सांडों से बचने के चक्कर में बोरवेल में गिरी नेहा:फरीदाबाद में परिवार ने साड़ियां जोड़कर बचाने की कोशिश की; 10 घंटे बाद शव निकाला

सांडों से बचने के चक्कर में बोरवेल में गिरी नेहा:फरीदाबाद में परिवार ने साड़ियां जोड़कर बचाने की कोशिश की; 10 घंटे बाद शव निकाला

फरीदाबाद के सीही गांव में 250 फीट गहरे बोरवेल में गिरकर जान गंवाने वाली 3 साल की नेहा के हादसे की पूरी कहानी सामने आई है। हादसे से कुछ पल पहले दो सांड एक-दूसरे के पीछे भागते हुए बच्चों की तरफ दौड़े। सांडों से बचने के लिए बच्चे इधर-उधर भागने लगे। बोरवेल के ऊपर सिर्फ एक ईंट रखी हुई थी। भागते समय नेहा का हाथ ईंट से टकराया और वह सीधे बोरवेल के अंदर चली गई। साथ खेल रहे दूसरे बच्चों ने परिवार को इसकी सूचना दी। परिवार के लोग मौके पर पहुंचे तो बोरवेल के अंदर से नेहा के रोने की आवाज सुनाई दी। बच्ची को निकालने के लिए आसपास से साड़ियां मंगाई गईं और उन्हें जोड़कर बोरवेल में डाला गया, लेकिन कोशिश सफल नहीं हुई। इसके बाद NDRF ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब 10 घंटे की मशक्कत के बाद नेहा को बोरवेल से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। सोमवार को दैनिक भास्कर रिपोर्टर मौके पर पहुंचा। नेहा के साथ खेलने वाली शिविका, उसकी बुआ और परिवार के अन्य लोगों ने हादसे के बाद क्या देखा और बच्ची को बचाने के लिए क्या-क्या कोशिशें कीं, पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट… बच्चियों ने नेहा के गिरने के बाद मदद के लिए घर की तरफ दौड़ लगाई शिविका के मुताबिक, रविवार शाम 6 बजे उसके साथ नेहा, उसकी 4 साल की बहन गौरी और एक अन्य बच्ची मौजूद थी। सांडों को अपनी तरफ आते देख सभी बच्चे भागने लगे। इसी दौरान नेहा बोरवेल की तरफ चली गई और उसमें गिर गई। नेहा के गिरते ही तीनों बच्चियां घबरा गईं और मदद के लिए उसके घर की तरफ दौड़ीं। पहले लगा आसपास कहीं गिरी होगी, फिर बोरवेल से सुनाई दी रोने की आवाज नेहा की बुआ रूबी ने बताया कि बच्चों ने जब नेहा के बोरवेल में गिरने की जानकारी दी तो परिवार को पहले लगा कि वह आसपास कहीं गिर गई होगी। परिवार के लोग बच्ची को तलाशते हुए बच्चों के बताए स्थान पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर बोरवेल के अंदर से नेहा के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनते ही परिवार के लोगों के होश उड़ गए। साड़ी-रस्सी से बच्ची को निकालने की कोशिश रूबी के मुताबिक, परिवार के पास बच्ची को बाहर निकालने का कोई साधन नहीं था। वह साड़ी नहीं पहनती हैं, इसलिए आसपास के लोगों से आनन-फानन में पांच-छह साड़ियां इकट्ठी की गईं। सभी साड़ियों को आपस में बांधकर बोरवेल में डाला गया, ताकि बच्ची उसे पकड़कर बाहर आ सके। परिवार और आसपास के लोगों ने रस्सी के जरिए भी बच्ची को निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। परिवार करीब 20 मिनट तक अपने स्तर पर बच्ची को बाहर निकालने की कोशिश करता रहा। इसी दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। 10 घंटे बाद बोरवेल से निकली नेहा, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया नेहा को बचाने के लिए NDRF और SDRF की टीमों ने करीब 10 घंटे तक ऑपरेशन चलाया। सोमवार सुबह करीब 4 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया। बाहर निकालते समय बच्ची में किसी तरह की कोई हरकत नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम उसे तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 125 फीट पर भरा था गंदा पानी, 200 फीट से ज्यादा गहराई में अटकी थी बच्ची NDRF अधिकारी कुणाल तिवारी के मुताबिक, बोरवेल कई साल से बंद था। करीब 125 फीट की गहराई पर गंदा पानी भरा हुआ था, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी परेशानी आई। बच्ची का सिर नीचे की तरफ था। काफी मशक्कत के बाद टीम ने उसके पैर की मदद से उसे बाहर निकाला। बच्ची 200 फीट से ज्यादा गहराई पर अटकी हुई थी। पिता बेलदार, मां घरों में सफाई करती थी नेहा के पिता रामदीन पिछले करीब 15 साल से किराए के मकान में रह रहे हैं। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले हैं। नेहा चार बेटियों में तीसरे नंबर पर थी। उससे बड़ी दो बेटियां नंदनी (11) और गौरी (4) हैं, जबकि सबसे छोटी बेटी आदिशा 6 महीने की है। रामदीन बेलदारी का काम करते हैं। उनकी पत्नी रचना घरों में सफाई का काम करती थीं। सबसे छोटी बेटी होने के कारण उन्होंने काम बंद किया हुआ था और घर पर रहकर बच्चियों को संभालती थीं। संत सूरदास पार्क में भी खुला मिला बोरवेल सीही गांव में जिस खुले बोरवेल में गिरकर नेहा की जान गई, उससे कुछ ही दूरी पर संत सूरदास पार्क में भी एक बोरवेल खुला पड़ा मिला। पार्क में शाम के समय बच्चे परिवार के लोगों के साथ आते हैं। इस बोरवेल को प्लास्टिक के कट्टे और पत्थर की मदद से ढका हुआ है। फर्क इतना है कि यह जमीन से करीब डेढ़ फीट ऊंचाई पर है और दूर से नजर आ जाता है। पुलिस बोली- शिकायत नहीं मिली, नगर निगम ने जांच की बात कही सेक्टर-8 थाना चौकी प्रभारी तालीम ने बताया कि परिवार की तरफ से अभी तक कोई शिकायत नहीं दी गई है। माता-पिता के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया है। वहीं, नगर निगम से XEN संजीव गुप्ता ने बताया कि यह बोरवेल पिछले करीब 15 साल से बंद था। उसके ढक्कन के हटने की जानकारी निगम को नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि जिन मैनहोल के खुले होने की शिकायत मिलती है, उन्हें 24 घंटे के भीतर बंद कराया जाता है। कई बार शरारती तत्व मैनहोल के ढक्कन भी उठा ले जाते हैं। अधिकारी के मुताबिक, यह बोरवेल भी प्रयोग में नहीं होने के कारण बंद किया गया था। अब जांच की जा रही है कि बोरवेल का ढक्कन किसने हटाया और यह दोबारा कैसे खुला। ————————————————- ये खबर भी पढ़ें :- फरीदाबाद में बोरवेल से निकली नेहा जिंदगी की जंग हारी:10 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, खेलते हुए गिरी थी; 15 साल से बंद था हरियाणा के फरीदाबाद में 250 फीट गहरे बोरवेल में गिरी 3 साल की बच्ची नेहा को करीब 10 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन बाद सोमवार सुबह 4 बजे बाहर निकाला गया। बच्ची के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसे तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…

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