क्या दतिया में फिर उपचुनाव होगा?:घनश्याम सिंह के निर्वाचन को HC में चुनौती; हार के बाद नरोत्तम को तरजीह, फिर आशुतोष समर्थक अध्यक्ष क्यों?

क्या दतिया में फिर उपचुनाव होगा?:घनश्याम सिंह के निर्वाचन को HC में चुनौती; हार के बाद नरोत्तम को तरजीह, फिर आशुतोष समर्थक अध्यक्ष क्यों?

दतिया एक साल में चौथी बार चर्चा में है। पहले राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने से उपचुनाव घोषित हुए। भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया, फिर उपचुनाव हुआ और अब जीते हुए विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इसी बीच भाजपा ने आखिरकार हार के 49 दिन बाद नया जिलाध्यक्ष भी चुन लिया है। दतिया में क्या पक रहा है, क्या घनश्याम सिंह की विधायकी जाएगी, और नरोत्तम अब कहां खड़े हैं; मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… सवाल 1: दतिया में आखिर चल क्या रहा है? जवाब: चलिए इसे टाइमलाइन के जरिए समझते हैं… सवाल 2: घनश्याम सिंह की विधायकी के खिलाफ याचिका क्यों, क्या सदस्यता जाएगी? जवाब: भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने 17 सितंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। यहां सवाल यह है कि चुनावी शपथ पत्र (फॉर्म 26) में हर पुरानी FIR बताना कानूनन जरूरी है या नहीं… सवाल 3: अगर चुनाव रद्द हुआ, तो क्या फिर उपचुनाव होगा? जवाब: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के मुताबिक चुनाव सिर्फ चुनाव याचिका के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है, और उसकी समयसीमा नतीजे की घोषणा से 45 दिन है। सवाल 4: नरोत्तम को तरजीह मिल रही थी फिर आशुतोष समर्थक को जिलाध्यक्ष क्यों बनाया? जवाब: हार के बाद संगठन को नए सिरे से खड़ा करना भाजपा के सामने चुनौती थी। सवाल 5: अब दतिया भाजपा में क्या बदलेगा, और नरोत्तम अब कहां खड़े हैं? जवाब: भाजपा के लिए अब परीक्षा नई जिला कार्यकारिणी बनाने और संगठन को फिर सक्रिय करने की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठन में गुटबाजी की खबरों के बीच दतिया में संगठन को फिर सक्रिय करने के लिए उन पर भरोसा जताया है। देवश्री माली के मुताबिक असली चुनौती यही होगी कि नई टीम कहां से लाई जाए, क्योंकि दतिया में दूसरी-तीसरी-चौथी कतार का लगभग हर कार्यकर्ता किसी न किसी रूप में नरोत्तम खेमे से जुड़ा रहा है। नरोत्तम के लिए क्या कोई नया समीकरण अब भी बन सकता है? उपचुनाव की हार के बाद भाजपा की समीक्षा बैठक में नरोत्तम मिश्रा को नहीं बुलाया गया, जबकि वे चुनाव संचालन समिति के प्रमुख थे। दूसरी ओर, हाल ही में तीन पूर्व मंत्रियों- प्रभुराम चौधरी, अरविंद सिंह भदौरिया और मीना सिंह- को बंगला खाली करने का नोटिस भेजा गया है। लेकिन नरोत्तम मिश्रा को उल्टा 2028 तक के लिए नए सिरे से बंगला आवंटित किया गया है। देवश्री माली के मुताबिक यह इत्तेफाक नहीं हो सकता, ऊपर से कोई संकेत मिले बिना ऐसा फैसला संभव नहीं है। क्या उत्तर प्रदेश में अहम जिम्मेदारी देने की कवायद है… मार्च 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां ब्राह्मण वोट अहम है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती, और हाल ही में दिनेश शर्मा को चुनाव से पहले राज्यपाल बनाया जाना भी इसी रणनीति की एक कड़ी माना जा रहा है। दिल्ली और भोपाल में नरोत्तम से हो रही मुलाकातों को भी इसी बड़े ब्राह्मण-समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह सिर्फ चर्चा है। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी पढ़िए… दतिया में कुंवर साहब की जीत या अपनों की गद्दारी- आशुतोष का दर्द क्या बयां कर रहा दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने अपनी सीट बचा ली है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हरा दिया। हार के बाद आशुतोष तिवारी ने कहा, ‘हार की समीक्षा करेंगे, जो लोग भाजपा को अपनी मां कहते हैं, उन्होंने धोखा दिया।’…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।

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