बांदा में तीन करोड़ रुपए की कोडीनयुक्त सिरप की खेप पकड़े जाने के मामले में मुख्य आरोपी प्रियांशु के जीजा रविंद्र गुप्ता को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि रविंद्र गुप्ता कक्षा छह तक पढ़ा है और उसके पास फार्मा की कोई डिग्री नहीं है। पुलिस जांच में सामने आया कि रविंद्र के नाम पर हमीरपुर के टेढ़ा में ओम मेडिकल एजेंसी का ड्रग लाइसेंस बना हुआ था। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि फार्मा की डिग्री नहीं होने के बावजूद उसके नाम पर लाइसेंस कैसे जारी हुआ। लाइसेंस जुलाई 2026 में ही बना था। इसके कुछ समय बाद ही एजेंसी के नाम से कोडीनयुक्त सिरप की बड़ी खेप मंगाई गई। पुलिस लाइसेंस बनवाने के लिए लगाए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है। दस्तावेज कूटरचित मिलने पर लाइसेंस बनवाने और जारी करने की प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। जीएसटी एक्टिव नहीं था, फिर भी मंगाई गई सिरप की खेप एसटीएफ और बिसंडा पुलिस ने 3 जुलाई को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पुनाहुर गोल चौराहे के पास डीसीएम से 250 पेटी यानी 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त सिरप बरामद की थी। डीसीएम को स्कॉर्ट कर रही कार से जुड़े लोगों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में अतर्रा निवासी प्रियांशु को मुख्य सरगना बताया गया। पुलिस के मुताबिक, डीसीएम चालक शेखर के पास मिले जीएसटी दस्तावेज और ई-वे बिल में सिरप की सप्लाई दिल्ली की गणेश फार्मा से हमीरपुर के टेढ़ा स्थित ओम मेडिकल एजेंसी के नाम दर्ज थी। जांच में सामने आया कि सिरप का ऑर्डर किए जाने के समय ओम मेडिकल एजेंसी की जीएसटी एक्टिव नहीं थी। कपड़ा फैक्ट्री में 15 हजार रुपए कमाता था रविंद्र पुलिस के अनुसार, रविंद्र पहले दिल्ली की एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करता था और करीब 15 हजार रुपए महीने कमाता था। ज्यादा कमाई का लालच देकर उसके साले प्रियांशु और उसके साथियों ने उसे बुलाया था। पूछताछ में रविंद्र ने अवैध कारोबार से जुड़े दो-तीन लोगों को जानने की बात कही है। पुलिस ने उसकी तलाश में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कई जगह दबिश दी थी। करीब 22 दिन बाद उसे शुक्रवार को बदौसा स्टेशन तिराहे के पास गिरफ्तार किया गया। पहले मंगाई गई खेपों का भी रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस पुलिस अब इससे पहले मंगाई गई कोडीनयुक्त सिरप की खेपों और पूरे सप्लाई नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है। दिल्ली की गणेश फार्मा और सिरप बनाने वाली कंपनी से बिल और सप्लाई रिकॉर्ड मांगे गए हैं। पुलिस के मुताबिक, जवाब नहीं मिलने पर संबंधित कंपनियों के कार्यालय जाकर दस्तावेज जुटाए जाएंगे। जीएसटी, बिलिंग और ई-वे बिल की भी जांच पुलिस अब ओम मेडिकल एजेंसी से जुड़े जीएसटी रिकॉर्ड, बिलिंग और ई-वे बिल की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि एजेंसी के नाम पर कितनी खेपें मंगाई गईं और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

