सिद्धार्थनगर में जिला मुख्यालय के पास डॉ. संजय चौधरी हॉस्पिटल में शनिवार सुबह इलाज के दौरान दो साल की बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मां ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी पर इंजेक्शन की ज्यादा मात्रा देने का आरोप लगाया है। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। परिजन बच्ची का शव गोद में लेकर काफी देर तक अस्पताल परिसर में बैठे रहे। इंजेक्शन लगने के बाद हालत बिगड़ने का आरोप मृतका की पहचान जया के रूप में हुई है। वह कठेला समयमाता थाना क्षेत्र के कटेला गर्बी गांव की रहने वाली थी। मां के मुताबिक, शुक्रवार को जया को बुखार था। इसके बाद उसे डॉ. संजय चौधरी के अस्पताल लाया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने पांच दिन की दवा दी थी। परिजनों के अनुसार, एक दिन दवा देने के बाद भी बच्ची की हालत में सुधार नहीं हुआ। शनिवार सुबह उसे दोबारा अस्पताल लाया गया। मां का आरोप है कि अस्पताल में बच्ची को इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और इंजेक्शन की अधिक मात्रा देने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मां ने यह भी आरोप लगाया कि बच्ची की मौत के बाद डॉक्टर ने पर्ची फाड़कर डस्टबिन में फेंक दी। डॉक्टर बोले- पहले से चल रहा था इलाज आरोपों पर डॉ. संजय चौधरी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि बच्ची जन्म से दिव्यांग थी और गोरखपुर से मानसिक रोग की करीब 10 से 15 दवाएं पहले से ले रही थी। उनके अनुसार, शनिवार सुबह बच्ची को तेज बुखार की हालत में अस्पताल लाया गया था। उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची का पहले से इलाज चल रहा था और उसकी स्थिति को देखते हुए ही उपचार किया जा रहा था। उन्होंने इंजेक्शन के ओवरडोज के आरोपों पर अलग पक्ष रखा है। दो महीने पहले पिता की दुर्घटना में मौत परिजनों के मुताबिक, जया के पिता शैलेश की करीब दो महीने पहले चिल्हिया थाना क्षेत्र के महादेवा में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार पहले से ही सदमे में था। अब जया की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने संभाली स्थिति बच्ची की मौत के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। मृतका की मां और अन्य परिजन बच्ची का शव गोद में लेकर बैठे रहे और इलाज को लेकर सवाल उठाते रहे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। फिलहाल बच्ची की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। इंजेक्शन के ओवरडोज और इलाज में लापरवाही के परिजनों के आरोपों की पुष्टि जांच और चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

