शाजापुर के सोमवारिया बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन धार्मिक कार्यक्रम हुए। मूलनायक 1008 श्री आदिनाथजी का महामस्तकाभिषेक किया गया। वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक पर्व पर निर्वाण लाडू भी चढ़ाया गया। समाजजनों ने ब्रह्मचर्य व्रत की पूजा कर इसे जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। अभिषेक और शांतिधारा के बाद हुई पूजा कार्यक्रम की शुरुआत सुबह अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम पूजन से हुई। वर्ष में एक बार होने वाली विशेष शांतिधारा के पुण्यार्जक सवाईमलजी, राहुलजी, सौरभजी, प्रेमचंदजी, दिलीपजी, बसंतजी, हेमंतजी और नितिनजी परिवार रहे। अभिषेक और शांतिधारा के बाद ब्रह्मचर्य व्रत की पूजा की गई। ब्रह्मचर्य व्रत का अर्थ बताया कार्यक्रम में ब्रह्मचर्य का अर्थ बताया गया। इसमें आत्मा के निर्मल स्वरूप में लीन रहना और वासना व इंद्रिय विकारों का त्याग करना बताया गया। इसे जैन मुनियों के पंच महाव्रतों में चौथा प्रमुख व्रत बताया गया। शाम को विशेष शांतिधारा हुई चतुर्दशी की शाम विशेष अभिषेक, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र के कलश के साथ विशेष शांतिधारा की गई। शाम की शांतिधारा के पुण्यार्जक सत्येंद्रजी जैन, डॉ. एनसी जैन, त्रिशलानंदजी और वैभवजी जैन परिवार रहे। समाजजनों ने भक्तिभाव से पूजन किया और ब्रह्मचर्य व्रत को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

