भोपाल में मेडिकल इंटर्न छात्रों के तीन दिन के आंदोलन के दौरान 7 सितंबर को हमीदिया अस्पताल परिसर में छात्रों पर वाटर कैनन के इस्तेमाल के मामले की प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग ने सचिव शिल्पा गुप्ता को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच में पता चलेगा- जरूरत से ज्यादा बल तो नहीं लगाया
9 सितंबर को जारी शासन के आदेश के मुताबिक जांच का मुख्य बिंदु यह है कि 7 सितंबर को मेडिकल इंटर्न एवं छात्रों के प्रदर्शन के दौरान आवश्यकता से अधिक बल का प्रयोग किया गया था या नहीं। यदि जांच में अनुपातहीन बल प्रयोग पाया जाता है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों का विवरण भी जांच में शामिल किया जाएगा। जांच अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर राज्य शासन को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है। जांच टीम ने हमीदिया अस्पताल में किया निरीक्षण
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद वाटर कैनन के इस्तेमाल और बल प्रयोग की परिस्थितियों की जांच के लिए शासन ने जांच अधिकारी नियुक्त किया। इसी जांच के तहत शुक्रवार को टीम हमीदिया अस्पताल पहुंची। टीम ने अस्पताल के अलग-अलग स्थानों पर जाकर घटनाक्रम से जुड़े पहलुओं की अपने स्तर पर जांच की। मीडिया से बनाई दूरी, नहीं दी जांच की जानकारी
जांच के दौरान टीम के सदस्य अस्पताल में अलग-अलग जगहों पर जाकर निरीक्षण करते नजर आए। हालांकि, इस दौरान जांच टीम ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और जांच से जुड़ी कोई जानकारी साझा नहीं की। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किया गया बल प्रयोग निर्धारित परिस्थितियों के अनुरूप था या आवश्यकता से अधिक। वाटर कैनन चलने के बाद कमला पार्क के सामने सड़क पर बैठे छात्र
आंदोलन के पहले दिन हमीदिया अस्पताल परिसर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस-प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद छात्रों का गुस्सा बढ़ गया और वे कमला पार्क के सामने वाली सड़क पर धरने पर बैठ गए थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस-प्रशासन के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। तीन दिन चला प्रदर्शन, स्टाइपेंड बढ़ाने की थी मांग
मेडिकल इंटर्न छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर 7 से 9 सितंबर तक तीन दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया था। छात्रों को पहले ₹14,337 प्रति माह स्टाइपेंड मिलता था। आंदोलन के तीसरे और अंतिम दिन 9 सितंबर को उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ हुई बैठक के बाद सरकार ने स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी। इसके बाद स्टाइपेंड बढ़कर करीब ₹21,500 प्रति माह हो गया।

