पूर्णिया के प्रेक्षागृह में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। कार्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण में नगर निगम की महापौर, उप महापौर, सभी वार्डों के पार्षद, जिले के सभी नगर निकायों के मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद, वार्ड सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार, डीडीसी राजीव कुमार और एसडीएम लॉ एंड ऑर्डर राजकुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। अभियान का संचालन कर रही एजेंसी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों ने मिलकर दीप जलाकर की। इससे पहले वंदे मातरम और राष्ट्रगान हुआ। अतिथियों को ‘हरित पूर्णिया’ का संदेश देते हुए पौधे देकर सम्मानित किया गया। नई व्यवस्था की जनप्रतिनिधियों को दी जानकारी जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के मुख्य बिंदुओं और कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था के बारे में जनप्रतिनिधियों को जानकारी देना था। प्रशिक्षण शिविर में अभियान का संचालन कर रही एजेंसी के पदाधिकारी प्रशिक्षक के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने मौजूद जनप्रतिनिधियों को ठोस कचरा प्रबंधन के नए नियमों और व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डीएम बोले- वेस्ट मैनेजमेंट बेहतर करना जरूरी जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा कि स्वच्छता ही सेवा 2026 के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के मुख्य बिंदुओं को लेकर सभी नगर निकायों के अध्यक्षों, महापौर, उप महापौर और पार्षदों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों के बीच बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर करना जरूरी है। प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम से जनप्रतिनिधियों के साथ आम लोगों को भी फायदा मिलेगा। अब चार श्रेणियों में बांटा जाएगा कचरा प्रशिक्षण शिविर में पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी ने अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही सेवा अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों में साफ-सफाई को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि पहले कचरे को मुख्य रूप से गीले और सूखे कचरे में बांटा जाता था। नई नियमावली 2026 के तहत अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका प्रबंधन किया जाएगा। महापौर ने कहा कि गीले कचरे से जैविक खाद बनाई जा सकती है। अगर कचरे का सही तरीके से प्रबंधन नहीं किया गया तो यह स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए घरों, स्कूलों और बाजारों से निकलने वाले कचरे को सही तरीके से अलग-अलग करने की जरूरत है। नगर आयुक्त बोले- जनभागीदारी सबसे जरूरी पूर्णिया के नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि शहर को साफ रखना सिर्फ सफाईकर्मियों या प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें आम लोगों की भागीदारी सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के बारे में सभी जनप्रतिनिधियों को जानकारी देना जरूरी है। नियमावली का मुख्य जोर इस बात पर है कि लोग अपने स्तर पर ही कचरे को उसके स्रोत पर चार श्रेणियों में अलग-अलग करें और फिर नगर निकाय को सौंपें। नगर आयुक्त ने बताया कि विशेषज्ञों और प्रोफेसरों की ओर से इस संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी जनप्रतिनिधि प्रशिक्षण को ध्यान से समझेंगे और इसे जमीन पर लागू करने में सहयोग करेंगे। पूर्णिया के प्रेक्षागृह में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। कार्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण में नगर निगम की महापौर, उप महापौर, सभी वार्डों के पार्षद, जिले के सभी नगर निकायों के मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद, वार्ड सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार, डीडीसी राजीव कुमार और एसडीएम लॉ एंड ऑर्डर राजकुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। अभियान का संचालन कर रही एजेंसी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों ने मिलकर दीप जलाकर की। इससे पहले वंदे मातरम और राष्ट्रगान हुआ। अतिथियों को ‘हरित पूर्णिया’ का संदेश देते हुए पौधे देकर सम्मानित किया गया। नई व्यवस्था की जनप्रतिनिधियों को दी जानकारी जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के मुख्य बिंदुओं और कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था के बारे में जनप्रतिनिधियों को जानकारी देना था। प्रशिक्षण शिविर में अभियान का संचालन कर रही एजेंसी के पदाधिकारी प्रशिक्षक के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने मौजूद जनप्रतिनिधियों को ठोस कचरा प्रबंधन के नए नियमों और व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डीएम बोले- वेस्ट मैनेजमेंट बेहतर करना जरूरी जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा कि स्वच्छता ही सेवा 2026 के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के मुख्य बिंदुओं को लेकर सभी नगर निकायों के अध्यक्षों, महापौर, उप महापौर और पार्षदों के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों के बीच बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और वेस्ट मैनेजमेंट को बेहतर करना जरूरी है। प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम से जनप्रतिनिधियों के साथ आम लोगों को भी फायदा मिलेगा। अब चार श्रेणियों में बांटा जाएगा कचरा प्रशिक्षण शिविर में पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी ने अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही सेवा अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों में साफ-सफाई को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि पहले कचरे को मुख्य रूप से गीले और सूखे कचरे में बांटा जाता था। नई नियमावली 2026 के तहत अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका प्रबंधन किया जाएगा। महापौर ने कहा कि गीले कचरे से जैविक खाद बनाई जा सकती है। अगर कचरे का सही तरीके से प्रबंधन नहीं किया गया तो यह स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए घरों, स्कूलों और बाजारों से निकलने वाले कचरे को सही तरीके से अलग-अलग करने की जरूरत है। नगर आयुक्त बोले- जनभागीदारी सबसे जरूरी पूर्णिया के नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि शहर को साफ रखना सिर्फ सफाईकर्मियों या प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें आम लोगों की भागीदारी सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के बारे में सभी जनप्रतिनिधियों को जानकारी देना जरूरी है। नियमावली का मुख्य जोर इस बात पर है कि लोग अपने स्तर पर ही कचरे को उसके स्रोत पर चार श्रेणियों में अलग-अलग करें और फिर नगर निकाय को सौंपें। नगर आयुक्त ने बताया कि विशेषज्ञों और प्रोफेसरों की ओर से इस संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी जनप्रतिनिधि प्रशिक्षण को ध्यान से समझेंगे और इसे जमीन पर लागू करने में सहयोग करेंगे।

