Saudi Arabia Israel Relations: ईरान के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध का नया मोर्चा सऊदी अरब और यमन में खुला है। हालांकि सऊदी अरब इस युद्ध में अकेला पड़ता दिख रहा है। सऊदी को न तो मक्का समझौते का कोई लाभ मिला और न ही अमरीकी मदद मिल रही है। हूतियों की समुद्री नाकेबंदी और तेल रिफाइनरियों और आपूर्ति के ठिकानों पर हमलों से उसका निर्यात प्रभावित हुआ है।
क्षेत्रीय मोर्चों जैसे इराक के हथियारबंद गुट, यमन के हूती और मुस्लिम ब्रदरहुड के कारण सऊदी की सुरक्षा चिंताएं और गहरी हो गई हैं। इजरायली मीडिया के अनुसार सऊदी शाही परिवार से संबंधित सूत्र ने अमेरिकी रूख से निराशा जताई है। इस बीच जियो पॉलिटिकल विशेषज्ञ इसे अमरीकी चाल मान रहे हैं। इसके जरिए वह सऊदी अरब को इजराइल के नजदीक ले जाना चाहता है।
इस तरह से सऊदी अरब को इजराइल के पास लाएगा अमेरिका
- सैन्य मदद से हाथ खींचना- इससे सऊदी अरब के सुरक्षा और तेल रिफाइनरियों पर हूतियों के हमलों का खतरा बढ़ेगा। अमेरिकी मदद न मिलने से सऊदी अरब परेशान होगा।
- सीधे युद्ध से बचना- ईरान के साथ युद्ध में पहले से ही फंसा अमरीका नया मोर्चा नहीं खोलेगा। ऐसी हालत में सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय विकल्प तलाशने होंगे।
- इजराइल का विकल्प- सिविल न्यूक्लियर डील के लिए अमरीका की शर्त पहले से है। इधर सुरक्षा के लिए इजराइल ने सऊदी अरब को डेविड स्लिंग और एरो-3 एयर डिफेंस सिस्टम देने की पेश की है। ऐसे में इजराइल-सऊदी के बीच नजदीकी बढ़ेगी।
अमेरिकी अधिकारियों की ओमान में मीटिंग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मस्कट में स्थित अमरीकी दूतावास में हाल में एक बैठक हुई है। इसमें अंसारअल्लाह(हूती) के प्रतिनिधि भी शामिल थे। इस दौरान हूतियों को भरोसा दिया गया कि 2025 में हुआ युद्धविराम लागू है। इसके बाद हूतियों ने भी कहा कि लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने का उनका इरादा नहीं है। बदले में अमेरिका ने भी सऊदी-हूती संघर्ष में अभी तक कोई हस्तक्षेप नहीं किया है।
भारतीय कंपनियों को तेल आपूर्ति रोकी
सऊदी अरामको ने लाल सागर ओर होर्मुज के दोनों रास्तों से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति को फिलहाल रोक दिया है। सऊदी अरामको ने भारतीय रिफाइनरियों को सूचना भी दी है कि वह अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों के बाद अगले आदेश तक कच्चे तेल की आपूर्ति नहीं करेगा। भारत के कच्चे तेल का निर्यात का लगभग 9 फीसदी हिस्सा सऊदी अरब से सप्लाई हो रहा है। वहीं सऊदी अरब ने वैकल्पिक रास्ते के तौर पर ओमान के सोहार पोर्ट से कच्चे तेल की सप्लाई शुरू की है।

