बच्चे के रक्त में शुगर जमा होने लगे तो क्या होता है? अमेरिकन लिवर फाउंडेशन से समझें Galactosemia के लक्षण

बच्चे के रक्त में शुगर जमा होने लगे तो क्या होता है? अमेरिकन लिवर फाउंडेशन से समझें Galactosemia के लक्षण

Galactosemia Cause: दूध और उससे बनी चीजें छोटे बच्चों की ग्रोथ और हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर वही दूध शरीर के लिए जहर या किसी टॉक्सिन की तरह काम करने लगे तो क्या होगा? आमतौर पर जब हम दूध, मां का दूध या दूध से बना फॉर्मूला पीते हैं, तो शरीर उसमें मौजूद लैक्टोज (Lactose) नाम की शुगर को पचाता है। यह लैक्टोज टूटकर दो हिस्सों में बंटता है ग्लूकोज (Glucose) और गैलेक्टोज (Galactose)। लेकिन कुछ लोगों के शरीर में जन्म से ही एक ऐसी दुर्लभ स्थिति होती है, जिसमें वे गैलेक्टोज शुगर को पचा नहीं पाते। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में गैलेक्टोसीमिया (Galactosemia) कहा जाता है। इसका मतलब है रक्त में गैलेक्टोज का जमाव। जब यह शुगर पचती नहीं है, तो खून, लिवर, किडनी और दिमाग में जमा होने लगती है और जहरीले तत्व बनाने लगती है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और यह शरीर के किन हिस्सों को नुकसान पहुंचाती है।

गैलेक्टोसीमिया क्या है और यह क्यों होता है?

अमेरिकन लिवर फाउंडेशन के मुताबिक, गैलेक्टोसीमिया एक आनुवंशिक (Genetic) या जेनेटिक विकार है। इसका मतलब है कि यह बीमारी बच्चे को अपने माता-पिता से मिलने वाले जीन्स के जरिए होती है। हमारे शरीर में गैलेक्टोज नाम की शुगर को ऊर्जा में बदलने के लिए खास तरह के एंजाइम (Enzymes) की जरूरत होती है। गैलेक्टोसीमिया से पीड़ित बच्चों में यह एंजाइम या तो बनता ही नहीं है या बहुत कम मात्रा में बनता है। जब ऐसा नवजात बच्चा दूध पीता है, तो उसका शरीर गैलेक्टोज को पचा नहीं पाता। पचने के बजाय यह शुगर जहरीले फॉर्म (Galactitol) में बदलकर शरीर के अलग-अलग अंगों में जमा होने लगती है और उन्हें नुकसान पहुंचाने लगती है।

नवजात शिशुओं में दिखने वाले शुरुआती लक्षण

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जन्म के समय बच्चा एकदम ठीक और सामान्य दिखता है, लेकिन जैसे ही वह मां का दूध या फॉर्मूला मिल्क पीना शुरू करता है, कुछ ही दिनों में उसमें गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं;

  • दूध पीने में दिक्कत और उल्टी।
  • पीलिया (Jaundice)।
  • वजन न बढ़ना (Failure to Thrive)।
  • सुस्ती और चिड़चिड़ापन।
  • पेट में सूजन।

शरीर के किन अंगों पर पड़ता है इसका बुरा असर?

अगर समय रहते गैलेक्टोसीमिया की पहचान न हो और बच्चा लगातार दूध पीता रहे, तो यह टॉक्सिन शरीर के मुख्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है;

इसकी पहचान और सही इलाज क्या है?

  • न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग (Newborn Screening)- कई जगह जन्म के तुरंत बाद बच्चे की एड़ी से खून की एक बूंद लेकर (Heel-prick test) जेनेटिक बीमारियों की जांच की जाती है, जिससे इसका शुरुआत में ही पता चल जाता है।
  • दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स बंद करना- जैसे ही गैलेक्टोसीमिया की पुष्टि होती है, बच्चे को मां का दूध, गाय-भैंस का दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स देना तुरंत पूरी तरह बंद कर दिया जाता है।
  • सोया-बेस्ड फॉर्मूला- ऐसे बच्चों को डॉक्टर की सलाह पर खास तरह का सोया-बेस्ड फॉर्मूला (Soy-based formula) या लैक्टोज-फ्री डाइट दी जाती है।
  • कैल्शियम और विटामिन D पूरक- क्योंकि बच्चा दूध नहीं पी सकता, इसलिए हड्डियों को मजबूत रखने के लिए डॉक्टर की सलाह पर कैल्शियम और विटामिन D सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं।

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