भाजपा गोरखपुर की क्षेत्रीय टीम में 5 जिलाध्यक्षों को शामिल किया गया है। दैनिक भास्कर ने पहले ही इस बात की संभावना जताई थी। ये जिलाध्यक्ष पद से हटने के बाद मुख्य धारा में बने रहने के लिए कवायद में जुटे थे। क्षेत्रीय टीम की सूची के कई बार रिवाइज होने के बाद अंतत: जब अंतिम सूची में नाम दिखा तो उन्होंने राहत की सांस ली। गोरखपुर से 3 पूर्व जिलाध्यक्षों को क्षेत्रीय टीम में शामिल किया गया है। युधिष्ठिर सिंह लंबे समय तक भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं। जिलाध्यक्ष से हटने के बाद से वह राजनीति में सक्रिय जरूर थे लेकिन किसी पद की उम्मीद लगाए बैठे थे। प्रदेश टीम की घोषणा होने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला तो पूरा जोर क्षेत्रीय टीम के लिए लगाया। उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि उन्हें क्षेत्रीय महामंत्री के रूप में जगह दी जाएगी लेकिन पार्टी ने उन्हें क्षेत्रीय उपाध्यक्ष का जिम्मा दिया है। वह प्रदेश उपाध्यक्ष डा. धर्मेंद्र सिंह के करीबी माने जाते हैं।
इसी तरह राजेश गुप्ता भी क्षेत्रीय महामंत्री की दौड़ में थे। यह पद उन्हें नहीं मिल सका लेकिन उन्होंने क्षेत्रीय टीम में जगह बना ली। उन्हें भी उपाध्यक्ष बनाया गया है। उनका नाम काफी प्रभावी माना जाता है। लगातार दो बार गोरखपुर महानगर के जिलाध्यक्ष रहे। नगर निकाय और विधानसभा 2022 का चुनाव उन्हीं के समय हुआ। मुख्यमंत्री और डा. धर्मेंद्र सिंह के वह करीबी माने जाते हैं। जब पूर्व महानगर अध्यक्ष देवेश श्रीवास्तव का निधन हो गया तो राजेश गुप्ता को ही महानगर संयोजक के रूप में महानगर की जिम्मेदारी दी गई थी। पद पर न रहते हुए भी विभिन्न कार्यक्रमों में उन्हें मुख्यमंत्री के मंच पर जगह मिलती रहती है।
राहुल श्रीवास्तव भी पूर्व महानगर अध्यक्ष रहे हैं। लंबे समय से किसी महत्वपूर्ण पद पर नहीं थे। इस बार पार्टी ने उन्हें क्षेत्रीय महामंत्री का महत्वपूर्ण दायित्व दिया है। कायस्थ समाज से आने वाले राहुल ने भी पूरा जोर लगाया था। कुछ प्रभावशाली नेताओं के ऊपर उन्हें तवज्जो मिली है। उन्हें इतना महत्वपूर्ण पद मिलने के बाद भाजपा के एक वर्ग में काफी खलबली है।
कन्हैया पासवान, सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष रहे हैं। एससी वर्ग से आने वाले कन्हैया को क्षेत्रीय मंत्री बनाया गया है। इसी तरह कुशीनगर के पूर्व जिलाध्यक्ष जयप्रकाश शाही को भी क्षेत्रीय टीम में उपाध्यक्ष बनाया गया है।

