पाली के समग्र शिक्षा कार्यक्रम अधिकारी कल्याण सिंह को मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर की ओर से शिक्षा संकाय में पीएचडी की उपाधि देकर सम्मानित किया गया है। पाली जिले के टेवाली गांव निवासी और वर्तमान में पाली में रहने वाले कल्याण सिंह ने अंग्रेजी भाषा के उच्चारण, व्याकरण और शिक्षण पद्धति को लेकर अपना शोधकार्य पूरा किया है। कल्याण सिंह ने “राजस्थान में द्वितीय भाषा के रूप में अंग्रेजी के उच्चारण, व्याकरण एवं शिक्षण पद्धति के प्रति अभिधारकों का प्रत्यक्षण: संबंध और निहितार्थ” विषय पर शोध किया। यह शोध कॉलेज शिक्षा विभाग के अंग्रेजी भाषा विशेषज्ञ डॉ. ए.के. पालीवाल के निर्देशन में पूरा किया गया। 5 जिलों के सरकारी स्कूलों में किया अध्ययन शोध के लिए राजस्थान के पाली, जालोर, सिरोही, राजसमंद और उदयपुर जिलों के राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के ELT विशेषज्ञों को शामिल किया गया। अध्ययन के लिए सर्वेक्षण पद्धति का इस्तेमाल किया गया। मातृभाषा से अलग होने के कारण उच्चारण में परेशानी शोध में सामने आया कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा से अलग भाषा होने और ध्वन्यात्मक जटिलताओं के कारण अंग्रेजी के उच्चारण और व्याकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। शिक्षकों के सामने भी बलाघात, अनुतान, रूप-विज्ञान और वाक्य-विन्यास जैसी चुनौतियां रहती हैं। मौखिक अंग्रेजी और दृश्य-श्रव्य साधनों पर कम ध्यान अध्ययन में अंग्रेजी शिक्षण के दौरान क्षेत्रीय भाषा आधारित पद्धतियों के अधिक इस्तेमाल, मौखिक अंग्रेजी पर अपेक्षाकृत कम ध्यान और दृश्य-श्रव्य साधनों के सीमित उपयोग की स्थिति भी सामने आई। शोध में यह भी पाया गया कि शिक्षकों की अंग्रेजी भाषा और उसके शिक्षण को लेकर बनी धारणा का उनके पढ़ाने के तरीके पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अध्ययन ने राजस्थान के संदर्भ में व्यवस्थित शिक्षक प्रशिक्षण की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही, शोध में स्वदेशी TESL मॉडल ‘PARI’ विकसित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया है।

