शहरी निकाय चुनाव में भरतपुर और डीग जिले में एक भी बोर्ड कांग्रेस का नहीं बनने के बाद पार्टी में खींचतान सामने आ रही है। सीनियर नेता पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भरतपुर व डीग के जिलाध्यक्षों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विश्वेंद्र सिंह ने हार के लिए डोटासरा और दोनों जिलाध्यक्षों को जिम्मेदार बताते हुए तल्ख टिप्पणियां की है। विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा को भरतपुर आने की भी चुनौती दी है। उन्होंने ऐसे वक्त पर तीनों को निशाने पर लिया है, जब पंचायतीराज चुनाव होने वाले हैं। राजनीतिक जानकार इसके पीछे हार से ज्यादा कांग्रेस की खेमेबंदी और आपसी खींचतान असली कारण मान रहे हैं। कांग्रेस में डोटासरा विरोधी खेमा सक्रिय है, ताजा घटनाक्रम को भी उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं डोटासरा और कांग्रेस प्रवक्ताओं ने इस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अब पढ़िए- पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने क्या कहा कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर चहेतों को टिकट बांटा, जनता ने सबक सिखाया विश्वेंद्र सिंह ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और जिलाध्यक्षों पर निशाना साधा है। विश्वेंद्र सिंह ने लिखा- ‘भरतपुर-डीग कांग्रेस का बंटाधार, जिम्मेदार कौन? नगर निकाय में कांग्रेस की हार का एक ही कारण है-दोनों जिलाध्यक्षों ने चहेतों को टिकट बांटे और असली कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया। जनता ने सबक सिखा दिया। इस बार जनता दोनों जिलाध्यक्षों और डोटासरा को कब्र में दफनाने को तैयार है। पहले निकाय चुनावों में जनता को इन लोगों ने कब्र में दफनाया था,लेकिन जनता भी तैयार बैठी है। इस बार चुनाव में जनता इन दोनों जिलाध्यक्षों और इनको बचाने वाले प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को उसी कब्र में दफनाने के लिए तैयार है।’ डोटासरा ने कहा था, भरतपुर के लोग रास्ता पूछने के भी पैसे मांग लेते हैं विश्वेंद्र सिंह ने लिखा- ये CM का गृह जिला है, यहां कांग्रेस मजबूत होनी चाहिए थी, पर इन लोगों ने पार्टी को डुबो दिया और प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बना बैठा है। जब तक ये दोनों कुर्सी पर हैं, कांग्रेस का उठना नामुमकिन है। प्रदेश नेतृत्व होश में आओ। विश्वेंद्र बोले- डोटासरा ने कहा था भरतपुर के लोग रास्ता पूछने के भी पैसे मांग लेते हैं। विश्वेंद्र सिंह ने फेसबुक पोस्ट के बाद दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत में कहा- मैंने सोच समझकर लिखा है। फिर कह रहा हूं, दोनों जिलाध्यक्षों ने भरतपुर-डीग में कांग्रेस को डूबो दिया, इसके लिए डोटासरा जिम्मेदार है। भरतपुर के लोगों के बारे में डोटासरा की सोच कैसी है इसकी बानगी बताता हूं। एक बार डोटासरा ने भरतपुर के लोगों के बारे में कहा था कि भरतपुर के लोग तो ऐसे होते हैं कि रास्ता पूछने के भी पैसे मांग लेते हैं। भरतपुर आने की हिमाकत की तो चंद्रभान से भी अच्छा स्वागत करुंगा विश्वेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा- ‘डोटासरा कभी भरतपुर आने की हिमाकत करके देख लें, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से भी अच्छा स्वागत करुंगा। मैं पार्टी हित के लिए यह सब बोल रहा हूं। भरतपुर और डीग में कांग्रेस की हार के लिए ये जिम्मेदार हैं, यहां पार्टी मजबूत होनी चाहिए। कोई यह गलतफहमी नहीं पाले कि मैं बीजेपी में जा रहा हूं। मैं कहीं नहीं जा रहा, मैं कांग्रेस में ही रहूंगा और पार्टी की मजबूती के लिए आवाज उठाता रहूंगा। हार का मुझे दुख हुआ इसलिए यह सब बोल रहा हूं।’ 2013 में चंद्रभान की अध्यक्षता वाली मीटिंग में विश्वेंद्र सिंह समर्थकों ने मारपीट की थी विश्वेंद्र सिंह ने गोविंद सिंह डोटासरा के भरतपुर जाने पर डॉ. चंद्रभान जैसा स्वागत करने की बात कहकर 2013 के विवाद की यादों को फिर ताजा कर दिया है। 2013 के विधानसभा चुनावों से पहले भरतपुर में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान संभाग स्तरीय बैठक लेने गए थे। उस बैठक में विश्वेंद्र सिंह भी मौजूद थे। बैठक के दौरान ही विश्वेंद्र सिंह समर्थकों ने तत्कालीन जिलाध्यक्ष सहित बैठक में मौजूद नेताओं के साथ जमकर मारपीट की थी। डॉ. चंद्रभान को बीच-बचाव करके बैठक स्थल से निकाला गया था। इस घटना के बाद बैठक छोड़कर डॉ. चंद्रभान को जयपुर लौटना पड़ा था। विश्वेंद्र सिंह के खिलाफ उस वक्त कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

