दरभंगा- ऑर्थोपेडिक में फ्रैक्चर के मरीजों के लिए रैपिडुर नहीं:मरीज बोले- बाजार से खरीदना पड़ा रहा प्लास्टर का सामान, अधीक्षक बोले- जल्द उपलब्ध कराई जाएगी

दरभंगा- ऑर्थोपेडिक में फ्रैक्चर के मरीजों के लिए रैपिडुर नहीं:मरीज बोले- बाजार से खरीदना पड़ा रहा प्लास्टर का सामान, अधीक्षक बोले- जल्द उपलब्ध कराई जाएगी

दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) के ऑर्थोपेडिक विभाग में फ्रैक्चर मरीजों के प्लास्टर के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लास्टर ऑफ पेरिस (रैपिडुर) कई दिनों से उपलब्ध नहीं है। इसके कारण अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों के परिजनों को रैपिडुर को बाजार से खरीदकर लाना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बाद भी प्लास्टर के लिए जरूरी सामग्री बाहर से खरीदने में अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही है। सोमवार को डीएमसीएच में आवश्यक सामग्री और जांच सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर पड़ताल की गई। इस दौरान पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, सुपर स्पेशलिटी भवन समेत ऑर्थोपेडिक विभाग की स्थिति की जानकारी ली गई। पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग में फिलहाल जांच से संबंधित जरूरी सामग्री उपलब्ध होने की बात सामने आई, लेकिन ऑर्थो विभाग में रैपिडुर की कमी की समस्या बनी हुई है। ऑर्थो विभाग में रोज 50 से 70 मरीज पहुंचते हैं ऑर्थोपेडिक विभाग की सिस्टर इंचार्ज ने बताया कि विभाग में प्रतिदिन करीब 50 से 70 मरीज पहुंचते हैं। रैपिडुर की उपलब्धता के लिए कई बार इंडेंट भेजा जा चुका है, लेकिन हर बार इसे एनएस स्तर से वापस कर दिया जाता है। इसके चलते विभाग में रैपिडुर की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। डीएमसीएच के मुख्य दवा भंडार के प्रभारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि रैपिडुर की उपलब्धता के लिए बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) को बार-बार पत्र लिखा जा रहा है। इसके बावजूद अब तक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन बाजार से रैपिडुर की खरीद तभी कर सकता है, जब बीएमएसआईसीएल की ओर से लिखित रूप से सामग्री उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी जाए। आपूर्ति मिलते ही रैपिडुर ऑर्थो विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। तीन रैपिडुर के लिए 700 रुपए खर्च किए कमतौल थाना क्षेत्र के माधोपट्टी निवासी शिवजी दास की 55 वर्षीय पत्नी राजकुमारी देवी के पैर में चोट लगने के बाद परिजन उन्हें डीएमसीएच लेकर पहुंचे थे। एक्स-रे में फ्रैक्चर की पुष्टि होने के बाद उन्हें प्लास्टर रूम भेजा गया। उनके पुत्र जय राम कुमार ने बताया कि वहां रैपिडुर बाजार से खरीदकर लाने को कहा गया। जय राम कुमार के अनुसार, बाजार में दुकानदारों ने अलग-अलग कीमत बताई। किसी ने 800 तो किसी ने 900 रुपए मांगे। मोलभाव के बाद तीन रैपिडुर 700 रुपए में खरीदकर लाना पड़ा। उनका कहना था कि इतने बड़े सरकारी अस्पताल में प्लास्टर के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं होने से मरीजों के परिजनों की परेशानी बढ़ रही है। दो रैपिडुर के लिए 400 रुपए देने पड़े बहेरी थाना क्षेत्र के छोटी दान निवासी जाफिरुल नदाफ की 55 वर्षीय पत्नी बेचनी खातून पानी में फिसलकर गिर गई थीं। हादसे में उनका दायां हाथ टूट गया। परिजन उन्हें डीएमसीएच लेकर पहुंचे। एक्स-रे में फ्रैक्चर की पुष्टि के बाद प्लास्टर रूम भेजा गया, जहां रैपिडुर बाहर से खरीदकर लाने को कहा गया। बेचनी खातून के परिजनों ने बताया कि काफी मोलभाव के बाद दो रैपिडुर 400 रुपए में खरीदकर लाना पड़ा। उनका कहना था कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बावजूद प्लास्टर के लिए बाहर से सामान खरीदने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पैथोलॉजी में केमिकल और रेडियोलॉजी में एक्स-रे फिल्म उपलब्ध दूसरी ओर, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. शिल्पी नारायण ने बताया कि विभाग में फिलहाल सभी जरूरी केमिकल उपलब्ध हैं और मरीजों की जांच नियमित रूप से की जा रही है। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय झा ने बताया कि एक्स-रे फिल्म की फिलहाल कोई कमी नहीं है। विभाग में प्रतिदिन करीब 500 एक्स-रे किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि 8/10, 10/12 और 14/17 साइज की तीन प्रकार की एक्स-रे फिल्म का इस्तेमाल होता है और तीनों फिलहाल उपलब्ध हैं। इमरजेंसी में डीआर मशीन लगाने का काम जारी डीएमसीएच इमरजेंसी परिसर में डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) मशीन लगाने का काम जारी है। इससे पहले यहां कंप्यूटर रेडियोग्राफी (सीआर) के जरिए एक्स-रे किया जाता था। मौके पर कार्यरत कर्मियों के अनुसार मशीन लगाने का काम जल्द पूरा होने की उम्मीद है। डीआर मशीन शुरू होने के बाद इमरजेंसी के मरीजों को एक्स-रे के लिए अस्पताल के दूसरे हिस्से में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे मरीजों को सुविधा मिलने के साथ इमरजेंसी परिसर में अनावश्यक आवाजाही भी कम होने की संभावना है। सुपर स्पेशलिटी भवन में संचालित रेडियोलॉजी विभाग में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी उपलब्ध है। डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि प्लास्टर सामग्री की उपलब्धता को लेकर बीएमएसआईसीएल को पत्र भेजा गया है। वहां से शीघ्र ही प्राप्त होने की उम्मीद है। फिलहाल रैपीडो कमी के कारण मरीजों को तत्काल परेशानी हो रही है। बीएमएसआईसीएल से आपूर्ति होते ही डीएमसीएच में मरीजों को यह फिर से सुचारू रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) के ऑर्थोपेडिक विभाग में फ्रैक्चर मरीजों के प्लास्टर के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लास्टर ऑफ पेरिस (रैपिडुर) कई दिनों से उपलब्ध नहीं है। इसके कारण अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों के परिजनों को रैपिडुर को बाजार से खरीदकर लाना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बाद भी प्लास्टर के लिए जरूरी सामग्री बाहर से खरीदने में अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही है। सोमवार को डीएमसीएच में आवश्यक सामग्री और जांच सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर पड़ताल की गई। इस दौरान पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, सुपर स्पेशलिटी भवन समेत ऑर्थोपेडिक विभाग की स्थिति की जानकारी ली गई। पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग में फिलहाल जांच से संबंधित जरूरी सामग्री उपलब्ध होने की बात सामने आई, लेकिन ऑर्थो विभाग में रैपिडुर की कमी की समस्या बनी हुई है। ऑर्थो विभाग में रोज 50 से 70 मरीज पहुंचते हैं ऑर्थोपेडिक विभाग की सिस्टर इंचार्ज ने बताया कि विभाग में प्रतिदिन करीब 50 से 70 मरीज पहुंचते हैं। रैपिडुर की उपलब्धता के लिए कई बार इंडेंट भेजा जा चुका है, लेकिन हर बार इसे एनएस स्तर से वापस कर दिया जाता है। इसके चलते विभाग में रैपिडुर की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। डीएमसीएच के मुख्य दवा भंडार के प्रभारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि रैपिडुर की उपलब्धता के लिए बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) को बार-बार पत्र लिखा जा रहा है। इसके बावजूद अब तक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन बाजार से रैपिडुर की खरीद तभी कर सकता है, जब बीएमएसआईसीएल की ओर से लिखित रूप से सामग्री उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी जाए। आपूर्ति मिलते ही रैपिडुर ऑर्थो विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। तीन रैपिडुर के लिए 700 रुपए खर्च किए कमतौल थाना क्षेत्र के माधोपट्टी निवासी शिवजी दास की 55 वर्षीय पत्नी राजकुमारी देवी के पैर में चोट लगने के बाद परिजन उन्हें डीएमसीएच लेकर पहुंचे थे। एक्स-रे में फ्रैक्चर की पुष्टि होने के बाद उन्हें प्लास्टर रूम भेजा गया। उनके पुत्र जय राम कुमार ने बताया कि वहां रैपिडुर बाजार से खरीदकर लाने को कहा गया। जय राम कुमार के अनुसार, बाजार में दुकानदारों ने अलग-अलग कीमत बताई। किसी ने 800 तो किसी ने 900 रुपए मांगे। मोलभाव के बाद तीन रैपिडुर 700 रुपए में खरीदकर लाना पड़ा। उनका कहना था कि इतने बड़े सरकारी अस्पताल में प्लास्टर के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं होने से मरीजों के परिजनों की परेशानी बढ़ रही है। दो रैपिडुर के लिए 400 रुपए देने पड़े बहेरी थाना क्षेत्र के छोटी दान निवासी जाफिरुल नदाफ की 55 वर्षीय पत्नी बेचनी खातून पानी में फिसलकर गिर गई थीं। हादसे में उनका दायां हाथ टूट गया। परिजन उन्हें डीएमसीएच लेकर पहुंचे। एक्स-रे में फ्रैक्चर की पुष्टि के बाद प्लास्टर रूम भेजा गया, जहां रैपिडुर बाहर से खरीदकर लाने को कहा गया। बेचनी खातून के परिजनों ने बताया कि काफी मोलभाव के बाद दो रैपिडुर 400 रुपए में खरीदकर लाना पड़ा। उनका कहना था कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बावजूद प्लास्टर के लिए बाहर से सामान खरीदने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पैथोलॉजी में केमिकल और रेडियोलॉजी में एक्स-रे फिल्म उपलब्ध दूसरी ओर, पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. शिल्पी नारायण ने बताया कि विभाग में फिलहाल सभी जरूरी केमिकल उपलब्ध हैं और मरीजों की जांच नियमित रूप से की जा रही है। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय झा ने बताया कि एक्स-रे फिल्म की फिलहाल कोई कमी नहीं है। विभाग में प्रतिदिन करीब 500 एक्स-रे किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि 8/10, 10/12 और 14/17 साइज की तीन प्रकार की एक्स-रे फिल्म का इस्तेमाल होता है और तीनों फिलहाल उपलब्ध हैं। इमरजेंसी में डीआर मशीन लगाने का काम जारी डीएमसीएच इमरजेंसी परिसर में डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) मशीन लगाने का काम जारी है। इससे पहले यहां कंप्यूटर रेडियोग्राफी (सीआर) के जरिए एक्स-रे किया जाता था। मौके पर कार्यरत कर्मियों के अनुसार मशीन लगाने का काम जल्द पूरा होने की उम्मीद है। डीआर मशीन शुरू होने के बाद इमरजेंसी के मरीजों को एक्स-रे के लिए अस्पताल के दूसरे हिस्से में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे मरीजों को सुविधा मिलने के साथ इमरजेंसी परिसर में अनावश्यक आवाजाही भी कम होने की संभावना है। सुपर स्पेशलिटी भवन में संचालित रेडियोलॉजी विभाग में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी उपलब्ध है। डीएमसीएच अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि प्लास्टर सामग्री की उपलब्धता को लेकर बीएमएसआईसीएल को पत्र भेजा गया है। वहां से शीघ्र ही प्राप्त होने की उम्मीद है। फिलहाल रैपीडो कमी के कारण मरीजों को तत्काल परेशानी हो रही है। बीएमएसआईसीएल से आपूर्ति होते ही डीएमसीएच में मरीजों को यह फिर से सुचारू रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।  

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