मिड डे मील में कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू:आरोप छात्रों से प्रिंसिपल कहते हैं- शिकायत की तो केस कर देंगे, देशभर के कई राज्यों के मामले

मिड डे मील में कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू:आरोप छात्रों से प्रिंसिपल कहते हैं- शिकायत की तो केस कर देंगे, देशभर के कई राज्यों के मामले

एमपी के छिंदवाड़ा के मानेगांव में स्कूली बच्चों के मध्यान भोजन यानी मिड डे मील में खाने की गुणवत्ता, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्कूल का वीडियो सामने आया है जिसमें स्टूडेंट्स को कच्चे आलू खिलाए जा रहे थे जिनकी क्वालिटी भी बेहद खराब थी। मिड डे मील की ग्रामीणों ने शिकायत की थी मानेगांव के इस स्कूल में बच्चों को खराब खाना मिलने की शिकायत ग्रामीणों ने की थी कि बच्चों को स्कूल में बेहद घटिया क्वालिटी का खाना दिया जा रहा है। मिड डे मील बनाने वाली वर्कर ने प्रिंसिपल की शिकायत भी की है। उनका कहना है कि प्रिंसिपल मेडम हमें कोई भी राशन उपलब्ध नहीं करवाती हैं जिससे हम अच्छा और जरूरत के मुताबिक खाना बना सकें। प्रिंसिपल के मुताबिक स्कूल में मिड डे मील बनाने की व्यवस्था स्कूल प्रबंधन ही देखता है इसीलिए हम खाने में क्वालिटी बेहतर हो इसका ध्यान रखते हैं। कहीं खाने में बाल, कीड़े आते हैं इसी हफ्ते डिंडौरी विकासखंड के देवरी मिंगडी एकीकृत माध्यमिक स्कूल में बच्चों को मैन्यू के मुताबिक मध्यान्ह भोजन नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई थी। छात्राओं ने खाने की क्वालिटी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कभी-कभी खाने में बाल और कीड़े भी मिलते हैं। बुधवार को स्कूल में कढ़ी-चावल परोसे गए थे। रसोइयों से पूछने पर उनका कहना था कि जैसा राशन मिलता है, उसी के अनुसार भोजन बनाया जाता है। यूपी के हमीरपुर के स्कूल का भी वीडियो वायरल 7 सितंबर को यूपी के हमीरपुर में बच्चे चावल और दाल का पानी खाते नजर आए। बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर केवल चावल, हल्दी, जीरा और पानी परोसे जाने का वीडियो और मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें सब्जी या दाल की जगह केवल हल्दी-पानी जैसा घोल मिलने के आरोप लगे। इससे पहले भी पूनिया देवली गांव के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 27 छात्र बीमार पड़ गए थे। बच्चों ने जी मिचलाने, उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की थी। प्रिंसिपल- शिकायत की तो, केस कर देंगे गुरुवार 10 सितंबर को बिहार के चाकंद ग्राम में उर्दू मध्य विद्यालय अमराहा के छात्रों ने खराब मिड डे मील के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। छात्रों का आरोप है कि मिड डे मील की क्वालिटी बहुत ज्यादा खराब है। स्कूल में शिकायत करने पर प्रिंसिपल कहते हैं कि ‘खाना है तो खाओ, वर्ना घर चले जाओ’ । साथ ही बच्चों को धमकाया जाता है कि अगर कहीं शिकायत की तो केस कर देंगे।
बिहार में कहीं नमक की जगह डिटर्जेंट, कहीं सब्जी में कीड़े बीते हफ्ते बिहार के सिर्फ अरवल जिले के सदर प्रखंड के करीब 75 सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए गए खाने में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई थी। खाने में कीड़े देखकर बच्चों ने खाना खाने से इंकार कर दिया था। कई जगहों पर प्लेटों में रखा खाना बच्चों ने फेंक दिया। स्कूल में खाना परोसने के दौरान कई स्कूलों में सब्जी के अंदर छोटे-छोटे सफेद कीड़े दिखाई दिए। खाने में कीड़े देखने के बाद शिक्षा विभाग में शिकायत की गई। बिहार के नालंदा में स्कूल में मिड डे मील में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर मिलाने की खबर सामने आई थी। मिड-डे-मील खाने के बाद 34 बच्चों के बीमार पड़े थे और जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह को निलंबित कर दिया था। राजस्थान में गंदे कंटेनर में खाना जोधपुर के कुछ सरकारी स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे मिड-डे मील का वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें बच्चों के लिए लाए जा रहे खाने के बर्तन (ड्रम) बेहद गंदे और खाना (रोटियां व सब्जियां) खराब व जली हुई स्थिति में थीं। मामले के तूल पकड़ने और वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया था। केंद्र सरकार के मुताबिक मिड डे मील का फॉर्मेट मिड-डे मील का साप्ताहिक मैन्यु और खाने की मात्रा राज्य सरकार और केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक तय किया जाता है। देशभर में 10.35 लाख से ज्यादा सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल हैं जहां रोज लगभग 8.5 करोड़ बच्चे स्कूल में मिड डे मील खाते हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें..
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