उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति समेत 12 मांगों को लेकर धरना:DM को सौंपा ज्ञापन, मुजफ्फरपुर में अल्पसंख्यक अधिकार मंच का प्रदर्शन

उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति समेत 12 मांगों को लेकर धरना:DM को सौंपा ज्ञापन, मुजफ्फरपुर में अल्पसंख्यक अधिकार मंच का प्रदर्शन

मुजफ्फरपुर में सोमवार को अल्पसंख्यक अधिकार मंच ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एक दिन का धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन विभिन्न मांगों को लेकर हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अब्दुल गफ्फार ने की, जबकि मंच के जिला संयोजक मो. अखलाक अंसारी ने इसका संचालन किया। प्रदर्शन के आखिर में मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्री मांगों का एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। अब्दुल गफ्फार ने कहा कि हर विभाग में उर्दू अनुवादकों की भर्ती होनी चाहिए। साथ ही, हर स्कूल में उर्दू शिक्षकों की पक्की नियुक्ति की जाए। उन्होंने मदरसों में आधुनिक, तकनीकी और रोजगार दिलाने वाली शिक्षा व्यवस्था लागू करने और हर जिले में अल्पसंख्यक छात्रावास बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। युवाओं के अधिकारों पर फहद जमा ने मांग उठाई कि अल्पसंख्यक युवाओं पर दर्ज मामलों को जल्दी निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि अदालत से निर्दोष बरी हुए युवाओं को फिर से बसाने, रोजगार देने और मुआवजा देने की जिम्मेदारी उन एजेंसियों या लोगों की तय होनी चाहिए, जिन्होंने उन्हें झूठे मामलों में फंसाया था। सरकार समस्याओं को अनदेखा कर रही शाहनवाज हुसैन ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े अहम मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि वे अल्पसंख्यक समुदाय की असली समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें अनदेखा कर रही हैं। वक्ताओं ने वक्फ संशोधन विधेयक-2025 को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने वक्फ संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाने और वक्फ की कुल आय का आधा हिस्सा गरीब अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने की भी जोरदार मांग की। इसके साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने और विकास के नाम पर मिलने वाले फंड के गलत इस्तेमाल को रोकने की अपील की गई।
भड़काऊ भाषण देने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग अधिवक्ता एएन गनी ने सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के आलोक में मुसलमानों को आरक्षण देने और भड़काऊ भाषण देने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। एसएफआई (SFI) के जिला संयोजक आरिफ हुसैन ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, अल्पसंख्यकों को शिक्षा, सुरक्षा और सत्ता में समान भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।
ऐडवा (AIDWA) की जिला अध्यक्ष नमिता सिंह ने दिल्ली के साकेत थाने में दो महिला मुस्लिम पत्रकारों के साथ हुई कथित पुलिस बर्बरता की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए दोषी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की।
प्रदर्शन में सीपीएम नेता सूरज कुमार सिंह, DYFI के संतोष कुमार यादव, भीम आर्मी के सुनील राम, सीपीएम जिला मंत्री दिनेश भगत, निखत प्रवीण, मो. हसनुद्दीन, सलेहा प्रवीण, रौशन खातून, समीना खातून, युसूफ अंसारी, अधिवक्ता महेंद्र राय सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संयोजकों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। मुजफ्फरपुर में सोमवार को अल्पसंख्यक अधिकार मंच ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एक दिन का धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन विभिन्न मांगों को लेकर हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अब्दुल गफ्फार ने की, जबकि मंच के जिला संयोजक मो. अखलाक अंसारी ने इसका संचालन किया। प्रदर्शन के आखिर में मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्री मांगों का एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। अब्दुल गफ्फार ने कहा कि हर विभाग में उर्दू अनुवादकों की भर्ती होनी चाहिए। साथ ही, हर स्कूल में उर्दू शिक्षकों की पक्की नियुक्ति की जाए। उन्होंने मदरसों में आधुनिक, तकनीकी और रोजगार दिलाने वाली शिक्षा व्यवस्था लागू करने और हर जिले में अल्पसंख्यक छात्रावास बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। युवाओं के अधिकारों पर फहद जमा ने मांग उठाई कि अल्पसंख्यक युवाओं पर दर्ज मामलों को जल्दी निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि अदालत से निर्दोष बरी हुए युवाओं को फिर से बसाने, रोजगार देने और मुआवजा देने की जिम्मेदारी उन एजेंसियों या लोगों की तय होनी चाहिए, जिन्होंने उन्हें झूठे मामलों में फंसाया था। सरकार समस्याओं को अनदेखा कर रही शाहनवाज हुसैन ने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े अहम मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि वे अल्पसंख्यक समुदाय की असली समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें अनदेखा कर रही हैं। वक्ताओं ने वक्फ संशोधन विधेयक-2025 को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने वक्फ संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाने और वक्फ की कुल आय का आधा हिस्सा गरीब अल्पसंख्यक बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने की भी जोरदार मांग की। इसके साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने और विकास के नाम पर मिलने वाले फंड के गलत इस्तेमाल को रोकने की अपील की गई।
भड़काऊ भाषण देने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग अधिवक्ता एएन गनी ने सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों के आलोक में मुसलमानों को आरक्षण देने और भड़काऊ भाषण देने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। एसएफआई (SFI) के जिला संयोजक आरिफ हुसैन ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, अल्पसंख्यकों को शिक्षा, सुरक्षा और सत्ता में समान भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।
ऐडवा (AIDWA) की जिला अध्यक्ष नमिता सिंह ने दिल्ली के साकेत थाने में दो महिला मुस्लिम पत्रकारों के साथ हुई कथित पुलिस बर्बरता की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए दोषी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की।
प्रदर्शन में सीपीएम नेता सूरज कुमार सिंह, DYFI के संतोष कुमार यादव, भीम आर्मी के सुनील राम, सीपीएम जिला मंत्री दिनेश भगत, निखत प्रवीण, मो. हसनुद्दीन, सलेहा प्रवीण, रौशन खातून, समीना खातून, युसूफ अंसारी, अधिवक्ता महेंद्र राय सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संयोजकों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।  

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