फतेहपुर ARTO ऑफिस में छापा, 4 पर केस दर्ज:डीएम के निर्देश पर 50 पुलिसकर्मियों के साथ हुई थी कार्रवाई

फतेहपुर ARTO ऑफिस में छापा, 4 पर केस दर्ज:डीएम के निर्देश पर 50 पुलिसकर्मियों के साथ हुई थी कार्रवाई

फतेहपुर जिला मुख्यालय स्थित एआरटीओ कार्यालय में गुरुवार को डीएम के निर्देश पर छापेमारी की गई थी। एडीएम विनय पांडेय और एएसपी ज्ञान प्रकाश राय ने करीब 50 पुलिसकर्मियों के साथ कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की। इस दौरान करीब 25 संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया। पूछताछ के बाद 15 लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि 10 को हिरासत में लेकर कोतवाली ले जाया गया। शुक्रवार को 4 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 10 लोगों को कोतवाली ले गई पुलिस कोतवाली प्रभारी हेमंत कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को बताया कि राधानगर थाना क्षेत्र के सथरियांव निवासी प्रदीप सिंह, परशुरामपुर निवासी विपिन साहू, सिविल लाइन निवासी विनोद कुमार और रानी कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान ये लोग एआरटीओ कार्यालय आने का कोई ठोस कारण नहीं बता सके। पहले भी हो चुकी है छापेमारी एआरटीओ कार्यालय में बाहरी लोगों की मौजूदगी को लेकर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। इससे पहले तत्कालीन डीएम ने टीम के साथ कार्यालय में छापा मारा था। उस दौरान करीब 35 से 40 लोगों को पकड़ा गया था। इसके बावजूद कार्यालय के आसपास बाहरी लोगों की सक्रियता जारी रहने की बात सामने आ रही थी। अधिकारियों-बाबुओं से मिलीभगत के आरोप कार्यालय में मौजूद बाहरी लोगों को लेकर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि वे अधिकारियों और बाबुओं की मिलीभगत से लोगों के काम कराने के बदले उनसे अतिरिक्त रकम लेते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। कार्यालय परिसर के बाहर भी सक्रिय हैं लोग विभाग के मुखिया रंजीत सिंह ने छापेमारी की कार्रवाई पर अलग दावा किया है। उनका कहना है कि कार्यालय परिसर के अंदर से किसी व्यक्ति को नहीं पकड़ा गया। उनके मुताबिक, जिला प्रशासन की टीम ने लोगों को परिसर के बाहर से पकड़ा और फिर अंदर लाया था। एआरटीओ कार्यालय के बाहर अब भी कई लोग अपनी दुकानें लगाकर बैठे नजर आते हैं। कार्यालय में एआरटीओ, पीटीओ, आरआई समेत चार बाबू महत्वपूर्ण कार्य देखते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कार्यालय के आसपास सक्रिय बाहरी लोगों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर निगरानी क्यों नहीं रखी जा रही थी। छापेमारी के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और जांच से यह स्पष्ट होगा कि पकड़े गए लोगों की कार्यालय में मौजूदगी का वास्तविक कारण क्या था और क्या किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है।

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