आगरा में दहेज हत्या के मामले में अदालत ने मृतका के पति, देवर, सास और ससुर को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। मामले में मृतका के पिता, मां और बहन अपनी पूर्व गवाही से मुकर गए। इस पर एडीजे-7 सुरजन सिंह ने तीनों के खिलाफ विधिक कार्रवाई के आदेश दिए।
मामला शमसाबाद थाने में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, सैंया थाना क्षेत्र के बीरई निवासी गोपाल सिंह ने अपनी दो बेटियों अंकिता और वंदना की शादी 1 मार्च 2025 को झारपुरा, शमसाबाद निवासी दो सगे भाइयों सोनू और मोनू से की थी। आरोप था कि ससुराल पक्ष दहेज में मोटरसाइकिल और एक लाख रुपए की मांग को लेकर दोनों बेटियों का उत्पीड़न करता था। मांग पूरी नहीं होने पर 21 अप्रैल 2025 को वादी की बेटी वंदना की हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बिना बताए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। गोपाल सिंह की तहरीर पर पुलिस ने पति सोनू, देवर मोनू, सास राम दुलारी और ससुर प्रकाशीराम के खिलाफ दहेज हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने जांच के बाद चारों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। दाह संस्कार हो जाने के कारण पुलिस शव बरामद नहीं कर सकी थी। मौके से केवल मृतका के शरीर की राख बरामद हुई थी। पोस्टमार्टम में भी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हो सका था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृतका के पिता गोपाल सिंह, मां विजय रानी और परिवार में रह रही उसकी सगी बहन वंदना अपनी पूर्व गवाही से मुकर गए। इसके बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और आरोपियों के अधिवक्ता रमेश चंद्रा की दलीलों को देखते हुए सोनू, मोनू, राम दुलारी और प्रकाशीराम को बरी करने के आदेश दिए। वहीं, पूर्व गवाही से मुकरने पर अदालत ने मृतका के पिता, मां और बहन के खिलाफ विधिक कार्रवाई के भी आदेश दिए।

