किशनगंज के पोठिया प्रखंड के सिंघिमारी गांव में 202 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर शुक्रवार को दो समुदाय आमने-सामने आ गए। आदिवासी और शेरशाहवादी समुदाय के लोग तीर-धनुष,भाला और पारंपरिक हथियारों के साथ विवादित जमीन पर पहुंचे। इससे इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस प्रशासन को सूचना मिली और अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिससे एक बड़ी घटना टल गई। यह विवाद मौजा रसियाडांगी,थाना संख्या-168, खाता संख्या-132,खेसरा संख्या-195, 196, 197, 224 और 225 की जमीन को लेकर है। मौके पर पहुंची पुलिस यह लगभग 202 एकड़ 93 डिसमिल गैर-मजरुआ जमीन बिहार सरकार के नाम दर्ज है। दोनों पक्षों का दावा है कि वे लंबे समय से इस पर खेती कर रहे हैं। इसी दावेदारी को लेकर विवाद बढ़ गया। शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जमीन पर इकट्ठा हुए। हथियारों के साथ लोगों के जुटने की सूचना पर छत्तरगाछ पुलिस कैंप प्रभारी शैलेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाकर स्थिति को संभाला। एक पक्ष ने पुलिस को आवेदन दिया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर 40-50 लोगों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। आवेदन में 2012-13 के पुराने विवाद का भी जिक्र है। जमीन बिहार सरकार की संपत्ति तनाव की सूचना मिलने पर एसडीपीओ-2 मनोज कुमार,अंचलाधिकारी मोहित राज,इंस्पेक्टर पंकज पंथ,पहाड़कट्टा थानाध्यक्ष फुलेंद्र कुमार,अर्राबाड़ी थानाध्यक्ष कनक लता और आरओ मनोज चौधरी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। अंचलाधिकारी ने साफ किया कि यदि जमीन सरकारी है,तो किसी व्यक्ति का उस पर निजी अधिकार नहीं है। यह जमीन बिहार सरकार की संपत्ति है। प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी उन्होंने बताया कि विवादित जमीन डोक नदी के किनारे की प्राकृतिक भूमि है। नदी के मुख्य क्षेत्र में किसी को बसाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। भूमिहीनों को जमीन पात्रता के आधार पर ही दी जाएगी। प्रशासन ने फिलहाल खेती और किसी भी तरह के निर्माण पर तुरंत रोक लगा दी है। कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। समाधान के लिए दोनों पक्षों के पांच-पांच प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया गया है। इलाके में अभी स्थिति सामान्य है। किशनगंज के पोठिया प्रखंड के सिंघिमारी गांव में 202 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर शुक्रवार को दो समुदाय आमने-सामने आ गए। आदिवासी और शेरशाहवादी समुदाय के लोग तीर-धनुष,भाला और पारंपरिक हथियारों के साथ विवादित जमीन पर पहुंचे। इससे इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस प्रशासन को सूचना मिली और अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिससे एक बड़ी घटना टल गई। यह विवाद मौजा रसियाडांगी,थाना संख्या-168, खाता संख्या-132,खेसरा संख्या-195, 196, 197, 224 और 225 की जमीन को लेकर है। मौके पर पहुंची पुलिस यह लगभग 202 एकड़ 93 डिसमिल गैर-मजरुआ जमीन बिहार सरकार के नाम दर्ज है। दोनों पक्षों का दावा है कि वे लंबे समय से इस पर खेती कर रहे हैं। इसी दावेदारी को लेकर विवाद बढ़ गया। शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जमीन पर इकट्ठा हुए। हथियारों के साथ लोगों के जुटने की सूचना पर छत्तरगाछ पुलिस कैंप प्रभारी शैलेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाकर स्थिति को संभाला। एक पक्ष ने पुलिस को आवेदन दिया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर 40-50 लोगों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। आवेदन में 2012-13 के पुराने विवाद का भी जिक्र है। जमीन बिहार सरकार की संपत्ति तनाव की सूचना मिलने पर एसडीपीओ-2 मनोज कुमार,अंचलाधिकारी मोहित राज,इंस्पेक्टर पंकज पंथ,पहाड़कट्टा थानाध्यक्ष फुलेंद्र कुमार,अर्राबाड़ी थानाध्यक्ष कनक लता और आरओ मनोज चौधरी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। अंचलाधिकारी ने साफ किया कि यदि जमीन सरकारी है,तो किसी व्यक्ति का उस पर निजी अधिकार नहीं है। यह जमीन बिहार सरकार की संपत्ति है। प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी उन्होंने बताया कि विवादित जमीन डोक नदी के किनारे की प्राकृतिक भूमि है। नदी के मुख्य क्षेत्र में किसी को बसाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। भूमिहीनों को जमीन पात्रता के आधार पर ही दी जाएगी। प्रशासन ने फिलहाल खेती और किसी भी तरह के निर्माण पर तुरंत रोक लगा दी है। कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। समाधान के लिए दोनों पक्षों के पांच-पांच प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया गया है। इलाके में अभी स्थिति सामान्य है।

