महराजगंज जिले में कैंसर के इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं है। मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। जिले में केएमसी मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद, मरीज यहां इलाज कराने के बजाय बड़े शहरों में जाना पसंद करते हैं। इससे उन्हें काफी परेशानी होती है। जिले में सिर्फ शुरुआती जांच (स्क्रीनिंग) के भरोसे ही काम चल रहा है। करीब 30 लाख की आबादी वाले इस जिले में 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 50 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), 102 आरोग्य केंद्र, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और पीपीपी मोड पर संचालित केएमसी मेडिकल कॉलेज हैं। कैंसर के इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं इन्हीं के भरोसे जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा किया जाता है। हालांकि, कैंसर के इलाज के लिए यहां कोई खास सुविधा नहीं है। सरकारी अस्पतालों में सिर्फ स्क्रीनिंग के जरिए बीमारी का पता लगाकर मरीजों को सचेत किया जाता है। पुख्ता जांच और इलाज के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। एक कैंसर पीड़ित युवक ने बताया कि चार साल पहले उन्हें माउथ कैंसर हुआ था। शुरुआत में जिला अस्पताल में जांच कराने पर डॉक्टरों ने संदेह जताया। समय और पैसे दोनों की बर्बादी इसके बाद वाराणसी जाकर जांच कराई तो कैंसर की पुष्टि हुई। समय पर इलाज शुरू होने से अब सुधार हो रहा है। युवक ने कहा कि अगर समय रहते पता न चलता तो बड़ी समस्या हो जाती। जिले में इलाज की सुविधा न होने से समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। एक आंकड़े के मुताबिक, 40 साल से अधिक उम्र के लगभग आठ से दस लोग हर साल कैंसर की चपेट में आते हैं। जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक इलाज न मिलने पर डॉक्टर उन्हें रेफर कर देते हैं। अंग में गांठ होने पर तुरंत जांच डॉक्टरों के अनुसार, शरीर के किसी भी हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की बढ़ोतरी कैंसर का कारण बन सकती है। रसायनों के ज्यादा संपर्क में रहने से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसलिए शरीर के किसी भी अंग में गांठ होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। लगातार वजन कम होने या बाल झड़ने पर भी जांच करवाना जरूरी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि शरीर के किसी भी हिस्से में कोई गांठ होने पर उसे नजरअंदाज न करें। समय रहते उसकी जांच जरूर कराएं। उन्होंने यह भी कहा कि सही समय पर कैंसर की पहचान ही उसका इलाज है।

