जमुई के स्कूल में मवेशियों के बीच चल रही कक्षाएं:79 बच्चों का स्कूल बदहाल, चारदीवारी अधूरी; रसोईघर सालों से बंद

जमुई के स्कूल में मवेशियों के बीच चल रही कक्षाएं:79 बच्चों का स्कूल बदहाल, चारदीवारी अधूरी; रसोईघर सालों से बंद

जमुई के प्राथमिक विद्यालय जमुनियाटांड़ में 79 बच्चों की पढ़ाई बुनियादी सुविधाओं के अभाव में प्रभावित हो रही है। स्कूल परिसर में न चारदीवारी है और न ही पीने के पानी की समुचित व्यवस्था। शौचालय भी बदहाल है। चारों ओर घास उगी है और चारदीवारी नहीं होने के कारण मवेशी परिसर में खुलेआम घूमते रहते हैं। विद्यालय में एक प्रधान शिक्षिका और दो सहायक शिक्षक तैनात हैं। शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्कूल में जरूरी संसाधनों की कमी उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है। परिसर की स्थिति भी लंबे समय से उपेक्षा की ओर इशारा करती है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… चारदीवारी के लिए सामग्री आई, काम अधूरा स्कूल परिसर में चारदीवारी निर्माण के लिए सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। जमीन की खुदाई भी कराई गई, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। स्कूल सूत्रों के मुताबिक सामग्री आने के बाद काम बंद हो गया। सालों से अधूरा पड़ा है रसोईघर बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनाने के लिए बनाया जा रहा रसोईघर भी वर्षों से अधूरा है। भवन के अंदर और आसपास पेड़-पौधे उग आए हैं। ऐसे में भोजन व्यवस्था को लेकर भी स्कूल को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरम्मत के पैसे आए, मिट्टी भराई पर सवाल स्कूल भवन की मरम्मत के लिए राशि आने की बात सामने आई है। परिसर में ठेकेदार की ओर से मिट्टी भराई का काम भी कराया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि काम का जमीन पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। नक्सली हमले में उड़ाया गया था पुराना भवन जमुनियाटांड़ स्कूल पहले नक्सली हिंसा का भी शिकार हो चुका है। वर्षों पहले नक्सलियों ने स्कूल भवन को बम से उड़ा दिया था। इसके बाद नया भवन बनाया गया। पुराना भवन अब जर्जर स्थिति में है, जबकि नए भवन में भी जगह और जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। एक कमरे में राशन-थाली, ऊपर चलता है ऑफिस स्कूल में जगह की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक कमरे में दोपहर के भोजन का चावल और प्लेटें रखी हुई हैं। वहीं, ऊपर के कमरे में प्रधान शिक्षिका का कार्यालय संचालित होता है। बरामदे में बैठते हैं आंगनबाड़ी के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन नहीं है। इस वजह से छोटे बच्चों को स्कूल के बरामदे में बैठाया जाता है। रसोइया के मुताबिक, स्कूल में बनने वाला भोजन ही आंगनबाड़ी के बच्चों को भी दिया जाता है। उनके लिए अलग से भोजन नहीं बनता। एक सेविका को दो केंद्रों का प्रभार आंगनबाड़ी सेविका निर्मला कुमारी को गुरमाहा और चोरमारा केंद्र का प्रभार मिला हुआ है। ऐसे में भवन की समस्या के साथ दोनों केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी भी उनके सामने है। प्रधान शिक्षिका बोलीं- पहले से चल रहा था निर्माण प्रधान शिक्षिका उषा कुमारी सिंह ने बताया कि उनके पदभार ग्रहण करने से पहले निर्माण और मिट्टी भराई का काम चल रहा था। काम क्यों रुका, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने स्कूल की कमियों को लेकर विभाग को लिखित शिकायत देने की बात कही। अधिकारियों ने जांच का दिया भरोसा सीडीपीओ प्रियंवदा कुमारी ने मामले में निरीक्षण कराने की बात कही है। वहीं, बीडीओ सह प्रभारी बीईओ अनिल कुमार मिस्त्री ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद विद्यालय का निरीक्षण कराया जाएगा। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल: निर्माण कार्य आखिर क्यों रुका? स्कूल में चारदीवारी और रसोईघर के लिए सामग्री आने, जमीन की खुदाई और मिट्टी भराई के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। ऐसे में सवाल है कि निर्माण कार्य किस स्तर पर रुका, इसके लिए जिम्मेदार कौन है और उपलब्ध राशि का कितना इस्तेमाल हुआ। विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। जमुई के प्राथमिक विद्यालय जमुनियाटांड़ में 79 बच्चों की पढ़ाई बुनियादी सुविधाओं के अभाव में प्रभावित हो रही है। स्कूल परिसर में न चारदीवारी है और न ही पीने के पानी की समुचित व्यवस्था। शौचालय भी बदहाल है। चारों ओर घास उगी है और चारदीवारी नहीं होने के कारण मवेशी परिसर में खुलेआम घूमते रहते हैं। विद्यालय में एक प्रधान शिक्षिका और दो सहायक शिक्षक तैनात हैं। शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्कूल में जरूरी संसाधनों की कमी उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है। परिसर की स्थिति भी लंबे समय से उपेक्षा की ओर इशारा करती है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… चारदीवारी के लिए सामग्री आई, काम अधूरा स्कूल परिसर में चारदीवारी निर्माण के लिए सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। जमीन की खुदाई भी कराई गई, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। स्कूल सूत्रों के मुताबिक सामग्री आने के बाद काम बंद हो गया। सालों से अधूरा पड़ा है रसोईघर बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनाने के लिए बनाया जा रहा रसोईघर भी वर्षों से अधूरा है। भवन के अंदर और आसपास पेड़-पौधे उग आए हैं। ऐसे में भोजन व्यवस्था को लेकर भी स्कूल को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मरम्मत के पैसे आए, मिट्टी भराई पर सवाल स्कूल भवन की मरम्मत के लिए राशि आने की बात सामने आई है। परिसर में ठेकेदार की ओर से मिट्टी भराई का काम भी कराया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि काम का जमीन पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। नक्सली हमले में उड़ाया गया था पुराना भवन जमुनियाटांड़ स्कूल पहले नक्सली हिंसा का भी शिकार हो चुका है। वर्षों पहले नक्सलियों ने स्कूल भवन को बम से उड़ा दिया था। इसके बाद नया भवन बनाया गया। पुराना भवन अब जर्जर स्थिति में है, जबकि नए भवन में भी जगह और जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। एक कमरे में राशन-थाली, ऊपर चलता है ऑफिस स्कूल में जगह की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक कमरे में दोपहर के भोजन का चावल और प्लेटें रखी हुई हैं। वहीं, ऊपर के कमरे में प्रधान शिक्षिका का कार्यालय संचालित होता है। बरामदे में बैठते हैं आंगनबाड़ी के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन नहीं है। इस वजह से छोटे बच्चों को स्कूल के बरामदे में बैठाया जाता है। रसोइया के मुताबिक, स्कूल में बनने वाला भोजन ही आंगनबाड़ी के बच्चों को भी दिया जाता है। उनके लिए अलग से भोजन नहीं बनता। एक सेविका को दो केंद्रों का प्रभार आंगनबाड़ी सेविका निर्मला कुमारी को गुरमाहा और चोरमारा केंद्र का प्रभार मिला हुआ है। ऐसे में भवन की समस्या के साथ दोनों केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी भी उनके सामने है। प्रधान शिक्षिका बोलीं- पहले से चल रहा था निर्माण प्रधान शिक्षिका उषा कुमारी सिंह ने बताया कि उनके पदभार ग्रहण करने से पहले निर्माण और मिट्टी भराई का काम चल रहा था। काम क्यों रुका, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने स्कूल की कमियों को लेकर विभाग को लिखित शिकायत देने की बात कही। अधिकारियों ने जांच का दिया भरोसा सीडीपीओ प्रियंवदा कुमारी ने मामले में निरीक्षण कराने की बात कही है। वहीं, बीडीओ सह प्रभारी बीईओ अनिल कुमार मिस्त्री ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद विद्यालय का निरीक्षण कराया जाएगा। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल: निर्माण कार्य आखिर क्यों रुका? स्कूल में चारदीवारी और रसोईघर के लिए सामग्री आने, जमीन की खुदाई और मिट्टी भराई के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। ऐसे में सवाल है कि निर्माण कार्य किस स्तर पर रुका, इसके लिए जिम्मेदार कौन है और उपलब्ध राशि का कितना इस्तेमाल हुआ। विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *