इंदौर में दातुनी पहाड़ी पर पौधारोपण:मंत्री विजयवर्गीय बोले- प्रकृति का दोहन करें, शोषण का अधिकार नहीं

इंदौर में दातुनी पहाड़ी पर पौधारोपण:मंत्री विजयवर्गीय बोले- प्रकृति का दोहन करें, शोषण का अधिकार नहीं

इंदौर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत गुरुवार को दातुनी पहाड़ी पर पौधारोपण कार्यक्रम हुआ। इसमें दादा गुरु महाराज, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक मधु वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने पहाड़ी पर पौधे रोपे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रकृति से जितना लेते हैं, उससे दोगुना उसे लौटाना हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए। हम प्रकृति का दोहन कर सकते हैं, लेकिन शोषण करने का अधिकार नहीं है। प्रकृति के शोषण के कारण अतिवृष्टि और अनावृष्टि जैसी स्थितियां बनती हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ में सात मंजिला इमारतों के ढहने जैसी घटनाएं भी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम हैं। इसलिए वृक्षारोपण बहुत जरूरी है। विजयवर्गीय ने दातुनी पहाड़ी का नाम बदलकर ‘ऋषि पहाड़ी’ रखने की बात कही। दादा गुरु महाराज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे साढ़े पांच साल से केवल नर्मदा के जल पर रहे हैं, जो विज्ञान के लिए भी चुनौती है। 24 तारीख को 20-25 देशों के डॉक्टर उनका परीक्षण करने आएंगे। उन्होंने इंदौर में कम बारिश को लेकर भी चिंता जताई। कहा कि पेड़ सूखने या मरने की घटना उन्हें बहुत दुखी करती है। दुनिया में केवल सनातन संस्कृति ही पेड़-पौधों को परमात्मा मानती है दादा गुरु महाराज ने कहा कि गणेशोत्सव के अवसर पर वृक्षारोपण रूपी यह महायज्ञ किया जा रहा है। इससे एक ओर जीवन सुरक्षित होगा, वहीं दूसरी ओर प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन होगा। यह आपदा और संक्रमण से सुरक्षा देने के साथ घर-परिवार की संपन्नता का आधार भी बनेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल सनातन संस्कृति ही ऐसी है, जो पेड़-पौधों को परमात्मा मानकर उनकी पूजा करती है। हम प्रकृति को देवता और शक्ति मानते हैं। आज दुनिया भर में लोग कह रहे हैं कि पेड़ों में संवेदना होती है, जबकि भारत हजारों वर्षों से इसकी मान्यता रखता है। इसी कारण प्रकृति पूजा ने दुनिया में भारत को विशिष्ट स्थान दिलाया है। दादा गुरु ने कहा कि धरती को बचाने के लिए आज सभी देश एकजुट हो रहे हैं। जिस तरह भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया था, उसी तरह पेड़ अपनी जड़ों में जल को धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर आने पर उनका पड़ाव पितृ पर्वत पर रहता है, लेकिन अब से दूसरा पड़ाव ‘ऋषि पर्वत’ पर रहेगा।

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