वित्तीय वर्ष 2025-26 में अररिया ने ₹1,594.60 करोड़ का निर्यात किया है। जिला-वार निर्यात आंकड़ों के अनुसार, अररिया बिहार में तीसरे स्थान पर है। इस उपलब्धि पर सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने जिले के किसानों, उद्यमियों, व्यापारियों और आम लोगों को बधाई दी है। सांसद प्रदीप सिंह ने कहा कि यह आंकड़ा दिखाता है कि अररिया अब सिर्फ एक सीमावर्ती जिला नहीं है। यह कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से उभरता आर्थिक केंद्र बन रहा है। उन्होंने बताया कि अररिया की पहचान खास तौर पर मखाना जैसे कृषि उत्पादों से जुड़ रही है। मेहनत का नतीजा है यह आंकड़ा – सांसद सांसद ने यह भी कहा कि चावल, मक्का और अन्य कृषि एवं खाद्य प्रसंस्कृत उत्पादों में भी जिले में बड़ी संभावनाएं हैं। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण जोगबनी-नेपाल व्यापार मार्ग अररिया की निर्यात क्षमता को नई दिशा दे सकता है। नेपाल समेत पड़ोसी बाजारों तक अच्छी कनेक्टिविटी का फायदा स्थानीय उत्पादकों और व्यापारियों को मिल सकता है। सांसद के अनुसार, ₹1,594.60 करोड़ का निर्यात सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह जिले के किसानों, छोटे-बड़े उद्यमियों और व्यापारिक समुदाय की मेहनत का नतीजा है। स्थानीय स्तर पर भी बढ़ेंगे रोजगार के मौके अब जरूरत है कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कोल्ड चेन और स्टोरेज की सुविधाएं मिलें। इससे उन्हें देश और विदेश के बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि मखाना समेत अन्य कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर खास ध्यान देना चाहिए। उनके निर्यात को बढ़ावा देने से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। उपलब्धि नई संभावनाओं की शुरुआत सांसद ने बताया कि वे अररिया को सीमांचल का प्रमुख निर्यात केंद्र और फूड प्रोसेसिंग हब बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कोशिशें जारी रखेंगे। आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयां, निर्यात सुविधाएं, अच्छी लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी और व्यापारिक ढांचे को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आखिर में कहा कि अररिया की यह उपलब्धि नई संभावनाओं की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि जिले के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत ब्रांड पहचान दिलाना होना चाहिए। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अररिया ने ₹1,594.60 करोड़ का निर्यात किया है। जिला-वार निर्यात आंकड़ों के अनुसार, अररिया बिहार में तीसरे स्थान पर है। इस उपलब्धि पर सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने जिले के किसानों, उद्यमियों, व्यापारियों और आम लोगों को बधाई दी है। सांसद प्रदीप सिंह ने कहा कि यह आंकड़ा दिखाता है कि अररिया अब सिर्फ एक सीमावर्ती जिला नहीं है। यह कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से उभरता आर्थिक केंद्र बन रहा है। उन्होंने बताया कि अररिया की पहचान खास तौर पर मखाना जैसे कृषि उत्पादों से जुड़ रही है। मेहनत का नतीजा है यह आंकड़ा – सांसद सांसद ने यह भी कहा कि चावल, मक्का और अन्य कृषि एवं खाद्य प्रसंस्कृत उत्पादों में भी जिले में बड़ी संभावनाएं हैं। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण जोगबनी-नेपाल व्यापार मार्ग अररिया की निर्यात क्षमता को नई दिशा दे सकता है। नेपाल समेत पड़ोसी बाजारों तक अच्छी कनेक्टिविटी का फायदा स्थानीय उत्पादकों और व्यापारियों को मिल सकता है। सांसद के अनुसार, ₹1,594.60 करोड़ का निर्यात सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। यह जिले के किसानों, छोटे-बड़े उद्यमियों और व्यापारिक समुदाय की मेहनत का नतीजा है। स्थानीय स्तर पर भी बढ़ेंगे रोजगार के मौके अब जरूरत है कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, कोल्ड चेन और स्टोरेज की सुविधाएं मिलें। इससे उन्हें देश और विदेश के बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि मखाना समेत अन्य कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर खास ध्यान देना चाहिए। उनके निर्यात को बढ़ावा देने से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। उपलब्धि नई संभावनाओं की शुरुआत सांसद ने बताया कि वे अररिया को सीमांचल का प्रमुख निर्यात केंद्र और फूड प्रोसेसिंग हब बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर कोशिशें जारी रखेंगे। आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयां, निर्यात सुविधाएं, अच्छी लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी और व्यापारिक ढांचे को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आखिर में कहा कि अररिया की यह उपलब्धि नई संभावनाओं की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि जिले के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत ब्रांड पहचान दिलाना होना चाहिए।

