सोशल मीडिया पर ‘DM अंकल, मुझे साइकिल दिला दीजिए’ की गुहार और स्कूल जाते वीडियो से चर्चा में आई बलिया की दिव्यांग रागिनी के इलाज की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान लेने के बाद शनिवार को रागिनी के पैरों की नसों की जांच के लिए पीएचसी मनियर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. दिग्विजय कुमार उसकी मां बबीता देवी और अन्य परिजनों के साथ बीएचयू, वाराणसी पहुंचे। यहां चाइल्ड ऑर्थो स्पेशलिस्ट डॉ. शुभम श्रीवास्तव ने रागिनी की जांच की। BHU के डॉक्टर बोले- जांच में सब सामान्य सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय ने शनिवार रात करीब 9:30 बजे बताया कि बीएचयू में रागिनी की जांच की गई है और रिपोर्ट में सब सामान्य मिला है। अब एलिजरो तकनीक के माध्यम से उसके पैर का इलाज शुरू किया जाएगा। वाराणसी से टीम बलिया लौट रही है। डॉक्टर के बुलाने पर रागिनी को आगे के इलाज के लिए दोबारा वाराणसी ले जाया जाएगा। डीएम के निर्देश पर जिला अस्पताल से BHU तक पहुंची जांच रागिनी की कहानी सामने आने के बाद डीएम मंगला प्रसाद सिंह स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ 2 सितंबर को उसके गांव दिघेड़ा ग्राम पंचायत के रानीपुर पहुंचे थे। उन्होंने रागिनी की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लेने के बाद आवश्यक जांच कराने के निर्देश दिए थे। हायर सेंटर ले जाने की जिम्मेदारी पीएचसी मनियर के प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार को दी गई थी। इसके बाद जिला अस्पताल में ऑर्थो सर्जन डॉ. करण चौहान और डॉ. अजीत सिंह की टीम ने रागिनी के पैर की जांच की। डॉक्टरों ने बताया कि नसों की विस्तृत जांच के लिए जरूरी संसाधन जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद उसे BHU रेफर किया गया। बचपन की दुर्घटना में टूटी थी पैर की हड्डी परिजनों के अनुसार, बचपन में हुई दुर्घटना में रागिनी के एक पैर के पिछले निचले हिस्से की हड्डियां टूट गई थीं। हड्डियां सही तरीके से नहीं जुड़ सकीं। पैर को ठीक कराने के लिए तीन बार ऑपरेशन भी कराया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। रागिनी एक पैर के सहारे फुदक-फुदककर घर से करीब 400 मीटर दूर स्थित प्राथमिक विद्यालय पढ़ने जाती थी। उसका स्कूल जाने का वीडियो और संघर्षपूर्ण कहानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार तक पहुंचा। साइकिल से लेकर इलाज और पढ़ाई तक मदद को आगे आए लोग रागिनी को आवागमन में सुविधा देने के लिए कानपुर की एलिम्को कंपनी की टीम भी उसकी जांच कर चुकी है। डीएम के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर रागिनी के इलाज का पूरा खर्च प्रदेश सरकार उठाएगी। रागिनी की मदद के लिए कई समाजसेवी भी आगे आए हैं। ‘फिजिक्स वाला’ के नाम से चर्चित अलख पांडेय ने 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी है। बीएन इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक एवं सपा नेता नीरज सिंह गुड्डू ने उसकी पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा किया है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सबसे पहले 26 हजार रुपए की मदद भेजी थी। रागिनी का सपना डॉक्टर बनने का है। अब BHU की जांच और एलिजरो तकनीक से शुरू होने वाले इलाज के बाद उसके इस सपने को नई उम्मीद मिली है।

