डीग सभापति पद: भाजपा के तीन दावेदारों ने भरा नामांकन:मालती देवी, अर्पित गुप्ता, राहुल लवानिया ने जताई दावेदारी

डीग सभापति पद: भाजपा के तीन दावेदारों ने भरा नामांकन:मालती देवी, अर्पित गुप्ता, राहुल लवानिया ने जताई दावेदारी

डीग नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद अब सभापति पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बुधवार को सभापति पद के लिए भाजपा से तीन दावेदार मालती देवी, अर्पित गुप्ता और राहुल लवानिया ने उपखंड अधिकारी अमित कुमार मीणा के सामने नामांकन दाखिल किए। तीन उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के साथ ही अब सभापति पद को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ और रणनीति का दौर शुरू होने की संभावना है। किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं नगर परिषद चुनाव में किसी भी दल को साफ बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में सभापति पद का चुनाव खास हो गया है। बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दावेदारों को अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। खासतौर पर निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। विधायक शैलेश सिंह की भूमिका पर नजर सभापति चुनाव में डीग-कुम्हेर विधायक डॉ. शैलेश सिंह की भूमिका पर भी सबकी नजर है। तीन उम्मीदवारों के नामांकन के बाद अब राजनीतिक चर्चाएं इस बात को लेकर तेज हैं कि विधायक किस दावेदार का समर्थन करते हैं। हालांकि, अंतिम तस्वीर नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही और स्पष्ट होगी। दो दिन तक नाम वापसी का मौका नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों को नाम वापस लेने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। यदि कोई दावेदार नाम वापस लेता है तो सभापति पद का मुकाबला सीधे तौर पर प्रभावित होगा। नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद मैदान में बचे प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद पार्षदों के समर्थन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। निर्दलीय पार्षद बन सकते हैं निर्णायक डीग नगर परिषद के चुनाव परिणाम में बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों के जीतकर आने से सभापति चुनाव में उनका महत्व बढ़ गया है। स्पष्ट बहुमत नहीं होने की स्थिति में राजनीतिक दलों और सभापति पद के दावेदारों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगले दो दिन डीग की नगर राजनीति के लिए अहम माने जा रहे हैं। नाम वापसी के बाद यह साफ होगा कि मुकाबला कितने उम्मीदवारों के बीच रहेगा और कौन-कौन से पार्षद किस खेमे के साथ खड़े होते हैं। इसके बाद सभापति पद की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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