा ने यह भी लिखा कि उसकी रिपोर्ट वार्डन के पास जमा है, इसके बावजूद उसे परेशान किया जा रहा है। उसने जुलाई में भी करीब एक महीने तक परेशान किए जाने का आरोप लगाया। पिता बोले- फोन पर रोते हुए कहा, पापा अब मैं नहीं बचूंगी छात्रा के पिता संजय कुमार ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे सुप्रिया ने उन्हें और अपनी मां को फोन किया था। वह रो रही थी। पिता के अनुसार, बेटी ने कहा कि उसे वार्डन परेशान कर रही हैं और अब वह नहीं बच पाएगी। फोन कटने के कुछ देर बाद सहपाठियों से बेटी की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली। बेटी पिछले करीब छह महीने से तनाव में थी। वार्डन के व्यवहार और अटेंडेंस को लेकर उसने पहले भी परिवार को बताया था। करीब दो महीने पहले वह बेटी की शिकायत पर कॉलेज पहुंचे थे और प्राचार्य से मुलाकात की थी। पिता के अनुसार, उस दौरान भी छात्रा की तबीयत बिगड़ गई थी और वह प्राचार्य के सामने बेहोश हो गई थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए पटना ले जाया गया था। पहले की शिकायत पर कार्रवाई हुई होती तो बेटी को यह कदम नहीं उठाना पड़ता। प्राचार्य बोले- पहले से न्यूरोलॉजिकल इलाज चल रहा था, दवा की पुष्टि जांच के बाद GNM कॉलेज के प्राचार्य राम अवतार शर्मा ने बताया कि छात्रा की स्थिति में सुधार है। उसका पहले से न्यूरोलॉजिकल इलाज चल रहा था। दो-तीन महीने पहले भी मामले को लेकर मौखिक शिकायत मिली थी, जिसका समाधान किया गया था। जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। वार्डन ने अपना लिखित पक्ष जांच टीम को दे दिया है। छात्रा के कमरे से दवा का कोई रैपर नहीं मिला है। इसलिए उसने नींद की दवा खाई या कोई दूसरी, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। कॉलेज प्रशासन अन्य छात्राओं से भी जानकारी ले रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। छात्रा मूल रूप से नालंदा की रहने वाली है। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। पुलिस को दिए जाने वाले आवेदन और कॉलेज की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

