पूर्व यूडीएच मंत्री व कोटा उत्तर से विधायक शांति धारीवाल ने स्थानीय निकाय चुनाव, कोटा नगर निगम की स्थिति और हाल ही में मुख्यमंत्री के कोटा में रोड शो को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनना तय है। धारीवाल ने मुख्यमंत्री के कोटा दौरे को पूरी तरह ‘फ्लॉप’ करार देते हुए कहा कि उसमें केवल 400-500 कार्यकर्ता और पुलिसकर्मी ही मौजूद थे। उन्होंने माना कि बागियों से चुनाव में नुकसान भी होगा। सवाल: सबसे पहले तो निकाय चुनाव को लेकर क्या रुख लग रहा है इस बार? धारीवाल: मुझे ऐसा लगता है कि जनता ने मन बना लिया है और अब कांग्रेस का बोर्ड बनाना चाहती है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली उन्होंने देख ली, निगम की कार्यशैली देख ली। इन्होंने कुछ नहीं किया है, कोई समस्या का निराकरण नहीं किया। और तो और, पट्टे बांटने के लिए आसानी से हमने जो कानून बनाया था, जिससे फौरन पट्टा मिल जाता था, उसके बजाय ये पट्टे बांटने के शिविर लगाते हैं। शिविर लगाते हैं और आदमी को इधर से उधर दौड़ाते हैं। अफसर कहता है वहां जाओ, वो कहता है वहां जाओ। आदमी परेशान होकर घर चला जाता है। निगम के मार्फत जो काम होने चाहिए, शहर में चाहे हरियाली हो, चाहे सफाई हो, चाहे रोशनी का इंतजाम हो, चाहे फुटपाथ अच्छे हों ताकि पैदल चलने वालों को राहत मिल सके, लेकिन ऐसा कुछ दिखा नहीं। सवाल- पिछली बार कांग्रेस का बोर्ड बना था, वार्डों में कई विकास के काम की बात भी हुई, लेकिन आज भी आम लोगों के बीच जाते हैं तो नाली, सफाई जैसी समस्याएं लोग बताते हैं? धारीवाल: कांग्रेस का बोर्ड जब था तो खूब काम हुए। हर वार्ड में काम हुए और समस्याओं का निराकरण भी हाथों-हाथ होता था। शिकायतें तो बनती रहती हैं, क्योंकि समस्याएं तो आज एक का निपटारा किया तो कल दूसरी सामने आ जाएगी। लेकिन कांग्रेस के टाइम पर ये कभी शिकायत नहीं आती थी। किसी आदमी को एक महीने तक चक्कर लगाना पड़ रहा है और उसका काम नहीं हो रहा है। हजारों-लाखों पट्टे बांटे हमने कोटा में, हजारों लोगों को मालिकाना हक दिया। कई काम किए। सवाल: सीएम का दौरा कोटा में रहा है। क्या लगता है, कोई रुख बदलेगा या क्या नजर आ रहा है? धारीवाल: अब सीएम साहब का दौरा तो ताज्जुब की बात है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री यहां पर आए और उनके दौरे में कुल मिलाकर 400-500 कार्यकर्ता शामिल हों। बाकी तो पुलिस वाले थे, सिविल ड्रेस में, सादा ड्रेस में पुलिस वाले शामिल हो गए। ऐसे करके कुल 700-800 की भीड़ हुई और 40 मिनट में पूरी 3 किलोमीटर की यात्रा निपटा दी। तो वो दौरा क्या था? कुछ नहीं था, वो तो नुक्कड़ सभा की उन्होंने। बिल्कुल फेलियर था। कोटा के लिए कुछ नहीं किया, कुछ नहीं कहा उन्होंने कि निगम को हम और मजबूत करेंगे। सरकार का दायित्व यह बनता है कि वो बताए कि निगम को मजबूत करने के लिए क्या करेंगे ताकि लोगों की समस्याओं का निराकरण फौरन हो। उसके बारे में कुछ नहीं कहा, इधर-उधर की बातें करके चले गए। उसका जनता में कोई इम्पैक्ट (असर) नहीं है। सवाल: यूडीएच मंत्री आप रहे हैं। निकायों का रोडमैप किस तरह से तैयार होना चाहिए? धारीवाल: निकायों को मजबूत करने के लिए जितने कानून हमने बनाए, जितने नियम हमने बदलकर उनको मजबूत करने का काम किया, वो आज तक किसी ने नहीं किया। निकायों को पूरे अधिकार दिए। लेकिन यहां तो प्रशासक बैठा दिए, प्रशासक क्या काम करेंगे? क्यों करेंगे? उनको तो नौकरी बजानी है। सवाल: कांग्रेस में टिकट वितरण के बाद काफी कार्यकर्ता नाराज दिख रहे हैं। इस पर क्या कहेंगे? धारीवाल: ये तो दोनों पार्टियों में है। इसमें कोई दो राय नहीं है। टिकटों के मामले में चाहे वो विधानसभा का टिकट बंट रहा हो, चाहे पार्षद का या प्रधान का, उसमें कुछ न कुछ नाइत्तेफाकी तो पैदा होती ही है। सवाल: तो क्या बागी मना लिए हैं धारीवाल: कुछ तो मान गए हैं और कुछ नहीं माने हैं तो चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों पार्टियों का हाल यही है। सवाल: बागी कांग्रेस को कोई नुकसान पहुंचा पाएंगे? धारीवाल: कई जगह नुकसान भी पहुंचाएंगे, नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है। सवाल: अब बोर्ड बनता है, तो महापौर का जब चुनाव होना होगा, तो आपको क्या लगता है कि जो चुने हुए पार्षद होंगे उसमें से ही महापौर चुना जाएगा या फिर ‘हाईब्रिड फॉर्मूले’ से महापौर तय हो सकता है? धारीवाल: कानून बना हुआ है। कई बार ऐसा होता है कि रिजर्वेशन के लिए तय कर लिया गया कि यह महिला ओबीसी की सीट है और वही मेयर बनेगी। लेकिन दोनों पार्टियों की कोई ओबीसी महिला जीती ही नहीं, या जीत भी गई तो वे उसे नहीं बनाना चाहते। इसीलिए हमने यह कानून बनाया कि कम से कम मेयर जो है, मेयर का सिलेक्शन दोनों पार्टियों में से जो भी करना चाहती है, जिसकी भी मेजोरिटी आती है, वह अच्छा हो। वह चाहे चुना हुआ पार्षद हो और चाहे बाहर से लाकर जिसे वे चुनाव लड़ाना चाहते हैं अच्छे मेयर के रूप में, वह हो। इसलिए हमने यह किया। सवाल: टिकट को लेकर जयपुर में जो बैठक हुई थी वहां पर्यवेक्षकों के ऊपर फाइलें तक उठा दी गईं। क्या कोई विवाद रहा था? धारीवाल: बिल्कुल गलत है, सारी झूठी बात है! बिल्कुल झूठी बात है। पर्यवेक्षक जो मैडम आई थीं उनके सामने किसी भी प्रकार का कोई झगड़ा नहीं हुआ। न कोई फाइल फेंकी गई, न कुछ किया गया। उन्होंने मीटिंग बुलाई, मीटिंग में जो उपस्थित थे उन्होंने बड़े आराम से, तसल्ली से अपनी-अपनी बात कही और बात करके फैसला कर दिया। कोई दिक्कत ही नहीं है। सवाल: गुंजल साहब से कोई अभी भी अदावत चल रही है? वे 20-30 परसेंट सीटों की मांग कर रहे थे, लेकिन आपका यह कहना था कि विधानसभा-वाइज सीट दी जाए? धारीवाल: सुनने में ऐसा आया था कि साहब उन्होंने कुछ परसेंटेज मांगी थी, लेकिन वह गलत है। कभी ऐसा होता नहीं है कि परसेंटेज मिले, ऐसा नहीं होता है। चूज किया जाता है जीतने वाला उम्मीदवार कि कौन जीतेगा! सवाल: क्या इस बार भी पैनल बने थे? पैनल के थ्रू ही तय हुआ है? धारीवाल: नहीं, कोई पैनल नहीं हुआ, कोई पैनल नहीं बना। सिंगल-सिंगल नाम था सबका। सबका सिंगल-सिंगल नाम था, उन्हीं पर मुहर लगी है। बाकी जो यह खबर आई कि साहब फाइलें फेंक दी गईं और झगड़ा हुआ, कुछ नहीं हुआ। बिल्कुल गलत बात है। सवाल: विधानसभा-वाइज जो टिकट की बात आई थी कि अपने-अपने जो नेता हैं, वे सिंबल ले जाकर दे दें, उससे क्या फायदा लगता है? धारीवाल: उससे सिलेक्शन अच्छी तरह से कर सकते हैं। अब मैं कोटा उत्तर का विधायक हूँ, तो मुझे अगर जिम्मेदारी दी जाती है तो निश्चित तौर पर मैं जीतने वाले उम्मीदवारों को ही सिंबल दूँगा। सवाल- कहा जा रहा है कि कांग्रेस ही भाजपा का बोर्ड बनवाना चाहती है, कोटा में ओम शांति की बात प्रचारित हो रही है धारीवाल: यह सब मेरे खिलाफ वाले लोग प्रचारित करते हैं। उनके पास मेरे खिलाफ कुछ कहने के लिए तो है नहीं, इसलिए वे केवल ‘ओम शांति-ओम शांति’ करते रहते हैं। सवाल: नए बनने वाले मेयर और पार्षदों की क्या प्राथमिकताएं होनी चाहिए जिससे जनता को सीधा लाभ मिले? धारीवाल: जनता के प्रति समर्पित भावना होनी चाहिए और एक विजन होना चाहिए कि शहर को सुंदर कैसे बनाया जाए। काम करने की इच्छाशक्ति और समस्याओं के समाधान की समझ होनी चाहिए। अगर अच्छे विजन वाला व्यक्ति मेयर बनता है और पूरा वक्त देता है, तो निश्चित तौर पर प्रशासन अच्छा चलेगा।

