कृष्ण जन्मोत्सव में पहुंचे देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज:बोले- जन्माष्टमी की सार्थकता तभी, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा

कृष्ण जन्मोत्सव में पहुंचे देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज:बोले- जन्माष्टमी की सार्थकता तभी, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर खगड़िया के शुभ लगन रिसोर्ट, रामचंदा में भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। परमपूज्य त्रिकालदर्शी परमसिद्ध विदेह संतश्री देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित समारोह में भजन-कीर्तन और भजन संध्या का आयोजन हुआ। इस दौरान पूरा परिसर श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा नजर आया। बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली समेत कई राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए। देर शाम तक ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा। ‘श्रीकृष्ण के बिना सनातन अधूरा’ भजन संध्या से पहले श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संतश्री देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण को साधु-संतों की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह आत्मा के बिना शरीर का कोई महत्व नहीं होता, उसी तरह भगवान श्रीकृष्ण के बिना सनातन और सनातन धर्मावलंबियों का महत्व भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म, सत्य और कर्तव्य का मार्ग दिखाया है। उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। संतश्री ने सनातन समाज से एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए संगठित रहने की अपील की। 6 दिसंबर 2026 को सनातनियों से मथुरा चलने की अपील की संतश्री ने अपने संबोधन में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के लिए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूर्ण सार्थकता तभी होगी, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को लेकर संत समाज ने 6 दिसंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है। संतश्री ने सनातन धर्मावलंबियों से उस दिन बड़ी संख्या में मथुरा पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने वहां ‘महाशौर्य दिवस’ मनाने की बात भी कही। औरंगजेब के आदेश का किया उल्लेख संतश्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महायोगी ब्रह्मलीन देवराहा बाबाजी महाराज के शिष्य होने के नाते उन्होंने चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. सच्चिदानंदजी सहित सनातन समाज से जुड़े लोगों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने कटरा केशव देव में भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में औरंगजेब के आदेश पर मंदिर तोड़कर वहां शाही ईदगाह का निर्माण कराया गया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से संत समाज का मन व्यथित है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के साथ ही सनातन धर्मावलंबियों का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पूर्ण रूप से सफल माना जाएगा। तीन-चार साल में भव्य मंदिर बनने का दावा संतश्री शिवनाथ दासजी महाराज ने इससे पहले 7 सितंबर 2023 को अयोध्या और 9 सितंबर 2023 को श्रीदेवराहा धाम सिअरुआ में भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर अपने विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने कहा था कि अयोध्या की तरह मथुरा और काशी भी मुक्त होंगे और भगवान अपने गर्भगृह में विराजमान होंगे। उन्होंने कहा था कि लगातार चर्चाओं और बैठकों के माध्यम से सहमति का रास्ता तैयार होगा। उनके अनुसार, तीन से चार वर्षों के भीतर अयोध्या की तर्ज पर कृष्ण जन्मभूमि पर कारसेवा होगी। इसमें देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के मथुरा पहुंचने और भव्य कृष्ण मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने की बात कही गई थी। भजन-कीर्तन से कृष्णमय हुआ माहौल जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान भजन-कीर्तन और भजन संध्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर भाव-विभोर नजर आए। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। पूरे परिसर में देर शाम तक धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। आयोजकों के अनुसार, बिहार के साथ-साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में पहुंचे। श्रद्धा, भक्ति और कृष्णमय वातावरण के बीच जन्माष्टमी महोत्सव चलता रहा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर खगड़िया के शुभ लगन रिसोर्ट, रामचंदा में भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। परमपूज्य त्रिकालदर्शी परमसिद्ध विदेह संतश्री देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित समारोह में भजन-कीर्तन और भजन संध्या का आयोजन हुआ। इस दौरान पूरा परिसर श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा नजर आया। बिहार के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली समेत कई राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए। देर शाम तक ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा। ‘श्रीकृष्ण के बिना सनातन अधूरा’ भजन संध्या से पहले श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संतश्री देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण को साधु-संतों की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह आत्मा के बिना शरीर का कोई महत्व नहीं होता, उसी तरह भगवान श्रीकृष्ण के बिना सनातन और सनातन धर्मावलंबियों का महत्व भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म, सत्य और कर्तव्य का मार्ग दिखाया है। उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। संतश्री ने सनातन समाज से एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए संगठित रहने की अपील की। 6 दिसंबर 2026 को सनातनियों से मथुरा चलने की अपील की संतश्री ने अपने संबोधन में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के लिए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूर्ण सार्थकता तभी होगी, जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को लेकर संत समाज ने 6 दिसंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है। संतश्री ने सनातन धर्मावलंबियों से उस दिन बड़ी संख्या में मथुरा पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने वहां ‘महाशौर्य दिवस’ मनाने की बात भी कही। औरंगजेब के आदेश का किया उल्लेख संतश्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महायोगी ब्रह्मलीन देवराहा बाबाजी महाराज के शिष्य होने के नाते उन्होंने चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. सच्चिदानंदजी सहित सनातन समाज से जुड़े लोगों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने कटरा केशव देव में भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में औरंगजेब के आदेश पर मंदिर तोड़कर वहां शाही ईदगाह का निर्माण कराया गया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से संत समाज का मन व्यथित है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के साथ ही सनातन धर्मावलंबियों का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पूर्ण रूप से सफल माना जाएगा। तीन-चार साल में भव्य मंदिर बनने का दावा संतश्री शिवनाथ दासजी महाराज ने इससे पहले 7 सितंबर 2023 को अयोध्या और 9 सितंबर 2023 को श्रीदेवराहा धाम सिअरुआ में भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर अपने विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने कहा था कि अयोध्या की तरह मथुरा और काशी भी मुक्त होंगे और भगवान अपने गर्भगृह में विराजमान होंगे। उन्होंने कहा था कि लगातार चर्चाओं और बैठकों के माध्यम से सहमति का रास्ता तैयार होगा। उनके अनुसार, तीन से चार वर्षों के भीतर अयोध्या की तर्ज पर कृष्ण जन्मभूमि पर कारसेवा होगी। इसमें देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के मथुरा पहुंचने और भव्य कृष्ण मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने की बात कही गई थी। भजन-कीर्तन से कृष्णमय हुआ माहौल जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान भजन-कीर्तन और भजन संध्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर भाव-विभोर नजर आए। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। पूरे परिसर में देर शाम तक धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। आयोजकों के अनुसार, बिहार के साथ-साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में पहुंचे। श्रद्धा, भक्ति और कृष्णमय वातावरण के बीच जन्माष्टमी महोत्सव चलता रहा।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *