ताजमहल को शिव मंदिर मानकर पर्यटकों ने हाथ जोड़े:चप्पल उतारकर एंट्री की, महिलाएं बोलीं- ये हमारा शिव मंदिर, नीचे भोले बाबा हैं

ताजमहल को शिव मंदिर मानकर पर्यटकों ने हाथ जोड़े:चप्पल उतारकर एंट्री की, महिलाएं बोलीं- ये हमारा शिव मंदिर, नीचे भोले बाबा हैं

आगरा में ताजमहल देखने पहुंचे कुछ पर्यटक इसे मकबरा मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि यह ‘तेजो महालय’ है। यहां भगवान शिव का मंदिर है। इसी आस्था के चलते वह ताजमहल के सामने हाथ जोड़ते और माथा टेकते नजर आए। मथुरा और राजस्थान के धौलपुर से आईं कुछ महिलाओं ने कहा, “हमारे लिए यह ताजमहल नहीं, ‘तेजो महालय’ है।” मेन गेट पर पहुंचते ही उन्होंने चप्पल उतारी। सिर झुकाकर प्रणाम किया। महिलाओं ने ताजमहल को लेकर अपनी आस्था और मान्यताओं के बारे में भी बताया। इस बारे में क्या कहा और विवाद की क्या वजह है, आगे पढ़िए। 2 तस्वीरें देखिए- महिलाएं बोलीं- ये हमारा शिव मंदिर है हिंदू महासभा भी कई बार उठा चुका है तेजोमहालय का मुद्दा अखिल भारत हिंदू महासभा लंबे समय से ताजमहल को ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर बताने का दावा कर रहा है। संगठन की ओर से अलग-अलग मौकों पर ताजमहल में पूजा, जलाभिषेक और अन्य धार्मिक गतिविधियां करने की कोशिश भी की गई हैं। 2015 से कोर्ट में चल रहा ताजमहल को लेकर विवाद ताजमहल को ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर बताने का विवाद कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। साल 2015 में आगरा की अदालत में इस संबंध में मुकदमा दायर किया गया था। याचिका में भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाशेश्वर विराजमान को पक्षकार बनाया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से ताजमहल को शिव मंदिर घोषित करने और हिंदुओं को वहां पूजा-दर्शन की अनुमति देने की मांग की गई। इस मामले में केंद्र सरकार, संस्कृति मंत्रालय, गृह मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी पक्षकार बनाया गया है। बाद में ताजमहल के बंद कमरों और परिसर का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग भी की गई। 2019 में सर्वे की मांग खारिज हुई 18 जुलाई 2019 को आगरा की सिविल कोर्ट ने ताजमहल के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद मामले को आगे चुनौती दी गई। 4 अप्रैल 2026 को आगरा की अतिरिक्त जिला अदालत ने पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। 30 जून 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आगरा की अदालतों के आदेश को चुनौती दी गई। इसमें ताजमहल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई। जुलाई 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और ASI से जवाब मांगा। याचिकाकर्ताओं ने ताजमहल में मौजूद 109 कथित ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषताओं का हवाला देते हुए इसे हिंदू मंदिर होने का आधार बताया है। ताजमहल को लेकर कब-कब विवाद हुए, जानिए ——————————– ये खबर भी पढ़िए- मुख्तार के रिश्तेदारों की संपत्ति हाईकोर्ट ने क्यों रिलीज की: क्या कमजोर है यूपी का गैंगस्टर एक्ट; सरकार कानून में क्या बदलाव कर सकती है इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क मुख्तार अंसारी के रिश्तेदारों की संपत्तियां रिलीज कर दीं। एक अन्य मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को ‘स्टिलबॉर्न’ (पैदा होते ही मर जाना) यानी ‘मरा हुआ कानून’ बताया। पढ़ें पूरी खबर…

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