बिहार के कैमूर जिले में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनी एक सड़क कुछ ही सालों में जर्जर हो गई है। ‘T02 से गुरुड़ा’ तक 0.700 किलोमीटर लंबी इस सड़क को बनाने में 53 लाख 46 हजार रुपये से ज्यादा खर्च हुए थे। अब यह सड़क पूरी तरह गिट्टियों और गड्ढों में बदल गई है। मेंटेनेंस के लिए था 3 लाख से ज्यादा का बजट सड़क पर अलकतरा (बिटुमिनस) का नामो-निशान मिट चुका है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी भरने से इनमें जलजमाव और कीचड़ की समस्या हो गई है। योजना के डिस्प्ले बोर्ड के मुताबिक, इसके संवेदक योगेंद्र कुमार सिंह थे। ग्रामीण कार्य विभाग (कार्य प्रमंडल मोहनियां) इसकी कार्यकारी एजेंसी थी। सड़क के 5 साल तक रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए 3 लाख रुपये से ज्यादा का बजट रखा गया था। इसमें गड्ढों की मरम्मत और नालियों का रखरखाव शामिल था। सड़क बनाने में घटिया सामान इस्तेमाल – ग्रामीण रखरखाव की समय सीमा खत्म होते ही सड़क पूरी तरह टूट गई। राहगीरों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को आए दिन हादसों का डर रहता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बनाने में घटिया सामान इस्तेमाल किया गया। इसी वजह से यह 5 साल भी ठीक से नहीं टिक पाई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क की जल्द मरम्मत और दोषी एजेंसी की जांच की मांग की है। ग्रामीण कार्य विभाग के एक्सक्यूटिव इंजीनियर ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में लाया गया है। वे इसकी जांच करेंगे और गड्ढों को ठीक करवाएंगे। बिहार के कैमूर जिले में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनी एक सड़क कुछ ही सालों में जर्जर हो गई है। ‘T02 से गुरुड़ा’ तक 0.700 किलोमीटर लंबी इस सड़क को बनाने में 53 लाख 46 हजार रुपये से ज्यादा खर्च हुए थे। अब यह सड़क पूरी तरह गिट्टियों और गड्ढों में बदल गई है। मेंटेनेंस के लिए था 3 लाख से ज्यादा का बजट सड़क पर अलकतरा (बिटुमिनस) का नामो-निशान मिट चुका है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी भरने से इनमें जलजमाव और कीचड़ की समस्या हो गई है। योजना के डिस्प्ले बोर्ड के मुताबिक, इसके संवेदक योगेंद्र कुमार सिंह थे। ग्रामीण कार्य विभाग (कार्य प्रमंडल मोहनियां) इसकी कार्यकारी एजेंसी थी। सड़क के 5 साल तक रखरखाव (मेंटेनेंस) के लिए 3 लाख रुपये से ज्यादा का बजट रखा गया था। इसमें गड्ढों की मरम्मत और नालियों का रखरखाव शामिल था। सड़क बनाने में घटिया सामान इस्तेमाल – ग्रामीण रखरखाव की समय सीमा खत्म होते ही सड़क पूरी तरह टूट गई। राहगीरों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को आए दिन हादसों का डर रहता है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क बनाने में घटिया सामान इस्तेमाल किया गया। इसी वजह से यह 5 साल भी ठीक से नहीं टिक पाई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सड़क की जल्द मरम्मत और दोषी एजेंसी की जांच की मांग की है। ग्रामीण कार्य विभाग के एक्सक्यूटिव इंजीनियर ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में लाया गया है। वे इसकी जांच करेंगे और गड्ढों को ठीक करवाएंगे।

