नुमाइश मैदान में चल रही बालू-बदरपुर, रोड़ी और गिट्टी की मंडी का ठेका खत्म होते ही पूरी व्यवस्था ठप हो गई। 30 सितंबर को ठेके की अवधि पूरी होने के बाद मंडी में कारोबार बंद कर दिया गया। इसके साथ ही यहां माल लेकर आने वाले वाहनों पर पुलिस की नजर भी टिक गई है। शुक्रवार को बन्नादेवी पुलिस ने रोड़ी लदे तीन डंपरों को ओवरलोडिंग के आरोप में सीज कर दिया। अकराबाद टोल पर भी ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मंडी बंद होने का सीधा असर निर्माण सामग्री की आपूर्ति पर पड़ने लगा है। वहीं, ठेका दोबारा नहीं उठने से जिला प्रशासन के सामने राजस्व का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पिछले साल यही ठेका करीब 3 करोड़ 80 लाख रुपये में उठा था। इस बार प्रक्रिया अटकने की स्थिति में करीब 4 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है। ठेका खत्म हुआ तो ठेकेदार ने खुद पुलिस-प्रशासन को बताया 30 सितंबर को ठेका समाप्त होने के बाद ठेकेदार नरेंद्र पचौरी ने जिला प्रशासन और पुलिस को लिखित रूप से सूचना दी। इसमें बताया गया कि अब उनके नाम पर मंडी में कोई वसूली करने का अधिकार नहीं है। ठेका खत्म होने के बाद उनके नाम पर ट्रकों से किसी तरह की वसूली को नियमविरुद्ध बताया गया। इसके बाद पुलिस ने मंडी में आने वाले वाहनों की गतिविधियों पर कार्रवाई शुरू कर दी। ओवरलोडिंग मिलने पर वाहनों को सीज किया जा रहा है। शुक्रवार की कार्रवाई इसी कड़ी में हुई। रोज 100 ट्रक, 250 तक वाहनों की आवाजाही नुमाइश मैदान की यह मंडी शहर में निर्माण सामग्री की आपूर्ति का बड़ा केंद्र रही है। रोजाना करीब 100 ट्रक बालू, बदरपुर, रोड़ी और गिट्टी लेकर यहां पहुंचते थे। मंडी में माल की बोली लगने के बाद व्यापारियों को बिक्री होती थी। सिर्फ माल लेकर आने वाले ट्रकों तक ही आवाजाही सीमित नहीं थी। मंडी के जरिए पूरे दिन करीब 200 से 250 वाहनों का आवागमन होता था। ऐसे में मंडी बंद होने से सिर्फ कारोबार ही नहीं, बल्कि शहर में निर्माण सामग्री की सप्लाई व्यवस्था पर भी असर पड़ने की स्थिति बन गई है। महंगा ठेका और दूसरे रास्तों से निकलते वाहनों ने बिगाड़ा गणित इस बार ठेका दोबारा न उठने के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। ठेके की अधिक कीमत, वाहनों का मंडी व्यवस्था से बचकर दूसरे रास्तों से निकल जाना और मौजूदा नियमों से जुड़ी व्यावहारिक दिक्कतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। मंडी की व्यवस्था करीब 25 साल पुराने नियमों के आधार पर चलती रही है। बदलते समय में वाहनों की आवाजाही और कारोबार के तौर-तरीके बदलने के बावजूद पुरानी व्यवस्था के मुताबिक ठेका संचालित करना प्रशासन के सामने चुनौती बन रहा है। अब नए टेंडर से खुलेगा रास्ता ठेका अवधि समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन अब मंडी को नए सिरे से संचालित करने की तैयारी में है। इसके लिए नया टेंडर निकाला जाएगा। प्रशासन की कोशिश है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंडी को फिर से व्यवस्थित तरीके से शुरू कराया जाए। फिलहाल नया ठेका होने तक नुमाइश मैदान में बालू-बदरपुर, रोड़ी और गिट्टी की पुरानी मंडी व्यवस्था बंद रहेगी। दूसरी ओर पुलिस ओवरलोडिंग और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई कर रही है। यानी एक तरफ मंडी का पहिया थम गया है, तो दूसरी तरफ प्रशासन के सामने करीब चार करोड़ के राजस्व को बचाने और निर्माण सामग्री की सप्लाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

