खगड़िया जिले में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और कई इलाकों में जलस्तर कम हो रहा है। हालांकि, जलस्तर घटने के बावजूद खतरा पूरी तरह टला नहीं है, इसलिए जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने लोगों से कहा है कि जलस्तर कम होते ही जल्दबाजी में पानी भरे या क्षतिग्रस्त इलाकों में न जाएं और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। जिले के खगड़िया, परबत्ता, गोगरी और मानसी अंचलों की 20 से ज्यादा पंचायतों और शहरी इलाकों में बाढ़ का असर रहा है। इससे 37,955 परिवारों की 1,63,159 आबादी प्रभावित हुई है। खगड़िया अंचल में 63,591 और परबत्ता में 51,282 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. 697.66 क्विंटल पशुचारा भी उपलब्ध कराया बोरना, रहीमपुर मध्य, रहीमपुर दक्षिणी, रहीमपुर उत्तरी और माधवपुर पंचायतों में बाढ़ का ज्यादा असर दिखा है, जबकि कई अन्य पंचायतें और वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित हैं। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए जिले में 2 बाढ़ राहत केंद्र और 50 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं। अब तक सामुदायिक रसोई से 2,77,850 लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन दिया जा चुका है। इसके साथ ही, जरूरतमंद परिवारों को 28,088 पॉलीथीन शीट और 7,176 ड्राई राशन पैकेट बांटे गए हैं। पशुओं के लिए 697.66 क्विंटल पशुचारा भी उपलब्ध कराया गया है। 166 सरकारी और अधिग्रहित नावें चलाई जा रही स्वच्छ पीने का पानी और स्वच्छता के लिए 166 नए चापाकल और 127 अस्थायी शौचालय लगाए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 59 दैनिक स्वास्थ्य केंद्र काम कर रहे हैं। दूर-दराज और पानी भरे इलाकों के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 8 बोट एंबुलेंस तैनात हैं। आने-जाने और बचाव कार्य के लिए बेलदौर, गोगरी, खगड़िया, मानसी और परबत्ता में कुल 166 सरकारी और अधिग्रहित नावें चलाई जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से तेज बहाव वाले नालों, नदियों और जलमग्न रास्तों को पार नहीं करने की अपील की है। क्षतिग्रस्त सड़क, पुल-पुलिया और तटबंध के आसपास जाने से बचने को कहा गया है। दूषित पानी के सेवन से बचने की सलाह पानी में डूबे बिजली के पोल, तार या विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखने तथा बच्चों को गहरे पानी और जलजमाव वाले स्थानों से दूर रखने की हिदायत दी गई है। राहत शिविरों से घर लौटने वाले परिवारों को भी प्रशासन की सलाह और स्थानीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही वापस लौटने को कहा गया है। घर में प्रवेश से पहले उसकी संरचनात्मक स्थिति की जांच करने तथा दूषित पानी के सेवन से बचने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। खगड़िया जिले में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और कई इलाकों में जलस्तर कम हो रहा है। हालांकि, जलस्तर घटने के बावजूद खतरा पूरी तरह टला नहीं है, इसलिए जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने लोगों से कहा है कि जलस्तर कम होते ही जल्दबाजी में पानी भरे या क्षतिग्रस्त इलाकों में न जाएं और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। जिले के खगड़िया, परबत्ता, गोगरी और मानसी अंचलों की 20 से ज्यादा पंचायतों और शहरी इलाकों में बाढ़ का असर रहा है। इससे 37,955 परिवारों की 1,63,159 आबादी प्रभावित हुई है। खगड़िया अंचल में 63,591 और परबत्ता में 51,282 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. 697.66 क्विंटल पशुचारा भी उपलब्ध कराया बोरना, रहीमपुर मध्य, रहीमपुर दक्षिणी, रहीमपुर उत्तरी और माधवपुर पंचायतों में बाढ़ का ज्यादा असर दिखा है, जबकि कई अन्य पंचायतें और वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित हैं। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए जिले में 2 बाढ़ राहत केंद्र और 50 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं। अब तक सामुदायिक रसोई से 2,77,850 लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन दिया जा चुका है। इसके साथ ही, जरूरतमंद परिवारों को 28,088 पॉलीथीन शीट और 7,176 ड्राई राशन पैकेट बांटे गए हैं। पशुओं के लिए 697.66 क्विंटल पशुचारा भी उपलब्ध कराया गया है। 166 सरकारी और अधिग्रहित नावें चलाई जा रही स्वच्छ पीने का पानी और स्वच्छता के लिए 166 नए चापाकल और 127 अस्थायी शौचालय लगाए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 59 दैनिक स्वास्थ्य केंद्र काम कर रहे हैं। दूर-दराज और पानी भरे इलाकों के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 8 बोट एंबुलेंस तैनात हैं। आने-जाने और बचाव कार्य के लिए बेलदौर, गोगरी, खगड़िया, मानसी और परबत्ता में कुल 166 सरकारी और अधिग्रहित नावें चलाई जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से तेज बहाव वाले नालों, नदियों और जलमग्न रास्तों को पार नहीं करने की अपील की है। क्षतिग्रस्त सड़क, पुल-पुलिया और तटबंध के आसपास जाने से बचने को कहा गया है। दूषित पानी के सेवन से बचने की सलाह पानी में डूबे बिजली के पोल, तार या विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखने तथा बच्चों को गहरे पानी और जलजमाव वाले स्थानों से दूर रखने की हिदायत दी गई है। राहत शिविरों से घर लौटने वाले परिवारों को भी प्रशासन की सलाह और स्थानीय स्थिति का आकलन करने के बाद ही वापस लौटने को कहा गया है। घर में प्रवेश से पहले उसकी संरचनात्मक स्थिति की जांच करने तथा दूषित पानी के सेवन से बचने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

