नर्मदापुरम जिले में शासकीय प्राथमिक/माध्यमिक स्कूल और आंगनवाड़ियों के लिए मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) बनाने वाली स्व सहायता समूह की महिलाएं (रसोइया संघ) भूख हड़ताल पर है। सोमवार सुबह 12 बजे से पीपल चौक पर शुरू हुई। जो दुसरे दिन मंगलवार को भी जारी है। दिन के साथ ही रातभर खुले आसमान के नीचे बिना किसी तामजाम के करीब 50 महिलाएं बैठी रही। भजन गाकर उन्होंने अपनी रात बिताई। इस दौरान उनकी सुरक्षा के लिए दो पुलिस जवान तैनात रहे। रसोइयों का मानदेय बढ़ाने, भोजन की दर बढ़ाने, 200-300 ग्राम खाद्यान्न देने की मांग को लेकर प्रांतीय महिला एवं स्व. सहायता समूह महासंघ (रसोइया संघ) नर्मदापुरम इकाई की जिला अध्यक्ष गौरी इरकर और कविता राजपूत भूख हड़ताल पर है। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में महिलाएं रातभर धरना स्थल पर बैठी रही। हड़ताल पर चले जाने से आंगनवाड़ियों और स्कूलों में बच्चों को बंटने वाले एमडीएम को लेकर संकट खड़ा हो गया है। बच्चों को भूखा ही अपने घर लौटना होगा। स्व सहायता समूह महासंघ की जिला अध्यक्ष गौरी इरकर का कहना है कि साल 2018 के मुक़ाबले 2026 में महंगाई दो गुना बढ़ी।। लेकिन शासन की नजर में एमडीएम में वितरित होने वाले खाने, नाश्ते की दर आज भी वहीं है। ऐसे में एमडीएम का खाना बनाने वाली समूह की महिलाओं को काफी परेशानी उठाना पड़ रहा है। साथ ही हमें नियमित वेतन का मानदेय का भुगतान भी नहीं होता है। नर्मदापुरम की कविता राजपूत ने कहा हम भी नहीं चाहते कि बच्चों को भूखा रखे। वे आज भूखे रह रहे, इसका हमें भी काफी बुरा लग रहा है। स्कूल, आंगनवाड़ी में एमडीएम और पोषण आहार का वितरण करना चाहते है, लेकिन हमें इतना मजबूर कर दिया गया कि आज हम भूख हड़ताल पर बैठें है। शासन से आज भी 3 रुपए में नाश्ता और 5 रुपए में खाना दिया जाता है। ऐसे में हमारा मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं निकलती है। तीन बार पहले भी हड़ताल कर चुके हैं। लेकिन मांगों का निराकरण नहीं हुआ। अब अनिश्चित कालीन अब भूख हड़ताल शुरू की है। जो जारी है। पिछले सप्ताह मांगों को सुनने पहुंचे थे विधायक पिछले सप्ताह भी 21 सितंबर को स्व सहायता समूह की महिलाएं पीपल। चौक पर हड़ताल पर बैठी थी। सूचना पर उनसे मिलने विधानसभा पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक डॉक्टर सीताशरन शर्मा पहुंचे थे। विधायक शर्मा को महिला समूह ने पोषण शक्ति निर्माण (MDM) कार्य में आ रही समस्याओं को बताया। विधायक ने समस्या सुनने के बाद उन्हें स्थानीय स्तर की मांगों को जिले से कराने और बाकी मांगों को भोपाल स्तर पर भेजने की बात कहीं थी। महासंघ की यह प्रमुख मांगें
आंगनवाड़ी और स्कूलों में एमडीएम बंद, वैकल्पिक व्यवस्था हड़ताल पर चले जाने से सरकारी स्कूल और आंगनवाड़ियों में बंटने वाला मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) फिलहाल बंद हो गया है। जिससे खाने का संकट खड़ा हो गया। जबकि शासन के साफ तौर पर निर्देश है कि एमडीएम बंद नहीं होना चाहिए। जिला पंचायत सीईओ आईएएस हिमांशु जैन का कहना है कि हड़ताल के चलते सभी स्कूलों को निर्देश दें दिए कि स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) खाने की वैकल्पिक व्यवस्था करें। ताकि बच्चे भूखे न रहे।

