संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज करीब 20 महीने 10 दिन बाद बुधवार रात जेल से रिहा होकर घर पहुंचा। मुरादाबाद जेल से रिहाई के बाद परिवार के लोग उसे रात में घर ले आए। घर पहुंचने पर अफरोज अपने बच्चों और परिवार को सामने देखकर कुछ देर गुमसुम रहा। इसके बाद उसने अपने तीनों बच्चों को गोद में बैठाकर दुलार किया। सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निवारक हिरासत रद्द कर दी थी और यूपी सरकार पर 10 लाख रुपए का खर्च लगाया था। कोर्ट ने साफ किया कि इस आदेश का असर उसके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों के गुण-दोष पर नहीं है। रात में घर पहुंचा, परिवार ने नहीं मनाया जश्न बुधवार रात मुरादाबाद जेल से रिहाई के बाद परिवार के लोग अफरोज को लेकर घर पहुंचे। रात में ही उसके घर आने की जानकारी धीरे-धीरे लोगों को हुई। परिवार की ओर से किसी तरह का जश्न नहीं मनाया गया। अफरोज फिलहाल घर पर परिवार के साथ है। बच्चों की बातें याद कर जेल में काटे दिन बुधवार रात करीब 7:30 बजे दैनिक भास्कर से बातचीत में अफरोज ने जेल में बिताए दिनों को याद किया। उसने कहा कि 20 महीने 10 दिन उसके लिए काफी तकलीफदेह रहे। आर्थिक तौर पर भी वह काफी टूट गया है। उसके दो भाई पैरोकारी में लगे रहे। बड़े भाई ने बच्चों की पढ़ाई और उनकी जरूरतों को संभाला। अफरोज ने बताया कि बच्चे अक्सर जेल में उससे पूछते थे- पापा कब आओगे? आपने कहा था आ जाओगे, अभी तक नहीं आए। अफरोज के मुताबिक बच्चों की यही बातें याद कर उसने जेल में एक-एक दिन काटा। अफरोज बोला- कोर्ट से हमें न्याय मिला अफरोज ने कहा- सुप्रीम कोर्ट से उसे न्याय मिला है। उसने कहा कि इसी वजह से शायद किसी ने कहा था, “I will see you in the court.” उसने कहा कि उसे अदालत से काफी उम्मीद है। यह फैसला उसके लिए महत्वपूर्ण है। अफरोज ने कहा- उसके घर में ईद जैसा माहौल है और उसकी बस्ती व संभल के लोग भी खुश हैं। जिला शासकीय अधिवक्ता बोले- आपराधिक केस जारी रहेंगे रात करीब 8:30 बजे जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से अफरोज को NSA की हिरासत में राहत मिली है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उसके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों पर इस आदेश का असर नहीं है। उन्होंने बताया कि जिला न्यायाधीश की अदालत में चार पत्रावलियां विचाराधीन हैं। इनमें दो में साक्ष्य की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और आगे 313 की कार्रवाई होनी है। उनके मुताबिक, इन मामलों में अभियोजन की ओर से गवाहों के बयान और साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने NSA हिरासत रद्द की थी सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निवारक हिरासत को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा कि पुलिस हिरासत में दिए गए कबूलनामे को अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिरासत बरकरार रखी गई थी। साथ ही यूपी सरकार पर 10 लाख रुपए का खर्च लगाया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके फैसले से अफरोज के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों के मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है।

