बैतूल में जादू-टोने के शक में बैंजो बजाने वाले बापूसिंह की हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) बैतूल की अदालत ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने रजनीकांत उर्फ रमन शर्मा (29), ऋषभ कपासे उर्फ रिशु (29) और विजेंद्र रैकवार उर्फ गाल्डी रैकवार (32) को दोषी माना है। मामले में एक आरोपी मंशाराम की पहले ही मौत हो चुकी है। जादू-टोना करवाने के शक में रची थी साजिश अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मंशाराम को बापूसिंह पर जादू-टोना करवाने का शक था। इसी शक के चलते बापूसिंह की हत्या की साजिश रची गई। बापूसिंह कार्यक्रमों में बैंजो बजाने का काम करता था। आरोपियों ने बैंजो बजाने के बहाने उसे सफेद कार में बैठाया और अपने साथ ले गए। रास्ते में उसके साथ मारपीट की गई और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी गई। शव कार की डिक्की में रखकर सड़क किनारे फेंका हत्या के बाद आरोपियों ने बापूसिंह के शव को कार की डिक्की में रख दिया। इसके बाद वे शव को बैतूल के खेड़ी इलाके की ओर ले गए और सड़क किनारे फेंककर चले गए। एक फॉरेस्ट गार्ड की नजर शव पर पड़ी तो उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। बाद में मृतक के भाई और बेटे ने शव की पहचान बापूसिंह के रूप में की। 8 मार्च को घर से निकला था, फिर नहीं लौटा बापूसिंह ग्राम कुसरीढाना, छाबड़ी का रहने वाला था और कार्यक्रमों में बैंजो बजाता था। वह 8 मार्च 2020 की सुबह करीब 10:30 बजे घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। उसकी पत्नी रंती बाई ने 11 मार्च 2020 को छिंदवाड़ा जिले के लावाघोगरी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान सामने आया कि तीन लोग सफेद कार से आए थे। उन्होंने बापूसिंह से बातचीत की और उसे कार में बैठाकर अपने साथ ले गए थे। रस्सी और आल्टो कार जब्त की गई मामले में कोतवाली बैतूल पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में केस दर्ज किया था। तत्कालीन कोतवाली टीआई राजेंद्र धुर्वे और संगीता उइके के कार्यकाल में पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई सूत की रस्सी और आल्टो कार जब्त की थी। कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा अदालत ने तीनों आरोपियों को धारा 302/120बी भादवि में आजीवन कारावास और 2-2 हजार रुपए जुर्माना, धारा 364/120बी में 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 201 भादवि में 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास और 500-500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एससी/एसटी एक्ट शशिकांत नागले ने पैरवी की।

