नालंदा- नवजात की हेराफेरी मामले में नवजीवन शिशु अस्पताल सील:कार्रवाई की भनक लगते ही संचालक ने हटाई महंगी मशीनें; अस्पताल में सिर्फ कुर्सी-मेज, दवाइयां

नालंदा- नवजात की हेराफेरी मामले में नवजीवन शिशु अस्पताल सील:कार्रवाई की भनक लगते ही संचालक ने हटाई महंगी मशीनें; अस्पताल में सिर्फ कुर्सी-मेज, दवाइयां

बिहार शरीफ शहर के कागजी मोहल्ला रोड (भैसासुर) स्थित बहुचर्चित नवजीवन शिशु अस्पताल पर आखिरकार प्रशासन का कड़ा डंडा चल ही गया। नवजात शिशु की कथित हेराफेरी और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में पटना उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन ने बुधवार को अस्पताल परिसर को पूरी तरह सीलबंद कर दिया। यह कार्रवाई जिला पदाधिकारी के निर्देश पर गठित तीन दंडाधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी पारदर्शिता के साथ वीडियोग्राफी कराते हुए की गई। हालांकि, सीलिंग के दौरान अस्पताल के भीतर की स्थिति देखकर प्रशासनिक टीम भी हैरान रह गई। अस्पताल के अंदर से सभी प्रमुख और जीवनरक्षक मेडिकल उपकरण पूरी तरह नदारद पाए गए। परिसर में केवल कुछ साधारण दवाइयां, टेबल, कुर्सियां, पंखे और एसी ही लगे मिले, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कार्रवाई की भनक लगते ही अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते तमाम कीमती और चिकित्सकीय उपकरण सुरक्षित स्थानों पर हटा दिए थे। नवजात बदलने के सनसनीखेज आरोप से शुरू हुआ था विवाद गौरतलब है कि 25 मार्च 2023 के 17 दिनों बाद नवजीवन शिशु अस्पताल में नवजात बच्चे की कथित अदला-बदली और गंभीर धांधली का मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया था। नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर साजिश रचते हुए बच्चे के हेरफेर का सीधा आरोप लगाया था। स्थानीय स्तर पर परिजनों के भारी हंगामे और लगातार विरोध के बावजूद जब मामले की लीपापोती का प्रयास दिखा, तो पीड़ित अविनाश कुमार ने न्याय की गुहार लगाते हुए पटना उच्च न्यायालय की शरण ली और याचिका (Cr.W.J.C. No. 3338/2025 अविनाश कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) दायर कर दी। मामले की तहकीकात में पुलिस अधीक्षक नालंदा ने महाधिवक्ता से परामर्श के बाद जिला प्रशासन को अस्पताल के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अनुशंसा की थी। हाईकोर्ट ने डीएम को दिए थे दो सप्ताह में कार्रवाई के निर्देश मामले की सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को नालंदा जिला प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया था। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित न्यायदृष्टांतों के आलोक में जिला पदाधिकारी, नालंदा को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दो सप्ताह के भीतर विधिसम्मत एवं सख्त आदेश पारित करने का हुक्म सुनाया था। उच्च न्यायालय की इस तल्ख टिप्पणी के बाद समाहरणालय की विधि शाखा हरकत में आ गई। जिला पदाधिकारी ने 17 अगस्त को ज्ञापांक 2710/विधि के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई। जांच समिति की रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी नालंदा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के औपबंधिक निबंधन संख्या 138/2026 को 29 अगस्त को ही रद्द कर दिया था, जिसे शुद्धि पत्र के जरिए दुरुस्त करते हुए अस्पताल को तत्काल सील करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई थी। दंडाधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई जब्ती जिला पदाधिकारी के पत्रांक 2887/विधि दिनांक 2 सितंबर के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ ने 3 सितंबर को ज्ञापांक 1345/गो० के जरिए सीलिंग के लिए त्रिस्तरीय दंडाधिकारियों की तैनाती की थी। इसमें बिहार शरीफ के अंचल अधिकारी लखेंद्र कुमार को वरीय दंडाधिकारी बनाया गया, जबकि मनरेगा के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी संजय कुमार और श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सतीश कुमार सिंह को सहयोगी दंडाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। बुधवार को यह प्रशासनिक दल बिहार थाने की महिला एवं पुरुष पुलिस बल के साथ कागजी मोहल्ला रोड स्थित नवजीवन शिशु अस्पताल पहुंचा और परिसर को कब्जे में लेकर मुख्य द्वार को सील कर दिया। सीओ बोले- मेडिकल उपकरण नदारद, कोर्ट को भेजी जाएगी जब्ती सूची कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे वरीय दंडाधिकारी सह अंचलाधिकारी लखेंद्र कुमार ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश और जिला पदाधिकारी के निर्देशानुसार अस्पताल को सील करने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने खुलासा किया कि अस्पताल पहुंचने पर वहां मेडिकल से जुड़े आवश्यक उपकरण नहीं पाए गए, केवल कुछ बुनियादी दवाइयां, फर्नीचर, पंखे और एसी ही मिले। मौके पर जो भी सामग्री मिली है, उसकी विस्तृत जब्ती सूची तैयार कर ली गई है। यह पूरी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को सौंपने के साथ ही माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष भी प्रस्तुत की जाएगी। वहीं अस्पताल से उपकरणों के अचानक गायब होने के बिंदु पर भी प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए अंदरूनी जांच शुरू कर दी है कि सीलिंग की भनक पाकर कब और कैसे मशीनों को हटाया गया। इस कार्रवाई के बाद से शहर में अवैध और मानकों की अनदेखी कर चल रहे निजी क्लीनिकों व अस्पतालों में जबरदस्त हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। बिहार शरीफ शहर के कागजी मोहल्ला रोड (भैसासुर) स्थित बहुचर्चित नवजीवन शिशु अस्पताल पर आखिरकार प्रशासन का कड़ा डंडा चल ही गया। नवजात शिशु की कथित हेराफेरी और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में पटना उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन ने बुधवार को अस्पताल परिसर को पूरी तरह सीलबंद कर दिया। यह कार्रवाई जिला पदाधिकारी के निर्देश पर गठित तीन दंडाधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी पारदर्शिता के साथ वीडियोग्राफी कराते हुए की गई। हालांकि, सीलिंग के दौरान अस्पताल के भीतर की स्थिति देखकर प्रशासनिक टीम भी हैरान रह गई। अस्पताल के अंदर से सभी प्रमुख और जीवनरक्षक मेडिकल उपकरण पूरी तरह नदारद पाए गए। परिसर में केवल कुछ साधारण दवाइयां, टेबल, कुर्सियां, पंखे और एसी ही लगे मिले, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कार्रवाई की भनक लगते ही अस्पताल प्रबंधन ने समय रहते तमाम कीमती और चिकित्सकीय उपकरण सुरक्षित स्थानों पर हटा दिए थे। नवजात बदलने के सनसनीखेज आरोप से शुरू हुआ था विवाद गौरतलब है कि 25 मार्च 2023 के 17 दिनों बाद नवजीवन शिशु अस्पताल में नवजात बच्चे की कथित अदला-बदली और गंभीर धांधली का मामला सामने आने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया था। नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर साजिश रचते हुए बच्चे के हेरफेर का सीधा आरोप लगाया था। स्थानीय स्तर पर परिजनों के भारी हंगामे और लगातार विरोध के बावजूद जब मामले की लीपापोती का प्रयास दिखा, तो पीड़ित अविनाश कुमार ने न्याय की गुहार लगाते हुए पटना उच्च न्यायालय की शरण ली और याचिका (Cr.W.J.C. No. 3338/2025 अविनाश कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य) दायर कर दी। मामले की तहकीकात में पुलिस अधीक्षक नालंदा ने महाधिवक्ता से परामर्श के बाद जिला प्रशासन को अस्पताल के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अनुशंसा की थी। हाईकोर्ट ने डीएम को दिए थे दो सप्ताह में कार्रवाई के निर्देश मामले की सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को नालंदा जिला प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया था। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित न्यायदृष्टांतों के आलोक में जिला पदाधिकारी, नालंदा को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए दो सप्ताह के भीतर विधिसम्मत एवं सख्त आदेश पारित करने का हुक्म सुनाया था। उच्च न्यायालय की इस तल्ख टिप्पणी के बाद समाहरणालय की विधि शाखा हरकत में आ गई। जिला पदाधिकारी ने 17 अगस्त को ज्ञापांक 2710/विधि के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई। जांच समिति की रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी नालंदा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के औपबंधिक निबंधन संख्या 138/2026 को 29 अगस्त को ही रद्द कर दिया था, जिसे शुद्धि पत्र के जरिए दुरुस्त करते हुए अस्पताल को तत्काल सील करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई थी। दंडाधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई जब्ती जिला पदाधिकारी के पत्रांक 2887/विधि दिनांक 2 सितंबर के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ ने 3 सितंबर को ज्ञापांक 1345/गो० के जरिए सीलिंग के लिए त्रिस्तरीय दंडाधिकारियों की तैनाती की थी। इसमें बिहार शरीफ के अंचल अधिकारी लखेंद्र कुमार को वरीय दंडाधिकारी बनाया गया, जबकि मनरेगा के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी संजय कुमार और श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सतीश कुमार सिंह को सहयोगी दंडाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। बुधवार को यह प्रशासनिक दल बिहार थाने की महिला एवं पुरुष पुलिस बल के साथ कागजी मोहल्ला रोड स्थित नवजीवन शिशु अस्पताल पहुंचा और परिसर को कब्जे में लेकर मुख्य द्वार को सील कर दिया। सीओ बोले- मेडिकल उपकरण नदारद, कोर्ट को भेजी जाएगी जब्ती सूची कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे वरीय दंडाधिकारी सह अंचलाधिकारी लखेंद्र कुमार ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश और जिला पदाधिकारी के निर्देशानुसार अस्पताल को सील करने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने खुलासा किया कि अस्पताल पहुंचने पर वहां मेडिकल से जुड़े आवश्यक उपकरण नहीं पाए गए, केवल कुछ बुनियादी दवाइयां, फर्नीचर, पंखे और एसी ही मिले। मौके पर जो भी सामग्री मिली है, उसकी विस्तृत जब्ती सूची तैयार कर ली गई है। यह पूरी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को सौंपने के साथ ही माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष भी प्रस्तुत की जाएगी। वहीं अस्पताल से उपकरणों के अचानक गायब होने के बिंदु पर भी प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए अंदरूनी जांच शुरू कर दी है कि सीलिंग की भनक पाकर कब और कैसे मशीनों को हटाया गया। इस कार्रवाई के बाद से शहर में अवैध और मानकों की अनदेखी कर चल रहे निजी क्लीनिकों व अस्पतालों में जबरदस्त हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *