शामली में गायक अंकित बालियान हत्याकांड की जांच अब सिर्फ शूटरों की तलाश तक सीमित नहीं है। पुलिस की पड़ताल में कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां हरियाणा से दिल्ली, पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड, पंजाब और बिहार तक जुड़ती नजर आ रही हैं। इसी जांच में एक कोडवर्ड सामने आया है- ‘बदबस जी-जेन’। पुलिस के अनुसार, इसका इस्तेमाल कथित तौर पर हथियारों की डिलीवरी और गिरोह से जुड़े लोगों के बीच संपर्क के लिए किया जाता था। ‘बदबस’ में चार शहरों का संकेत पुलिस जांच के मुताबिक ‘बदबस’ के अक्षरों को अलग-अलग शहरों के संकेत के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है। ‘ब’ से बरेली, ‘द’ से दिल्ली, दूसरे ‘ब’ से बहादुरगढ़ और ‘स’ से सोनीपत का संकेत माना जा रहा है। वहीं ‘जी-जेन’ का इस्तेमाल गिरोह से जुड़े युवाओं के लिए किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह कोड सिर्फ हथियारों की डिलीवरी तक सीमित था या गिरोह की दूसरी गतिविधियों के लिए भी ऐसे कोड इस्तेमाल किए जाते थे। सड़क किनारे-झाड़ियों में हथियार देने का तरीका पुलिस के अनुसार, कथित नेटवर्क में हथियार किसी एक तय ठिकाने पर नहीं दिए जाते थे। सड़क किनारे या झाड़ियों के आसपास हथियार पहुंचाने की बात सामने आई है। शूटर को पहले से कोडवर्ड बताया जाता था। मौके पर वही कोड बताने के बाद हथियार सौंपे जाने और एडवांस रकम दिए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है। इससे पुलिस को आशंका है कि हथियार सप्लायर और हथियार लेने वाले के बीच सीधा परिचय जरूरी नहीं था। कोड ही पहचान का जरिया बनता था। विदेश बैठे चिराग के सोशल मीडिया अकाउंट भी रडार पर जांच में विदेश में बैठे गिरोह से जुड़े बताए जा रहे चिराग के सोशल मीडिया अकाउंट भी पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस सोशल मीडिया चैट, अकाउंट और संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि अंकित हत्याकांड में हथियार किस चैनल से शूटरों तक पहुंचे। 4 महीने पहले चोरी कराते थे बाइक-कार, वारदात से पहले नंबर बदलते पुलिस को कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके को लेकर भी अहम जानकारी मिली है। जांच के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल होने वाली बाइक और कार करीब चार महीने पहले ही चोरी करा ली जाती थीं। शामली, मेरठ और आसपास के इलाकों से चोरी किए गए वाहनों का इस्तेमाल शूटरों की आवाजाही में किए जाने की बात सामने आई है। वारदात से कुछ मिनट पहले इन वाहनों की नंबर प्लेट बदलने की जानकारी भी जांच में मिली है। दूसरे जिले का नंबर लगाकर शूटर वारदात स्थल तक पहुंचते थे। पुलिस अब चोरी के वाहनों और उनके इस्तेमाल की कड़ियां भी खंगाल रही है। सोनीपत-बहादुरगढ़ पर सबसे ज्यादा फोकस एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जांच में सोनीपत और बहादुरगढ़ कथित हथियार सप्लाई के प्रमुख ठिकानों के रूप में सामने आए हैं। पुलिस बरेली में हथियार सप्लाई करने वाले मुख्य सप्लायर की भी तलाश कर रही है। जांच का दायरा सोनीपत, रोहतक, करनाल, हिसार, भिवानी, सिरसा और पानीपत से लेकर दिल्ली के सरोजनी नगर, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और देहरादून तक पहुंच गया है। पुलिस इन स्थानों पर कथित सप्लाई चेन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पानीपत के दो युवक हिरासत में, सत्यम-आर्यन की मदद का शक अंकित हत्याकांड में पुलिस ने पानीपत के दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। आशंका है कि दोनों ने फरार शूटर सत्यम और आर्यन को किसी स्तर पर मदद पहुंचाई हो। पूछताछ पूरी होने के बाद ही उनकी भूमिका स्पष्ट होगी। बिहार में भी मिले संभावित ठिकाने जांच में सत्यम कादयान और आर्यन संधू के पूर्णिया जिले के धमदाहा और नीरपुर गांव में रहने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, वहां एक युवती ने उनकी मदद की थी। युवती से पूछताछ की जा चुकी है और उसके परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है। बताया गया कि सत्यम और युवती की दोस्ती इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। आरोपियों के संभावित ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने पटना पुलिस से भी सहयोग मांगा है। अब जांच का सबसे बड़ा सवाल- सिर्फ शूटर या पूरा नेटवर्क? अंकित की हत्या के पीछे क्या सिर्फ दो शूटर थे या उन्हें हथियार, वाहन, ठिकाने और संपर्क उपलब्ध कराने वाला बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था? ‘बदबस जी-जेन’ कोडवर्ड, पहले से चोरी कराए गए वाहन और अलग-अलग राज्यों में सामने आ रहे संपर्क जांच को नए मोड़ पर ले जा रहे हैं। पुलिस अब उस कथित कड़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जहां से शूटरों को हथियार और वारदात के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाने का संदेह है।

