पटना में डिजिटल अरेस्ट से 2.5 करोड़ की ठगी:सरगना समेत 3 गिरफ्तार; कार पर पॉलिटिकल बोर्ड और विधानसभा का पास लगा था

पटना में डिजिटल अरेस्ट से 2.5 करोड़ की ठगी:सरगना समेत 3 गिरफ्तार; कार पर पॉलिटिकल बोर्ड और विधानसभा का पास लगा था

पटना साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इनमें गिरोह का सरगना खगौल निवासी गौरव कुमार, कंकड़बाग निवासी आदर्श कुमार और शेखपुरा निवासी अमन राज शामिल हैं। यह गिरोह देश के कई राज्यों में लोगों को डिजिटल अरेस्ट और एपीके फाइल के जरिए ठगी का शिकार बनाता था। इस गिरोह ने कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 2.5 करोड़ रुपए ठगे थे। पश्चिम बंगाल पुलिस भी इन आरोपियों की तलाश कर रही थी। पटना साइबर पुलिस को सूचना मिली थी कि यह गिरोह पटना से काम कर रहा है। इसके बाद तकनीकी जांच शुरू की गई और बुधवार देर रात ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को पकड़ा गया। आरोपियों के पास से एक लग्जरी कार भी बरामद पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लग्जरी कार भी बरामद की है। इस कार पर एक राजनीतिक पार्टी के पटना नगर महासचिव का बोर्ड और विधानसभा का पास लगा हुआ था। पुलिस अब जांच कर रही है कि आरोपियों के राजनीतिक संबंध किस हद तक हैं और क्या इन संबंधों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था। डीएसपी और साइबर थाना प्रभारी संगीता कुमारी ने बताया कि पुलिस राजनीतिक संपर्कों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक देशभर में कितने लोगों को ठगा है और कुल कितने रुपए की ठगी की है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक लग्जरी कार के अलावा 6 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 3 चेकबुक, 1 मुहर, 5 एटीएम कार्ड, 2 पासबुक और कुछ नकद रुपए भी बरामद किए हैं। बरामद किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह साइबर ठगी के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करता था। कभी लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जाता था, तो कभी उनके मोबाइल पर एपीके फाइल भेजकर खाते और निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती थी। तनख्वाह पर युवकों को रखते थे, उनसे करवाते थे फोन पुलिस की पूछताछ में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का सरगना गौरव कुमार लंबे समय से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहा था। वह तनख्वाह पर युवकों को भर्ती करता था और उनसे लोगों को फोन करवाता था। फोन करने वाले लोगों को अलग-अलग सरकारी एजेंसियों या जांच का अधिकारी बताकर डराया जाता था। इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट किए जाने की बात कहकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।

किराए के बैंक खातों में मंगवाते थे ठगी की रकम गौरव कुमार ठगी की रकम मंगाने के लिए किराए के बैंक खाते उपलब्ध करवाता था। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त रकम सीधे इन खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम को अलग-अलग माध्यमों से निकालकर या निवेश कर ठिकाने लगाया जाता था। पूछताछ में आरोपितों ने यह भी बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले 28 हजार रुपए में कस्टम नाम की एक कंपनी खरीदी थी। कंपनी के करंट अकाउंट का इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। पुलिस को चकमा देने के लिए गौरव उस कम्पनी का डायरेक्टर बताता था। पुलिस अब कंपनी और उसके बैंक खातों से हुए लेन-देन की भी जांच कर रही है।

ठगी के पैसे से खरीदते थे सोने के सिक्के, जमीन में भी लगाते थे रकम पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से हासिल रकम को आरोपित सिर्फ बैंक खातों में नहीं रखते थे। वे रकम का इस्तेमाल सोने के सिक्के खरीदने और जमीन में निवेश करने में करते थे।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों की चल-अचल संपत्ति का सत्यापन कर रही है। जांच में यदि संपत्ति ठगी की रकम से अर्जित पाई जाती है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी।

कई राज्यों में दर्ज हैं साइबर ठगी के मामले गिरफ्तार आरोपितों का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपितों के खिलाफ देश के कई राज्यों में साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं। पुलिस अब दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क कर रही है ताकि गिरोह की पुरानी वारदातों का पता लगाया जा सके।

गिरोह के 5 सदस्य अभी फरार पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह में अभी पांच अन्य सदस्य फरार हैं। उनकी पहचान और ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर पुलिस की अलग-अलग टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

पुलिस अब खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कुंडली साइबर पुलिस का फोकस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क को सामने लाने पर है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि किराए के बैंक खाते कौन उपलब्ध करवाता था, एपीके फाइल कौन तैयार करता था, लोगों का डेटा कहां से मिलता था और ठगी की रकम को सोने व जमीन में निवेश करने का नेटवर्क कौन संभालता था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गिरोह के राजनीतिक संपर्कों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि राजनीतिक पद और विधानसभा पास का इस्तेमाल केवल प्रभाव दिखाने के लिए किया जा रहा था या इसके जरिए किसी तरह की मदद भी ली जाती थी। पटना साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। इनमें गिरोह का सरगना खगौल निवासी गौरव कुमार, कंकड़बाग निवासी आदर्श कुमार और शेखपुरा निवासी अमन राज शामिल हैं। यह गिरोह देश के कई राज्यों में लोगों को डिजिटल अरेस्ट और एपीके फाइल के जरिए ठगी का शिकार बनाता था। इस गिरोह ने कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 2.5 करोड़ रुपए ठगे थे। पश्चिम बंगाल पुलिस भी इन आरोपियों की तलाश कर रही थी। पटना साइबर पुलिस को सूचना मिली थी कि यह गिरोह पटना से काम कर रहा है। इसके बाद तकनीकी जांच शुरू की गई और बुधवार देर रात ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को पकड़ा गया। आरोपियों के पास से एक लग्जरी कार भी बरामद पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लग्जरी कार भी बरामद की है। इस कार पर एक राजनीतिक पार्टी के पटना नगर महासचिव का बोर्ड और विधानसभा का पास लगा हुआ था। पुलिस अब जांच कर रही है कि आरोपियों के राजनीतिक संबंध किस हद तक हैं और क्या इन संबंधों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था। डीएसपी और साइबर थाना प्रभारी संगीता कुमारी ने बताया कि पुलिस राजनीतिक संपर्कों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक देशभर में कितने लोगों को ठगा है और कुल कितने रुपए की ठगी की है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक लग्जरी कार के अलावा 6 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 3 चेकबुक, 1 मुहर, 5 एटीएम कार्ड, 2 पासबुक और कुछ नकद रुपए भी बरामद किए हैं। बरामद किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह साइबर ठगी के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करता था। कभी लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जाता था, तो कभी उनके मोबाइल पर एपीके फाइल भेजकर खाते और निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती थी। तनख्वाह पर युवकों को रखते थे, उनसे करवाते थे फोन पुलिस की पूछताछ में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का सरगना गौरव कुमार लंबे समय से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहा था। वह तनख्वाह पर युवकों को भर्ती करता था और उनसे लोगों को फोन करवाता था। फोन करने वाले लोगों को अलग-अलग सरकारी एजेंसियों या जांच का अधिकारी बताकर डराया जाता था। इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट किए जाने की बात कहकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।

किराए के बैंक खातों में मंगवाते थे ठगी की रकम गौरव कुमार ठगी की रकम मंगाने के लिए किराए के बैंक खाते उपलब्ध करवाता था। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त रकम सीधे इन खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम को अलग-अलग माध्यमों से निकालकर या निवेश कर ठिकाने लगाया जाता था। पूछताछ में आरोपितों ने यह भी बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले 28 हजार रुपए में कस्टम नाम की एक कंपनी खरीदी थी। कंपनी के करंट अकाउंट का इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। पुलिस को चकमा देने के लिए गौरव उस कम्पनी का डायरेक्टर बताता था। पुलिस अब कंपनी और उसके बैंक खातों से हुए लेन-देन की भी जांच कर रही है।

ठगी के पैसे से खरीदते थे सोने के सिक्के, जमीन में भी लगाते थे रकम पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से हासिल रकम को आरोपित सिर्फ बैंक खातों में नहीं रखते थे। वे रकम का इस्तेमाल सोने के सिक्के खरीदने और जमीन में निवेश करने में करते थे।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों की चल-अचल संपत्ति का सत्यापन कर रही है। जांच में यदि संपत्ति ठगी की रकम से अर्जित पाई जाती है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी।

कई राज्यों में दर्ज हैं साइबर ठगी के मामले गिरफ्तार आरोपितों का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपितों के खिलाफ देश के कई राज्यों में साइबर ठगी से जुड़े मामले दर्ज हैं। पुलिस अब दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क कर रही है ताकि गिरोह की पुरानी वारदातों का पता लगाया जा सके।

गिरोह के 5 सदस्य अभी फरार पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह में अभी पांच अन्य सदस्य फरार हैं। उनकी पहचान और ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर पुलिस की अलग-अलग टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

पुलिस अब खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कुंडली साइबर पुलिस का फोकस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क को सामने लाने पर है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि किराए के बैंक खाते कौन उपलब्ध करवाता था, एपीके फाइल कौन तैयार करता था, लोगों का डेटा कहां से मिलता था और ठगी की रकम को सोने व जमीन में निवेश करने का नेटवर्क कौन संभालता था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गिरोह के राजनीतिक संपर्कों की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि राजनीतिक पद और विधानसभा पास का इस्तेमाल केवल प्रभाव दिखाने के लिए किया जा रहा था या इसके जरिए किसी तरह की मदद भी ली जाती थी।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *