नीता को जिताकर भाजपा ने चला यादव कार्ड:झांसी ननि कार्यकारिणी चुनाव में रितिका तिवारी की हार से अब सवर्ण नाराजगी की चर्चा

नीता को जिताकर भाजपा ने चला यादव कार्ड:झांसी ननि कार्यकारिणी चुनाव में रितिका तिवारी की हार से अब सवर्ण नाराजगी की चर्चा

झांसी नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में भाजपा की बागी प्रत्याशी नीता विकास यादव की जीत ने पार्टी के अंदर की सियासत के साथ आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरणों को भी चर्चा में ला दिया है। जिन नीता यादव को भाजपा ने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में जगह नहीं दी थी, उन्हीं के पक्ष में पार्टी पार्षदों ने मतदान कर उन्हें चुनाव जिता दिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की आगामी विधानसभा चुनाव की सोशल इंजीनियरिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले 2 तस्वीर देखिए… दरअसल, कार्यकारिणी चुनाव के लिए भाजपा ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें नीता विकास यादव का नाम नहीं था। करीब 30 साल से भाजपा से जुड़ीं नीता यादव ने इसके बाद बगावती तेवर अपना लिए। उन्होंने विपक्षी पार्षदों के साथ मिलकर नामांकन दाखिल किया। उनके नामांकन में भाजपा की ही पार्षद ममता सुगरपाल प्रस्तावक बनीं। इससे चुनाव का पूरा गणित बदल गया और जिन प्रत्याशियों को निर्विरोध चुने जाने की उम्मीद थी, उनके सामने मुकाबले की स्थिति बन गई। मान-मनौव्वल से लेकर मतदान तक चला मंथन
नीता के बगावती तेवर की जानकारी भाजपा के बड़े नेताओं तक पहुंची तो उन्हें मनाने की कोशिशें शुरू हुईं। हालांकि, वह अपना नामांकन वापस लेने को तैयार नहीं हुईं। ऐसे में कार्यकारिणी चुनाव में मतदान की स्थिति बन गई। मतदान के दौरान सदर विधायक रवि शर्मा, एमएलसी डॉ. बाबूलाल तिवारी और एमएलसी रमा आरपी निरंजन भी नगर निगम पहुंचीं। यहां काफी देर तक पार्टी नेताओं और पार्षदों के बीच मंथन चलता रहा। इसके बाद ऐन वक्त पर भाजपा की रणनीति बदलती नजर आई। एक तरफ पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी थीं तो दूसरी तरफ पार्टी से बगावत कर मैदान में उतरीं नीता विकास यादव। आखिरकार भाजपा पार्षदों का समर्थन नीता यादव के पक्ष में गया और वह चुनाव जीत गईं। खास बात यह रही कि नीता के साथ उनके भाई रामजी यादव भी कार्यकारिणी तक पहुंच गए। पिछड़े-दलित के साथ यादव वोट पर भी नजर भाजपा की इस रणनीति को अब आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले पार्टी ने पिछड़े और एससी/एसटी वर्ग से आने वाले चेहरों को नगर निगम में नामित सभासद बनाया था। अब कार्यकारिणी चुनाव में यादव समाज से आने वाली नीता विकास यादव को जीत दिलाने के फैसले को भी इसी सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। झांसी सदर विधानसभा में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 20 हजार मानी जाती है। ऐसे में संख्या के लिहाज से बहुत बड़ा वोट बैंक नहीं होने के बावजूद चुनावी मुकाबला करीबी होने पर यादव वोट निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि नीता यादव को कार्यकारिणी में जीत दिलाने के फैसले को यादव समाज के बीच राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। रितिका की हार से सवर्ण नाराजगी की चर्चा एक तरफ भाजपा ने बागी प्रत्याशी नीता विकास यादव और उनके भाई रामजी यादव को कार्यकारिणी तक पहुंचाया, वहीं दूसरी ओर पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। रितिका कार्यकारिणी चुनाव में एकमात्र सवर्ण पार्षद थीं। चुनाव परिणाम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने पार्टी के फैसले पर नाराजगी जताई और कहा कि चुनाव में सवर्णों के साथ भेदभाव हो रहा है। उन्होंने खास तौर पर ब्राह्मण समाज की अनदेखी का मुद्दा उठाया।
रितिका के इस बयान के बाद भाजपा के परंपरागत सवर्ण समर्थक वर्ग में भी नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई। अब राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि यादव समेत पिछड़े और दलित वर्गों को साधने की कोशिश के बीच भाजपा सवर्ण समाज के बीच उठ रही नाराजगी को कैसे संभालेगी। यादव को साधने के चक्कर में सवर्ण नाराज न हो जाएं
कार्यकारिणी चुनाव का परिणाम भाजपा के लिए दोहरे राजनीतिक संदेश लेकर आया है। एक तरफ पार्टी ने नीता यादव को समर्थन देकर यादव समाज को संदेश देने की कोशिश की है, वहीं अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी की हार ने सवर्ण प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झांसी सदर विधानसभा में भाजपा के लिए चुनौती अब केवल नए सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने की नहीं, बल्कि अपने परंपरागत सवर्ण समर्थक वर्ग को भी साथ बनाए रखने की होगी। ऐसे में नगर निगम कार्यकारिणी का यह चुनाव आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग बनाम कोर वोटर के संतुलन की पहली बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, भाजपा की ओर से कार्यकारिणी चुनाव में नीता यादव को समर्थन देने को विधानसभा चुनाव की रणनीति या यादव वोट को साधने की कवायद के तौर पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *