शेखपुरा के अरियरी प्रखंड के ससबहना में शुक्रवार को आइसा और आरवाईए की ओर से छात्र-युवा संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-युवा शामिल हुए। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, बेरोजगारी, सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। देखें, मौके से आई तस्वीरें… छात्र आंदोलन को बताया बड़ी जीत आइसा के जिला सचिव मो. रिक्की खान और आरवाईए के जिला सचिव प्रवीण सिंह कुशवाहा ने कहा कि छात्र-नौजवानों के संघर्ष के दबाव में केंद्र सरकार को पीछे हटना पड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन और जंतर-मंतर पर कार्रवाई के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से हटने को वे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत मानते हैं। वक्ताओं ने कहा कि एकजुट छात्र-युवा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने अपनी मांगें रख सकते हैं। पटना आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का किया जिक्र वक्ताओं ने कहा कि 22 जुलाई को आइसा-आरवाईए के आह्वान पर पटना में राजभवन मार्च निकाला गया था। शिक्षा और भविष्य के सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों का भी उन्होंने जिक्र किया। नेताओं ने दावा किया कि आंदोलन के दबाव में छात्रों की रिहाई हुई और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने पड़े। पेपर लीक और बेरोजगारी पर चिंता कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, बेरोजगारी, सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे छात्र-युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने BPSC, BSSC और BPSSC समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। सरकारी स्कूलों को मजबूत करने की मांग वक्ताओं ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और कमजोर शैक्षणिक व्यवस्था का सबसे अधिक असर गरीब और मेहनतकश परिवारों के बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की महंगी शिक्षा वहन नहीं कर पाने वाले परिवारों के लिए सरकारी स्कूल सबसे बड़ा सहारा हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों को मजबूत करना जरूरी है। 6 सितंबर को पटना पहुंचने की अपील आइसा-आरवाईए नेताओं ने कहा कि शिक्षा, परीक्षा, रोजगार और स्कूल-कॉलेजों में सुधार के सवाल को लेकर राज्यभर में छात्र-युवा संवाद किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों और युवाओं से 6 सितंबर को पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल पहुंचकर इन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। कार्यक्रम में भाकपा माले अरियरी प्रखंड सचिव सह किसान नेता कमलेश कुमार मानव, विशेश्वर महतो, राहुल कुमार, अंकित कुमार समेत बड़ी संख्या में छात्र-नौजवान मौजूद रहे। शेखपुरा के अरियरी प्रखंड के ससबहना में शुक्रवार को आइसा और आरवाईए की ओर से छात्र-युवा संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-युवा शामिल हुए। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, बेरोजगारी, सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। देखें, मौके से आई तस्वीरें… छात्र आंदोलन को बताया बड़ी जीत आइसा के जिला सचिव मो. रिक्की खान और आरवाईए के जिला सचिव प्रवीण सिंह कुशवाहा ने कहा कि छात्र-नौजवानों के संघर्ष के दबाव में केंद्र सरकार को पीछे हटना पड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन और जंतर-मंतर पर कार्रवाई के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से हटने को वे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत मानते हैं। वक्ताओं ने कहा कि एकजुट छात्र-युवा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने अपनी मांगें रख सकते हैं। पटना आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का किया जिक्र वक्ताओं ने कहा कि 22 जुलाई को आइसा-आरवाईए के आह्वान पर पटना में राजभवन मार्च निकाला गया था। शिक्षा और भविष्य के सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों का भी उन्होंने जिक्र किया। नेताओं ने दावा किया कि आंदोलन के दबाव में छात्रों की रिहाई हुई और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने पड़े। पेपर लीक और बेरोजगारी पर चिंता कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, बेरोजगारी, सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे छात्र-युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने BPSC, BSSC और BPSSC समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। सरकारी स्कूलों को मजबूत करने की मांग वक्ताओं ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और कमजोर शैक्षणिक व्यवस्था का सबसे अधिक असर गरीब और मेहनतकश परिवारों के बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की महंगी शिक्षा वहन नहीं कर पाने वाले परिवारों के लिए सरकारी स्कूल सबसे बड़ा सहारा हैं। ऐसे में सरकारी स्कूलों को मजबूत करना जरूरी है। 6 सितंबर को पटना पहुंचने की अपील आइसा-आरवाईए नेताओं ने कहा कि शिक्षा, परीक्षा, रोजगार और स्कूल-कॉलेजों में सुधार के सवाल को लेकर राज्यभर में छात्र-युवा संवाद किया जा रहा है। उन्होंने छात्रों और युवाओं से 6 सितंबर को पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल पहुंचकर इन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। कार्यक्रम में भाकपा माले अरियरी प्रखंड सचिव सह किसान नेता कमलेश कुमार मानव, विशेश्वर महतो, राहुल कुमार, अंकित कुमार समेत बड़ी संख्या में छात्र-नौजवान मौजूद रहे।

