मेनोपॉज पर 42 की श्रेया घोषाल ने दिया बयान, सिंगर बोलीं- ये नेचर का हिस्सा है, होना ही है

मेनोपॉज पर 42 की श्रेया घोषाल ने दिया बयान, सिंगर बोलीं- ये नेचर का हिस्सा है, होना ही है

Shreya Ghoshal On Menopause: अपनी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली मशहूर सिंगर श्रेया घोषाल इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर बात कर रही हैं। हाल ही में ‘हॉटरफ्लाई’ के साथ बातचीत में उन्होंने मां बनने के बाद हुए बदलावों, करियर और परिवार के साथ संतुलन से लेकर मेनोपॉज तक पर अपनी राय रखी। 42 साल की श्रेया ने कहा कि वो मेनोपॉज को लेकर चिंतित जरूर हैं, लेकिन इसे लेकर किसी तरह का डर नहीं है, क्योंकि यह महिला शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है।

मेनोपॉज को लेकर क्या सोचती हैं श्रेया?

बातचीत के दौरान जब श्रेया से पूछा गया कि क्या वह मेनोपॉज को लेकर अपने दोस्तों के साथ चर्चा करती हैं, तो उन्होंने बताया कि फिलहाल उनके ग्रुप में इस विषय पर बहुत ज्यादा बातचीत नहीं हुई है। हालांकि, वह देख रही हैं कि अब महिलाएं इस मुद्दे पर पहले की तुलना में ज्यादा खुलकर बात कर रही हैं।

श्रेया के मुताबिक मेनोपॉज कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे लेकर डरकर बैठा जाए। यह प्रकृति का हिस्सा है और हर महिला के जीवन में एक समय पर यह बदलाव आना ही है। उनका कहना है कि इस विषय पर खुलकर बातचीत होना अच्छी बात है, क्योंकि महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में जानकारी और समझ दोनों होनी चाहिए।

मां बनने के बाद आज भी महसूस होता है ‘ब्रेन फॉग’

श्रेया ने मातृत्व के बाद अपनी जिंदगी में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मां बनने के बाद उन्हें कई बार चीजें याद रखने और तुरंत प्रोसेस करने में परेशानी महसूस होती है। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि कभी-कभी वह किसी कमरे में जाती हैं और वहां पहुंचकर खुद से पूछती हैं कि आखिर यहां आई क्यों थीं।

उनके मुताबिक बच्चे के जन्म से पहले वह एक साथ कई काम संभालने में ज्यादा सक्षम महसूस करती थीं, लेकिन मां बनने के बाद प्राथमिकताएं और शरीर दोनों काफी बदलते हैं। उनका मानना है कि महिलाओं का शरीर गर्भावस्था और मातृत्व के दौरान कई स्तरों पर बदलाव से गुजरता है, इसलिए उन्हें खुद के लिए भी समय देना जरूरी है।

पति शिलादित्य निभाते हैं बराबर जिम्मेदारी

श्रेया ने अपने पति शिलादित्य मुखोपाध्याय की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि बच्चे की देखभाल केवल उनकी जिम्मेदारी नहीं है। कई बार ऐसा हुआ है कि वह काम की वजह से बेहद थकी हुई घर लौटीं और सो गईं, जबकि रात में बच्चे के उठने पर शिलादित्य ने उसकी जिम्मेदारी संभाली।

श्रेया का मानना है कि पैरेंटिंग किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है। पति-पत्नी दोनों को घर और बच्चे की जिम्मेदारियां मिलकर उठानी चाहिए। उनके अनुसार एक अच्छी पार्टनरशिप वही है, जिसमें दोनों एक-दूसरे के काम और जरूरतों को समझें।

मां बनने के बाद करियर और खुद के बीच संतुलन

श्रेया ने यह भी माना कि मां बनने के बाद महिलाओं के लिए खुद के बारे में सोचना कई बार मुश्किल हो जाता है। बच्चे की जरूरतें, घर और काम के बीच महिलाएं अक्सर अपनी प्राथमिकताओं को पीछे कर देती हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें भी काफी समय बाद यह एहसास हुआ कि अब उन्हें अपने लिए भी सोचना चाहिए।

उनके अनुसार किसी महिला का कुछ समय के लिए करियर से ब्रेक लेना गलत नहीं है। अगर वह अपने बच्चे के साथ समय बिताने के लिए काम रोकना चाहती है तो यह उसका अधिकार है। हालांकि, यह फैसला हर महिला की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

नेशनल अवॉर्ड वाला गाना घर में किया था रिकॉर्ड

श्रेया ने एक दिलचस्प किस्सा बताते हुए कहा कि जिस दौर में वह मां बनने के बाद बच्चे की देखभाल कर रही थीं, उसी समय उन्होंने वह गाना भी रिकॉर्ड किया जिसने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया। स्टूडियो जाने के बजाय उन्होंने घर में ही रिकॉर्डिंग का इंतजाम किया।

बच्चे के सो जाने के बाद वह घर में एक छोटा सा रिकॉर्डिंग सेटअप तैयार करके काम करती थीं। इससे साफ है कि मां बनने के बाद भी उन्होंने संगीत को पूरी तरह अपने से दूर नहीं किया।

महिलाओं के लिए श्रेया का संदेश

श्रेया का कहना है कि करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना हमेशा आसान नहीं होता। रिश्ते समय के साथ बदलते हैं और पति-पत्नी की साझेदारी भी अलग-अलग पड़ावों पर नया रूप लेती है। इसलिए एक-दूसरे से खुलकर बात करना और जिम्मेदारियां बांटना जरूरी है।

मेनोपॉज से लेकर मातृत्व तक, श्रेया की बातें यही बताती हैं कि महिलाओं के शरीर और जीवन में आने वाले बदलावों को छिपाने के बजाय उन पर बातचीत होनी चाहिए। उनके लिए ये बदलाव डरने की वजह नहीं, बल्कि जिंदगी का स्वाभाविक हिस्सा हैं।

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