ग्वालियर रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले ही सीटों के लिए मारामारी शुरू हो गई है। सितंबर के अंत में पितृपक्ष शुरू होने से लेकर दीवाली और छठ पूजा तक उत्तर और दक्षिण भारत की ओर जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में नो-रूम की स्थिति बन गई है। रेगुलर ट्रेनों के साथ रेलवे की स्पेशल ट्रेनें भी यात्रियों की भीड़ के सामने कम पड़ रही हैं। ऐसे में यात्रियों के पास अब तत्काल कोटे का विकल्प ही बचा है। हरिद्वार रूट पर रेगुलर-स्पेशल ट्रेनें फुल पितृपक्ष में गंगा स्नान और तर्पण के लिए हरिद्वार-ऋषिकेश जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। ग्वालियर से इस रूट पर चलने वाली उज्जैनी एक्सप्रेस, इंदौर-देहरादून एक्सप्रेस, कलिंग उत्कल एक्सप्रेस और योगनगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस में सीटें भर चुकी हैं। रेलवे की दुर्ग-हरिद्वार, हुबली-योगनगरी ऋषिकेश और बेंगलुरु-योगनगरी ऋषिकेश स्पेशल ट्रेनों में भी लंबी वेटिंग है। ये ट्रेनें सप्ताह में एक दिन चलती हैं, जिससे यात्रियों को सीमित विकल्प मिल रहे हैं। गया के लिए चंबल एक्सप्रेस ही सहारा 27 सितंबर से पितृपक्ष शुरू होगा। इस दौरान गयाजी में पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ग्वालियर से गया जाने वाली चंबल एक्सप्रेस फिलहाल सीधी ट्रेन का प्रमुख विकल्प है और इसमें अभी से सीटें फुल हो चुकी हैं। गया रूट पर अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए नई स्पेशल ट्रेन की घोषणा नहीं होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। मुंबई-पुणे के लिए भी टिकट मुश्किल गणेशोत्सव के चलते महाराष्ट्र जाने वाली ट्रेनों में भी सीटों की मांग बढ़ गई है। मुंबई और पुणे जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से पंजाब मेल, मंगला लक्षद्वीप, गोवा एक्सप्रेस और झेलम एक्सप्रेस में जगह मिलना मुश्किल हो गया है। नवरात्र में कटरा जाने वालों की भीड़ 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली शारदीय नवरात्रि के लिए वैष्णो देवी जाने वाले यात्रियों ने भी पहले से टिकट बुक कराए हैं। ग्वालियर से कटरा जाने वाली मालवा एक्सप्रेस और झेलम एक्सप्रेस में स्लीपर से लेकर थर्ड एसी तक वेटिंग 100 के पार पहुंच गई है।

